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दुनिया के बारे में

दुनिया की हकीकत वा आजमाइश और दुनियावी फितना वा फसाद के बारे में क़ुरानों सुन्नत की रहनुमाई।

दुनिया की जाहिरी हालत धोका है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :"यह लोग सिर्फ दुनियावी ज़िंदगी की ज़ाहिरी हालत को जानते हैं और यह आख़िरत से बिल्कुल ग़ाफिल हैं।" (यानी इन्सान सिर्फ दुनिया की चीजों को जानते और उसी को हासिल करने की फिक्र में लगे रहते हैं, उन्हें पता ही…
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सब से बड़ा तक़वे वाला कौन है

एक शख्स ने रसूलल्लाह (ﷺ) की खिदमत में आकर अर्ज़ किया: "ऐ अल्लाह के रसूल लोगों में सब से बड़ा जाहिद कौन है ?"रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : "वह आदमी जो कब्र और उस की बोसीदगी को न भूले और दुनिया की जरूरत से ज़ियादा जेब व जीनत को छोड़ दे, बाकी…
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दुनिया से बेहतर आख़िरत का घर है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :"दुनिया की जिन्दगी सिवाए खेल कूद के कुछ भी नहीं और आखिरत का घर मुत्तकियों (यानी अल्लाह तआला से डरने वालों) के लिये बेहतर है।"
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पेट से ज्यादा बुरा कोई बर्तन नहीं

“आदमी (इंसान) ने पेट से ज्यादा बुरा कोई बर्तन नहीं भरा। इब्ने आदम को चंद लुक्मे काफी है जो उसकी पीठ को सीधा रखे। लेकिन अगर ज्यादा खाना ज़रूरी हो तो तिहाई पेट खाने के लिए, तिहाई पानी के लिए और तिहाई साँस के लिए रखे।”
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दुनिया का सामान चंद रोज़ा हैं

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :"दुनिया का सामान कुछ ही दिन रहने वाला है और उस शख्स के लिये आखिरत हर तरह से बेहतर है, जो अल्लाह तआला से डरता हो और (कयामत) में तुम पर ज़र्रा बराबर भी जुल्म न किया जाएगा।"
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दुनिया मोमिन के लिये कैदख़ाना है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:"दुनिया मोमिन के लिये कैदखाना है और काफिर के लिये जन्नत है।"वजाहत: शरीअत के अहकाम पर अमल करना, नफसानी ख्वाहिशों को छोड़ना, अल्लाह और उसके रसूल के हुक्मों पर चलना नफ्स के लिये कैद है और काफिर अपने नफ्स की…
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दो चीज़ों की ख्वाहिश

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :"बूढ़े आदमी का दिल दो चीजों के बारे में हमेशा जवान रहता है, एक दुनिया की मुहब्बत और दूसरी लम्बी लम्बी उम्मीदें।"
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गुनहगारों को नेअमत देने का मक्सद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :“जब तू यह देखे के अल्लाह तआला किसी गुनहगार को उस के गुनाहों के बावजूद दुनिया की चीजें दे रहा है तो यह अल्लाह तआला की तरफ से ढील है।”
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हलाक करने वाली चीजें

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:"हर ऐसे शख्स के लिये बड़ी ख़राबी है, जो ऐब लगाने वाला और ताना देने वाला हो, जो माल जमा करता हो और उस को गिन गिन कर रखता हो और ख़याल करता हो के उस का (यह) माल हमेशा उस के पास रहेगा। हरगिज़ ऐसा नहीं है,…
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दो आदतें

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :"जो शख्स दीनी मामले में अपने से बुलन्द शख्स को देख कर उस की पैरवी करे और दुनियावी मामले में अपने से कमतर को देख कर अल्लाह तआला की अता करदा फजीलत पर उस की तारीफ करे, तो अल्लाह तआला उस को (इन दो आदतों की वजह से)…
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माल की मुहब्बत खुदा की नाशुक्री का सबब है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:“इन्सान अपने रब का बड़ा ही नाशुक्रा है, हालाँ के उसको भी इस की खबर है (और वह ऐसा मामला इस लिये करता है) के उस को माल की मुहब्बत ज़ियादा है।"
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आदमी का दुनिया में कितना हक़ है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:“इब्ने आदम को दुनिया में सिर्फ चार चीजों के अलावा और किसी की जरूरत नहीं : (१) घर : जिस में वह रेहता है, (२) कपड़ा : जिस से वह सतर छुपाता है। (३) खुश्क रोटी। (४) पानी।“
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मौत और माल की कमी से घबराना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:"आदमी दो चीजों को नापसंद करता है (हालांकि दोनों उस के लिये बेहतर हैं) एक मौत को, हालाँ के मौत फितनों से बचाव है, दूसरे माल की कमी को, हालांकि जितना माल कम होगा उतना ही हिसाब कम होगा।"
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