30. रबी उल आखिर

30. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). मदीना में हुजूर (ﷺ) का इस्तिकबाल, (2). किला फतह होना, (3). वालिदैन के साथ एहसान का मामला करो, (4). घरवालों पर सवाब की नियत से खर्च करना भी सदक़ा है, (5). कुरआन का मजाक उड़ाना, (6). माल की मुहब्बत खुदा की नाशुक्री का सबब है, (7). हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा, (8). तलबीना से इलाज, (9). औरतो से उनकी दिनदारी की वजह से निकाह करो …

22. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

22. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). दूसरी बैते अक़बा, (2). हज़रत जाबिर (र.अ) के बाग़ की खजूरो में बरकत, (3). दीन-ऐ-इस्लाम में नमाज़ की अहमियत, (4). जन्नत हासिल करने के लिये दुआ करना, (5). हलाल कमाई से मस्जिद बनाना, (6). अच्छे और बुरे बराबर नहीं हो सकते, (7). दुनिया आरजी और आखिरत मुस्तकिल है, (8). हमेशा की जन्नत व जहन्नम, (9). खजूर से इलाज, (10). दीनदार औरत से निकाह करो।

30. Safar | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

30. सफर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

हज़रत उज़ैर (अ.स), सज्दा-ए-सहव करना, मोमिन के हक़ में दुआ, बरकत वाला निकाह, रसूलुल्लाह (ﷺ) के हुक्म को ना मानने का गुनाह,जनाज़े को दफ़नाने में देर ना करो …