Ilm-Ki-Ahmiyat-7

Ilm Ki Ahmiyat: Part-7

Allah Rabbul Izzat Ne Quraan Me Baar Baar Musalamno Ko Ubhara Hai Duniyawi Ilm Haasil Karne Ke Liye, Sharayi Ilm Tou Yakinan Haasil Karna Hai Yeh Tou Buniyaad Hai Iski… Lekin Uskey Saath-Saath Duniyawi Ilm Bhi Haasil Karna Hai ,.. Jo Bohot Se Logone Isko Tark Kar Diya …

• Momin Ki Sifat Ke Wo Zikr Karte Hai Allah Ka
Allah Rabbul Izzat Quraan Me Ek Jagah Farmata Hai :
♥ Al-Quran: “Yakinan Zameen-O-Aasman Ki Paidaish Me, Aur Raat Aur Din Ke Aane Aur Jaane Me Aqalmand Logon Ke Liye Nishaniya Hai”
Aagey Allah Rabbul Izzat In Aqalmand Logon Ki Sifate Bayan Farmata Hai :
“Ke Yeh Aqalmand Log Allah Ka Zikr Karte Hai Khadey Se, Baithey Se Aur Apni Karwato Par Aur Ye Log Fiqr Karte Hai Zameen-O-Aasmaan Ki Paidaish Me.. Aur Jab Fiqr Karte Hai Aasmaan Aur Zameen Ki Paidaish Me Tou Kahte Hai Ke – “Aye Allah! Tuney Beja Nahi Paida Kiya Inn Tamaam Cheezo Ko! Teri Zaat Paak Hai. Mujhe Aag Ke Azaab Se Bacha.” – [Surah(3) Aale Imran: Ayat 189-190] – @[156344474474186:]

– Tou Yaha Allah Ta’ala Ne Momino Ki Sifat Batayi Hai Ke Allah Ka Zikr Aur Kaaynat Ke Andar Fiqr Karte Hai Momin…
Ab Afsos Ki Baat Hai Ke Jaha Zikr Hona Tha Waha Fiqr Shuru Kar Diya Humne Aur Jaha Fiqr Hona Tha Waha Zikr Karte Reh Gaye ,..

#Zikr Karna Hai Deen Ka!
Ismey Fiqr Nahi Karna.. Haa! Gour Karna Alag Baat Hai … Aisa Kyu Aur Waisa Kyu? Aur Falah Falah …
Bus Yeh Kehna Ke – “Aye Allah Mujhe Samjh Nahi Aa Raha Tu Mujhe Deen Ko Samjhney Ki Taufiq Dey,..” Lekin Ismey Fiqr Nahi Karna Hai…
Kyunki Shariyat Tou Bani-Banayi De Di Gayi Sabse Behtareen. Aur Ab Ismey Koi Naye Aqaid Ijaad Nahi Karna …

#Fiqr Tou Karna Hai Zameen–O-Aasman Me, Kaaynaat Me
Tou Goya Agar Musalmaan Duniya Ke Andar Ijadad Kartey Hai, Discoveries Karte Hai, Inventions Karte Hai, Inkashafat Karte Hai Tou Iski Ijajat Hai …
Lekin Musalmaano Ne Duniya Me Tou Ijadad Chorr Diye.. Deen Ke Andar Ijadad Kiye Naye-Naye Aqaiad… Subhan’Allah

# Jaha Zikr Tha Waha Fiqr Karne Lagey Hum Aur Jaha Fiqr Tha Waha Zikr Karne Lage ,…

* Duniya Me Sirf Zikr Hi Kar Rahe Hum –
“Ke Dekho! Kitne Acche-Acche Mobile Bana Rahi Hai Wo Companies”,
Shour Nahi Aa Raha Ke Hum Kyu Nahi Bana Saktey Aesi Cheeze? Humare Mumalik Kyu Nahi Bana Sakte?
Itni Acchi Acchi Goliya Aur Kitne Acche Acche Equipments Ijaad Karey Jis’se Insaniyat Ko Nafa Pohchey, Yeh Sab Hum Kyu Nahi Bana Sakte Tamaam Cheeze?

* Aur Jaha Ziqr Tha Waha Fiqre Shuru Kar Di –
“Mai Sochta Hu Yeh Hadees Aise Nahi Aise Hoti Tou Kitna Acha Hota?
Mai Sochta Hu Quraan Ko Padhney Se Accha Galey Me Latkaya Jaye Tou Jyada Sawaab !! Subhan’Allah…”

# Tou Kya Shariyat Humari Manmani Tareeke Se Chalne Waali Hai ? …. Nahi!! Bilkul Nahi!

# Lihaza Allah Ke Liye Hume Inn Baato Par Gour Karna Chahiye Ke Humara Rab Humse Kya Chahta Hai ? Aur Yeh Baat Siwaye Ilm Ke Hume Maloom Hona Na’mukin Hai .. Aur Ismey Dono Ilm Shaamil Hai …

Tou Allah Rabbul Izzat Ne Momino Ki Sifat Me Bayan Kar Diya Ke Yeh Ziqr Karte Hai Allah Ka Aur Fiqr Karte Hai Duniyawi Uloom Ka ,…

☆ इल्म की अहमियत: पार्ट-७
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क़ुरान में बार-बार मुसलमानो को उभारा है दुनियावी इल्म हासिल करने के लिए, शराई इल्म तो यक़ीनन हासिल करना है! यह तो बुनियाद है इसकी लेकिन उसके साथ-साथ दुनियावी इल्म भी हासिल करना है जो बहुत से लोगो ने इसको तर्क कर दिया !!

• मोमिन की सिफत के वो ज़िक्र करते है अल्लाह का
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त में एक जगह फ़रमाता है:
♥ अल-कुरान: “यक़ीनन ज़मीन और आसमान की पैदाइश में, और रात और दिन के आने और जाने में अकलमंद लोगों के लिए निशानियाँ है”
आगे अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इन अकलमंद लोगों की सिफ़ते बयान फ़रमाता है:
“की यह अकलमंद लोग अल्लाह का ज़िक्र करते है खड़े से, बैठे से और अपनी करवटों पर और ये लोग फिक्र करते है ज़मीन और आसमान की पैदाइश में, और जब फिक्र करते है आसमान और ज़मीन की पैदाइश में तो कहते है की -“ऐ अल्लाह! तूने बेजा नहीं पैदा किया इन तमाम चीज़ों को! तेरी ज़ात पाक है मुझे आग के अज़ाब से बचा”. – [सूरह ३ आले इमरान आयत १८९-१९०] – @[156344474474186:]

– तो यहाँ अल्लाह तआला ने मोमिनो की सिफत बताई है की अल्लाह का ज़िक्र और कायनात के अंदर फिक्र करते है मोमिन ,…
अब अफ़सोस की बात है की: जहाँ ज़िक्र होना था वहां फिक्र शुरू कर दिया हमने और जहाँ फिक्र होना था वहाँ ज़िक्र करते रह गये …

# ज़िक्र करना है दीन का!
इसमे फिक्र नहीं करना.. हाँ! गौर करना अलग बात है ऐसा क्यों और वैसा क्यों? और फलां-फलां बस यह कहना की- “ऐ अल्लाह मुझे समझ नहीं आ रहा तू मुझे दीन को समझने की तौफ़ीक़ दे!!” लेकिन इसमें फिक्र नहीं करना है…
क्यूंकि शरीयत तो बनी-बनायीं दे दी गयी सबसे बेहतरीन और अब इसमे कोई नए अक़ाइद इजाद नहीं करना

# फिक्र तो करना है ज़मीन और आसमान में, कायनात में
तो गोया अगर मुसलमान दुनिया के अंदर इजादाद करते है,.. खोज करते है इंकशफात करते है तो इसकी इजाजत है !!
लेकिन मुसलमानो ने दुनिया में तो इजादाद छोड़ दिए! दीन के अंदर इजादाद किये नए-नए अक़ाइद (सुभान’अल्लाह)!!

# जहाँ ज़िक्र था वहाँ फिक्र करने लगे हम और जहाँ फिक्र था वहाँ ज़िक्र करने लगे
दुनिया में सिर्फ ज़िक्र ही कर रहे हम-
“की देखो! कितने अच्छे-अच्छे मोबाइल बना रही है वो कंपनी”
शऊर नहीं आ रहा की हम क्यों नहीं बना सकते ऐसी चीज़ें? हमारे मुमालिक क्यों नहीं बना सकते?
इतनी अच्छी-अच्छी गोलिया और कितने अच्छे-अच्छे इक्विपमेंट्स ईजाद करे जिससे इंसानियत को नफा पहुँचे यह सब हम क्यों नहीं बना सकते तमाम चीज़े?

# और जहाँ ज़िक्र था वहाँ फ़िक़रे शुरू कर दी-
*मैं सोचता हूँ यह हदीस ऐसे नहीं ऐसे होती तो कितना अच्छा होता ?
*मैं सोचता हूँ क़ुरान को पढ़ने से अच्छा गले में लटकाया जाए तो ज़्यादा सवाब !
(सुभान’अल्लाह)

तो क्या शरीयत हमारी मनमानी तरीके से चलने वाली है ? नहीं !! बिलकुल नहीं !!
# लिहाज़ा अल्लाह के लिए हमे इन बातों पर गौर करना चाहिए की हमारा रब हमसे क्या चाहता है? और यह बात सिवाए इल्म के हमे मालूम होना ना मुमकिन है और इसमे दोनों इल्म शामिल है …
तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने मोमिनो की सिफत में बयान कर दिया की यह ज़िक्र करते है अल्लाह का और फिक्र करते है दुनियावी उलूम का …

To Be Continue …

• इल्म की अहमियत → Parts:

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