अपने घरवालों पर खर्च करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“एक वह दीनार जिसे तुमने अल्लाह के रास्ते में खर्च किया
और एक वह दीनार जिसे तुमने किसी गुलाम के आज़ाद करने में खर्च किया
और एक वह दीनार जो तुमने किसी ग़रीब को सदका किया
और एक वह दीनार जो तुम ने अपने घर वालों पर खर्च किया

तो इन में से उस दीनार का अज्र व सवाव सबसे ज़ियादा है,
जो तुमने अपने अहल व अयाल पर खर्च किया।”

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