25. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). हुजूर (ﷺ) की हिजरत, (2). गिजा और साँस की नालियाँ, (3). सूद से बचना, (4). इशा के बाद जल्दी सोना, (5). जमात के लिये मस्जिद जाना, (6). इजार या पैन्ट टखने से नीचे पहनना, (7). दुनिया से बेरग़वती का इनाम, (8). जन्नतियों का लिबास, (9). दाढ़ के दर्द का इलाज, (10). अमानत वालों को अमानतें वापस कर दिया करो।

Sirf Paanch Minute ka Madrasa in Hindi

Sirf 5 Minute Ka Madarsa (Hindi Book)

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1. इस्लामी तारीख

हुजूर (ﷺ) की हिजरत

रसूलअल्लाह (ﷺ) को जब अल्लाह ताला के हुक्म से हिजरत की इजाजत मिली, तो उसकी इत्तेला हजरत अबू बक्र सिद्दीक (र.अ) को दे दी, और जब हिजरत का वक्त आया, तो रात के वक्त घर से निकले और काबा पर अलविदाई नज़र डालकर फ़र्माया : तू मुझे तमाम दुनिया से ज़ियादा महबूब है। अगर मेरी क़ौम यहाँ से न निकालती तो मै तेरे सिवा किसी और जगह को रहने के लिये इख्तियार न करता।

हजरत असमा बिन्ते अबू बक्र (र.अ) ने दो तीन रोज़ के खाने पीने का सामान तय्यार किया। आप (ﷺ) हज़रत अबू बक्र (र.अ) के साथ मक्का से रवाना हुए। एक तरफ महबूब वतन छोड़ने का गम था और दूसरी तरफ नुकीले पत्थरों के दुश्वार गुजार रास्ते और हर तरफ से दुश्मनों का खौफ था। मगर इस्लाम की खातिर इमामुल अम्बिया तमाम मुसीबतों को झेलते हुए आगे बढ़ रहे थे।

रास्ते में हज़रत अबू बक्र (र.अ) कभी आगे आगे चलते और कभी पीछे पीछे चलने लगते थे। हुजूर (ﷺ) ने इस की वजह पूछी, तो उन्होंने फ़रमाया : या रसूलल्लाह (ﷺ) जब मुझे पीछे से किसी के आने का खयाल होता है, तो मैं आप के पीछे चलने लगता हूँ और जब आगे किसी के घात में रहने का खतरा होता है, तो आगे चलने लगता हूँ। चूँकि कुफ्फार की मुखालफत का जोर था और वह लोग (नऊजु बिल्लाह) आप (ﷺ) के कत्ल की कोशिश में थे। इस लिये रास्ते में आप (ﷺ) और हज़रत अबू बक्र (र.अ) ने “गारे सौर” में पनाह ली, उस गार में पहले हजरत अबू बक्र (र.अ) दाखिल हुए और उसको साफ किया, फिर हुजूर (ﷺ) उस में दाखिल हुए और तीन रोज तक उसी ग़ार में रहे।

To be Continued…

📕 इस्लामी तारीख


2. अल्लाह की कुदरत

गिजा और साँस की नालियाँ

अल्लाह तआला ने हमारे साँस लेने और खाने पीने की दो मुख्तलिफ नालियाँ बनाई हैं। खाने की नाली का ताल्लुक मेदे से है और साँस की नाली का ताल्लुक फेफड़े से है। जब इन्सान खाता है या पीता है, तो कुदरती तौर पर साँस की नाली का मुँह ढक्कन की तरह परदे से बंद हो जाता है और खाने की नाली के जरिये खाना मेदे में पहुँच जाता है। यही खाना अगर हवा की नाली में दाखिल होकर फेफड़ों में पहुँच जाता, तो इंसान का जिंदा रहना मुश्किल हो जाता।

मगर अल्लाह तआला की कुदरत पर कुर्बान जाइये के दोनों नालियों के करीब होने के बावजूद साँस लेने और खाने पीने का हैरान कुन इंतजाम फ़र्मा दिया है।

📕 अल्लाह की कुदरत


3. एक फर्ज के बारे में

सूद से बचना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“ऐ ईमान वालो! तुम कई गुना बढ़ा कर सूद मत खाया करो (क्योंकि सूद लेना मुतलकन हराम है) और अल्लाह तआला से डरते रहो ताके तुम कामयाब हो जाओ।”

नोट: कम या जियादा सुद लेना देना, खाना, खिलाना नाजाइज और हराम है, कुरआन और हदीस में इस पर बडी सख्त सजा आई है, लिहाजा हर मुसलमान पर सुदी लेन देन से बचना जरूरी है।’

📕 सूरह आले इमरान: १३०


4. एक सुन्नत के बारे में

इशा के बाद जल्दी सोने की सुन्नत

रसूलुल्लाह (ﷺ) इशा से पहले नहीं सोते थे और इशा के बाद नहीं जागते थे (बल्के सो जाते थे)

📕 मुस्नदे अहमद : २५७४८


5. एक अहेम अमल की फजीलत

जमात के लिये मस्जिद जाने की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

“जो शख्स बाजमात नमाज के लिये मस्जिद में जाए तो आते जाते हर कदम पर एक गुनाह मिटता है (हर कदम पर) और उसके लिये एक नेकी लिखी जाती है।”

📕 मुस्नदे अहमद : ६५६३


6. एक गुनाह के बारे में

इजार या पैन्ट टखने से नीचे पहनने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“जो शख्स तकब्बुर के तौर पर अपने इज़ार को टखने से नीचे लटकाएगा, अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसकी तरफ रहमत की नजर से नहीं देखेगा।”

📕 बुखारी: ५७८८


7. दुनिया के बारे में

दुनिया से बेरग़वती का इनाम

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:

“जो शख्स जन्नत का ख्वाहिश मन्द होगा वह भलाई में जल्दी करेगा। और जो शख्स जहन्नम से खौफ करेगा, वह ख्वाहिशात से गाफिल (बेपरवाह) हो जाएगा और जो मौत का इंतज़ार करेगा उसपर लज्जतें बेकार हो जाएगी और जो शख्स दुनिया में जुद (दुनिया से बेरगबती) इख्तियार करेगा, उस पर मुसीबतें आसान हो जाएँगी।”

📕 शोअबुल ईमान: १०२१९


8. आख़िरत के बारे में

जन्नतियों का लिबास

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“उन जन्नतियों के बदन पर बारीक और मोटे रेशम के कपड़े होंगे और उनको चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका रब उनको पाकीज़ा शराब पिलाएगा। (अहले जन्नत से कहा जाएगा के) यह सब नेअमतें तुम्हारे आमाल का बदला हैं और तुम्हारी दुनियावी कोशिश कबूल हो गई।”

📕 सूरह दहर : २१ ता २२


9. तिब्बे नबवी से इलाज

दाढ़ के दर्द का इलाज

एक मर्तबा हजरत अब्दुल्लाह बिन रवाहा (र.अ) ने हुजूर (ﷺ) से दाढ में शदीद दर्द की शिकायत की, तो आप (ﷺ) ने उन्हें करीब बुला कर दर्द की जगह अपना मुबारक हाथ रखा और सात मर्तबा यह दुआ फ़रमाई :

चुनान्चे फ़ौरन आराम हो गया।

📕 दलाइलुन्नबह लिल बैहकी: २४३१


10. क़ुरान की नसीहत

अमानत वालों को अमानतें वापस कर दिया करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“अल्लाह तआला तुमको हुक्म देता है के अमानत वालों को उनकी अमानतें वापस कर दिया करो।”

📕 सूर: निसा: ५८


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