Browsing

अहेम अमल की फजीलत

तमाम अहेम अमल की फजीलत के बारे में तफ्सील में जानकारी कुरान और हदीस की रौशनी में

सलाम करने पर नेकियाँ

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"जिस ने अस्सलामु अलैकुम कहा, उस के लिये दस नेकियाँ लिखी जाती हैं और जिस ने अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह कहा, उस के लिये बीस नेकियाँ लिखी जाती है, और जिसने अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाह व बरकातुह कहा, उस के लिये…
Read More...

अच्छे और बुरे अख़्लाक़ की मिसाल

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया :"अच्छे अख्लाक बुराइयों को इस तरह खत्म कर देते हैं जिस तरह पानी बरफ को पिघला देता है और बुरे अख्लाक अच्छे कामों को इस तरह खत्म कर देते हैं जिस तरह सरका शहद को खराब कर देता है।"
Read More...

शर्म व हया ईमान का जुज़ है

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"ईमान के साठ से ऊपर या सत्तर से कुछ जायद शोअबे हैं। सब से अफज़ल (ला इलाहा इलल्लाहु) पढ़ना है और सब से कम दर्जा रास्ते से तकलीफ़ देह चीज़ का हटा देना है और शर्म व हया ईमान का हिस्सा है।"
Read More...

पसंद के मुताबिक हदिया देना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"जो आदमी अपने मुसलमान भाई से किसी ऐसी चीज़ के साथ मुलाकात करे जिस से वह खुश होता हो, तो अल्लाह तआला उस को कयामत के दिन खुश कर देगा।वजाहत: हदीस से मालूम हुआ के किसी दीनी भाई के यहाँ जाते वक़्त उस की पसंद के…
Read More...

लोगों की जरूरतें पूरी करने वालो की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"अल्लाह तआला ने कुछ बन्दों को लोगों की जरूरत पूरी करने के लिये पैदा किया है, लोग उन के पास अपनी ज़रूरत ले कर जाते हैं, लोगों की जरूरत पूरी करने वाले यह लोग अल्लाह के अज़ाब से महफूज रहेंगे।”
Read More...

दीनी भाई की जियारत की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"जिस ने किसी मरीज़ की इयादत की, या किसी दीनी भाई की जियारत की, तो एक पुकारने वाला (फरिश्ता) कहता है। तुम (दुनिया में) अच्छे रहो, तुम्हारा (अच्छे कामों की तरफ) चलना मुबारक हो और तुम ने (अपने इस अमल के जरिये)…
Read More...

औरत के लिये चंद आमाल

रसुलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"जब औरत पाँच वक्त की नमाज पढती रहे और अपनी इज्जत की हिफाजत करती रहे और अपने शौहर की फरमा बरदारी करती रहे तो वह जन्नत के जिस दरवाजे से चाहे, दाखिल हो जाए।"
Read More...

इंसाफ करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :"थोड़ी देर का इन्साफ साठ साल की शब बेदारी और रोजा रखने की इबादत से बेहतर है। ऐ अबू हुरैरा ! किसी मामले में थोड़ी सी देर का जुल्म, अल्लाह के नजदीक साठ साल की नाफ़रमानी से जियादा सख्त और बड़ा गुनाह है।"
Read More...

आफत व बला दूर होने की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:“जो शख्स (माशाअल्लाह ला हौल वाला क़ूवता इल्लाह बिल्लाह ) पढ़ लिया करे, तो सिवाए मौत के अपने अहल व अयाल और माल में कोई आफत नहीं देखेगा।”
Read More...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More