23. ज़िल कदा | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा
5 Minute ka Madarsa in Hindi


अल्लाह की कुदरत

शहद का कारखाना

अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत से इन्सानों की खिदमत के लिए एक छोटी सी मखलूक शहद की मक्खी बनाई, जो फूलों से रस जमा कर के छत्तों में महफूज़ कर देती है। अल्लाह तआला ने इस छोटी सी मक्खी को कैसा हुनर दे रखा है के वह अपने रहने के लिए जो छत्ता बनाती है, उस में छोटे छोटे खाने होते हैं और हर खाने में छे कोने होते हैं, जो सारे के सारे एक ही साइज़ के होते हैं और वह फलों के रस ला कर उन्हीं खानों में जमा करती है। ज़रा गौर कीजिए के अल्लाह तआला ने हमारे लिए खालिस शहद पैदा करने के लिए कितना अच्छा इन्तेज़ाम किया है, यकीनन वह बड़ी कुदरत वाला है।


एक फर्ज के बारे में:

गुस्ल के लिए तयम्मुम करना

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है:

“अगर तुम बीमार हो जाओ या सफ़र में होया तुममें से कोई शख्स अपनी तबई जरुरत (यानी पेशाब पाखाना कर के) आया हो या अपनी बीवी से मिला हो और तुम पानी (के इस्तेमाल पर) ताकत न रखते हो, तो ऐसी हालत में तुम पाक मिट्टी का इरादा करो (यानी तयम्मुम कर लो)”

[सूरह माइदा : ६]

फायदा : अगर किसी पर गुस्ल करना फ़र्ज़ हो जाए और पानी इस्तेमाल करने की ताकत न रखे, तो ऐसी सुरत में गुस्ल के लिए तयम्मुम कर के नमाज पढ़ना फ़र्ज़ है और तयम्मुम का तरीका यह है के दोनो हाथों को जमीन पर मार कर चेहरे पर मसह कर लें फिर जमीन पर मारें और दोनों हाथों पर कोहनियों समेत मसह कर लें।


एक अहेम अमल की फजीलत:

एक दिन के नफ़ली रोजे का सवाब

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“अगर कोई शख्स अल्लाह के वास्ते एक दिन का नफ़ली रोजा रखे और
उसके बदले में उस को सारी जमीन भरकर सोना (रोजाना) दिया जाए,
तो कयामत के दिन तक भी इस रोजे के सवाब का बदला अदा नहीं हो सकता।”

[कंजुल उम्माल:४१५१, अन अनस (र.अ)]


एक गुनाह के बारे में:

इमाम से पहले सर उठाना

रसूलल्लाह ﷺ ने फ़र्माया:

“क्या वह शख्स जो इमाम से पहले अपने सर को उठाता है, इस बात से नहीं डरता,
के अल्लाह तआला उसके सर को गधे का सर बना देगा या उस की शक्ल गधे जैसी बना देगा।”

[ बुखारी: ६१५, अन अबी हुरैरह (र.अ) ]


दुनिया के बारे में :

दुनिया का तज़किरा न करो

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया:

“अपने दिलों को दुनिया की याद में मशगूल न करो।”

[ कंजुल उम्माल : ६१५० ]


आख़िरत के बारे में:

कयामत के दिन का अंदाज़

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“जिस दिन तमाम जानदार और फ़रिश्ते सफ़ बांधकर खड़े होंगे उस रोज कोई कलाम न कर सकेगा, अल्बत्ता जिस को खुदाए रहमान (यानी अल्लाह तआला बात करने की इजाजत देदे और वह बात भी ठीक ही कहेगा उस दिन का आना यकीनी है, जो शख्स चाहे अपने रब के पास ठिकाना बना ले।”

[ सूरह नबाः ३८ ता ३९ ]


तिब्बे नबवी से इलाज:

जोड़ों के दर्द का इलाज

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया :

“अंजीर खाओ (फिर उस की अहमियत बताते हुए इर्शाद फर्माया) अगर मैं कहता के जन्नत से कोई फल उतरा है तो यही है, क्यों कि जन्नत के फलों में गुठली नहीं है।” (और अंजीर का यही हाल है) लिहाजा इसे खाओ, इस लिए के यह बवासिर को खत्म करता है और जोड़ो के दर्द में मुफीद है।”

[ कंजुल उम्माल: २८२७६ ]


कुरआन की नसीहत

मुझसे दुआ करो मैं कबूल करूँगा

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“तुम्हारे रब ने फ़र्माया है के मुझ से दुआ मांगो मैं तुम्हारी दुआ कबूल करूंगा,
बिलाशुबा जो लोग मेरी इबादत करने से तकब्बुर करते हैं,
वह अनकरीब जलील हो कर जहन्नम में दाखिल होंगे।

[ सूरह मोमिन: ६० ]

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