४० रब्बना दुआ हिंदी में | 40 Rabbana Duas in Hindi and Roman Urdu

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40 Rabbana Duas – Duas with Rabbanah

Qur’anic supplications with ‘Rabbana’ in Hindi & Arabic Transliteration

#Dua: TransliterationHindi TranslationUrdu
1

Rabbana taqabbal minna innaka antas Sameeaul Aleem

ऐ हमारे रब हमारी (ये खिदमत) क़ुबूल कर बेशक़ तू ही (दुआ) का सुनने वाला है (और उसका) जानने वाला है।
[2:127]
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ العَلِيمُ
[البقرة :127]
2

Rabbana wa-j’alna Muslimayni laka wa min Dhurriyatina ‘Ummatan Muslimatan laka wa ‘Arina Manasikana wa tub ‘alayna ‘innaka ‘antat-Tawwabu-Raheem

ऐ हमारे रब्ब हमें अपना फरमाबरदार बना दे और हमारी औलाद में से भी एक जम’आत को अपना फरमाबरदार बना और हमें हमारे हज के तारीके बता दे और हमारी तौबाह क़ुबूल फरमा बेशक़ तू बड़ा तौबाह क़ुबूल करने वाला निहायत रहम वाला है।
[2:128]
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
[البقرة :128]
3

Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil ‘akhirati hasanatan waqina ‘adhaban-nar

ऐ हमारे रब्ब हमें दुनिया में नेकी और आख़िरत में भी नेकी दे और हमें दोज़ख ले अज़ाब से बचा।
[2:201]
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
[البقرة :201]
4

Rabbana afrigh ‘alayna sabran wa thabbit aqdamana wansurna ‘alal-qawmil-kafirin

ऐ हमारे रब! हमपर धैर्य उडेल दे और हमारे क़दम जमा दे और इनकार करनेवाले लोगों पर हमें विजय प्रदान कर।
[2:250]
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْراً وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى القَوْمِ الكَافِرِينَ
[البقرة :250]
5

Rabbana la tu’akhidhna in-nasina aw akhta’na

ऐ हमारे रब अगर हम भूल जाये या ग़लती करें तो हमें न पकड़।
[2:286]
رَبَّنَا لاَ تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا
[البقرة :286]
6

Rabbana wala tahmil alayna isran kama hamaltahu ‘alal-ladheena min qablina

ऐ हमारे रब और हम पर भारी बोझ न रख जैसा तूने हम से पहले लोगो पर रखा था।
[2:286]
رَبَّنَا وَلاَ تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا
[البقرة :286]
7

Rabbana wala tuhammilna ma la taqata lana bihi wa’fu anna waghfir lana wairhamna anta mawlana fansurna ‘alal-qawmil kafireen

ऐ हमारे रब और हमसे वह बोझ न उठवा जिसकी हमें ताक़त नहीं और हमें मु’आफ़ कर दे और हमें बख़्श दे और हम पर रहम कर तू ही हमारा कारसाज़ है काफिरों के मुक़ाबले में तू हमारी मदद कर।
[2:286]
رَبَّنَا وَلاَ تُحَمِّلْنَا مَا لاَ طَاقَةَ لَنَا بِهِ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا أَنتَ مَوْلاَنَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
[البقرة :286]
8

Rabbana la tuzigh quloobana ba’da idh hadaytana wa hab lana milladunka rahmah innaka antal Wahhab

ऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है। [सुरह आले इमरान 3:8]رَبَّنَا لاَ تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ
[8: آل عمران]
9

Rabbana innaka jami’unnasi li-Yawmil la rayba fi innAllaha la yukhliful mi’aad

ऐ हमारे रब! तू एक दिन सब लोगों को इकट्ठा करने वाला है जिसमें कोई शक़ नहीं बेशक़ अल्लाह अपने वादे के खिलाफ नहीं करता। [सुरह आले इमरान 3:9]رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لاَّ رَيْبَ فِيهِ إِنَّ اللّهَ لاَ يُخْلِفُ الْمِيعَادَ
[آل عمران :9]
10

Rabbana innana amanna faghfir lana dhunuubana wa qinna ‘adhaban-Naar

ऐ हमारे रब हम ईमान लाए है सो हमें हमारे गुनाह बख़्श दे और हमें दोज़ख के अज़ाब से बचा ले। [सुरह आले इमरान 3:16]رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
[آل عمران :16]
11

Rabbana amanna bima anzalta wattaba ‘nar-Rusula fak-tubna ma’ash-Shahideen

ऐ हमारे रब हम इस चीज़ पर ईमान लाए जो तूने नाज़िल की और हम रसूल के ता’बेदार हुए सो तू हमें गवाही देने वालो में लिख ले।
[सुरह आले इमरान 3:53]
رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلَتْ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَِ
[آل عمران :53]
12

Rabbana-ghfir lana dhunuubana wa israfana fi amrina wa thabbit aqdamana wansurna ‘alal qawmil kafireen

ऐ हमारे पालने वाले हमारे गुनाह और अपने कामों में हमारी ज्यादतियॉ माफ़ कर और दुश्मनों के मुक़ाबले में हमको साबित क़दम रख और काफ़िरों के गिरोह पर हमको फ़तेह दे [सुरह आले इमरान 3:147]ربَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَِ
[آل عمران :147]
13

Rabbana ma khalaqta hadha batila Subhanaka faqina ‘adhaban-Naar

अल्लाहवन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा [सुरह आले इमरान 3:191]رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَذا بَاطِلاً سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
[آل عمران :191]
14

Rabbana innaka man tudkhilin nara faqad akhzaytah wa ma liDh-dhalimeena min ansar

ऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं [सुरह आले इमरान 3:192]رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
[آل عمران :192]
15

Rabbana innana sami’na munadiyany-yunadi lil-imani an aminu bi Rabbikum fa’aamanna

ऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए [सुरह आले इमरान 3:193]رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلإِيمَانِ أَنْ آمِنُواْ بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا
[آل عمران :193]
16

Rabbana faghfir lana dhunoobana wa kaffir ‘ana sayyi’aatina wa tawaffana ma’al Abrar

पस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले [सुरह आले इमरान 3:193]رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الأبْرَارِ
[آل عمران :193]
17

Rabbana wa ‘atina ma wa’adtana ‘ala rusulika wa la tukhzina yawmal-Qiyamah innaka la tukhliful mi’aad

ऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं [सुरह आले इमरान 3:194]رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَى رُسُلِكَ وَلاَ تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّكَ لاَ تُخْلِفُ الْمِيعَاد
[آل عمران :194]
18

Rabbana aamana faktubna ma’ ash-shahideen

ऐ मेरे पालने वाले हम तो ईमान ला चुके तो (रसूल की) तसदीक़ करने वालों के साथ हमें भी लिख रख [सुरह अल माइदा 5:83]رَبَّنَا آمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
[المائدة :83]
19

Rabbana anzil ‘alayna ma’idatam minas-Samai tuknu lana ‘idal li-awwa-lina wa aakhirna wa ayatam-minka war-zuqna wa anta Khayrul-Raziqeen

अल्लाह वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है [सुरह अल माइदा 5:114]رَبَّنَا أَنزِلْ عَلَيْنَا مَآئِدَةً مِّنَ السَّمَاء تَكُونُ لَنَا عِيداً لِّأَوَّلِنَا وَآخِرِنَا وَآيَةً مِّنكَ وَارْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
[المائدة :114]
20

Rabbana zalamna anfusina wa il lam taghfir lana wa tarhamna lana kunan minal-khasireen

ऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें [सुरह अल-आराफ़ 7:23]رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
[الأعراف :23]
21

Rabbana la taj’alna ma’al qawwmi-dhalimeen

ऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना [सुरह अल-आराफ़ 7:47]رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
[الأعراف :47]
22

Rabbanaf-tah baynana wa bayna qawmina bil haqqi wa anta Khayrul Fatiheen

ऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है [सुरह अल-आराफ़ 7:89]رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ
[الأعراف :89]
23

Rabbana afrigh ‘alayna sabraw wa tawaffana Muslimeen

ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा) और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले [सुरह अल-आराफ़ 7:126]رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
[الأعراف :126]
24

Rabbana la taj’alna fitnatal lil-qawmidh-Dhalimeen wa najjina bi-Rahmatika minal qawmil kafireen

ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना और अपनी रहमत से हमें इन काफ़िर लोगों (के नीचे) से नजात दे [10:85-86]رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ; وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
[يونس :85-86]
25

Rabbana innaka ta’lamu ma nukhfi wa ma nu’lin wa ma yakhfa ‘alal-lahi min shay’in fil-ardi wa la fis-Sama’

ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ हम छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तू (सबसे) खूब वाक़िफ है और अल्लाह से तो कोई चीज़ छिपी नहीं (न) ज़मीन में और न आसमान में [सुरह इब्राहीम 14:38]رَبَّنَا إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِي وَمَا نُعْلِنُ وَمَا يَخْفَى عَلَى اللّهِ مِن شَيْءٍ فَي الأَرْضِ وَلاَ فِي السَّمَاء
[إبرهيم :38]
26

Rabbana wa taqabbal Du’a

ऐ मेरे पालने वाले मेरी दुआ क़ुबूल फरमा [सुरह इब्राहीम 10:40]رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاء
[إبرهيم :40]
27

Rabbana ghfir li wa li wallidayya wa lil Mu’mineena yawma yaqumul hisaab

ऐ हमारे पालने वाले जिस दिन (आमाल का) हिसाब होने लगे मुझको और मेरे माँ बाप को और सारे ईमानदारों को तू बख्श दे [सुरह इब्राहीम 10:41]رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ
[إبرهيم :41]
28.

Rabbana ‘atina mil-ladunka Rahmataw wa hayyi lana min amrina rashada

ऐ हमारे परवरदिगार हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर [सुरह अल-कहफ़ 18:10]رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
[الكهف :10]
29

Rabbana innana nakhafu any-yafruta ‘alayna aw any-yatgha

ऐ हमारे पालने वाले हम डरते हैं कि कहीं वह हम पर ज्यादती (न) कर बैठे या ज्यादा सरकशी कर ले [सुरह ताःहाः 20:45]رَبَّنَا إِنَّنَا نَخَافُ أَن يَفْرُطَ عَلَيْنَا أَوْ أَن يَطْغَى
[طه :45]
30

Rabbana amanna faghfir lana warhamna wa anta khayrur Rahimiin

ऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है [सुरह अल-मोमिनून 23:109]رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
[المؤمنون :109]
31

Rabbanas-rif ‘anna ‘adhaba jahannama inna ‘adhabaha kana gharama innaha sa’at musta-qarranw wa muqama

परवरदिगारा हम से जहन्नुम का अज़ाब फेरे रहना क्योंकि उसका अज़ाब बहुत (सख्त और पाएदार होगा) बेशक वह बहुत बुरा ठिकाना और बुरा मक़ाम है [सुरह अल-फुर्क़ान:65-66]رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا إِنَّهَا سَاءتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا
[الفرقان :65-66]
32

Rabbana Hablana min azwaajina wadhurriy-yatina, qurrata ‘ayioni wa-jalna lil-muttaqeena Imaama

परवरदिगार हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना [सुरह अल-फुर्क़ान 25:74]رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
[الفرقان :74]
33

Rabbana la Ghafurun shakur

बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है [सुरह फ़ातिर 35:34]رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ
[فاطر :34]
34

Rabbana wasi’ta kulla sha’ir Rahmatanw wa ‘ilman faghfir lilladhina tabu wattaba’u sabilaka waqihim ‘adhabal-Jahiim

परवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैं, तो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले [सुरह अल-मोमिन 40:7]آمَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
[غافر :7]
35

Rabbana wa adhkhilhum Jannati ‘adninil-lati wa’attahum wa man salaha min aba’ihim wa azwajihim wa dhuriyyatihim innaka antal ‘Azizul-Hakim, waqihimus sayyi’at wa man taqis-sayyi’ati yawma’idhin faqad rahimatahu wa dhalika huwal fawzul-‘Adheem

ऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है.
और उनको हर किस्म की बुराइयों से महफूज़ रख और जिसको तूने उस दिन ( कयामत ) के अज़ाबों से बचा लिया उस पर तूने बड़ा रहम किया और यही तो बड़ी कामयाबी है [सुरह अल-मोमिन 40:8-9]
رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُم وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ وَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُ وَذَلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
[غافر :8-9]
36

Rabbana-ghfir lana wa li ‘ikhwani nalladhina sabaquna bil imani wa la taj’al fi qulubina ghillal-lilladhina amanu

परवरदिगारा हमारी और उन लोगों की जो हमसे पहले ईमान ला चुके मग़फेरत कर और मोमिनों की तरफ से हमारे दिलों में किसी तरह का कीना न आने दे [सुरह अल-हश्र:10]رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا
[الحشر :10]
37

Rabbana innaka Ra’ufur Rahim

परवरदिगार बेशक तू बड़ा शफीक़ निहायत रहम वाला है [सुरह अल-हश्र 59:10]رَبَّنَا إِنَّكَ رَؤُوفٌ رَّحِيمٌ
[الحشر :10]
38

Rabbana ‘alayka tawakkalna wa-ilayka anabna wa-ilaykal masir

ऐ हमारे पालने वाले, हमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं [सुरह अल-मुम्तहीना 60:4]رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ
[الممتحنة :4]
39

Rabbana la taj’alna fitnatal lilladhina kafaru waghfir lana Rabbana innaka antal ‘Azizul-Hakim

ऐ हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है [सुरह अल-मुम्तहीना 60:5]رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
[الممتحنة :5]
40

Rabbana atmim lana nurana waighfir lana innaka ‘ala kulli shay-in qadir

ऐ परवरदिगार हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर है [सुरह अत-तहरीम 66:8]رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا إِنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
[التحريم :8]
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