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उम्मत की इस्लाह

नज़र का फ़ित्ना – अपनी नज़रे नीची रखे और अपनी शर्मगाहो की हिफ़ाज़त करें

नज़र एक ऐसा फ़ित्ना हैं जिस पर कोई रोक नही जब तक कोई इन्सान खुद अपनी नज़र को बुराई से न फ़ेर ले। अमूमन नज़र के फ़ित्ने से आज का इन्सान महफ़ूज़ नही क्योकि टीवी, अखबार, मिडिया के ज़रीये जिस तरह इन्सान के जज़्बात को जिस तरह भड़काने का मौका दिया जा रहा…
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भूत, प्रेत, बदरूह की हकीकत

क्या इन्सान वाकय में मरने के बाद भुत बन जाता है? अगर नहीं तो भुत प्रेत क्या है? ये इंसानों को क्यों…

भूत, प्रेत, बदरूह: ये नाम अकसर इन्सानी ज़हन मे आते ही एक डरावनी और खबायिसी शख्सियत ज़ेहन मे आती हैं क्योकि मौजूदा मिडिया ने इन्सान को इस कदर गुमराह कर रखा हैं के जो नही हैं उसको इतनी खूबसूरती के साथ ये मिडिया वाले पेश करते हैं के इन्सान जिसकी…
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