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इस्लामी विरोधी डच राजनेता अनार्ड वॉन डूर्न ने अपनाया इस्लाम ….

∗ इस्लामी विरोधी डच राजनेता अनार्ड वॉन डूर्न ने अपनाया इस्लाम ….
Journey of Faith - Dutch Islamophobe Arnoud Van Doorn revert to Islamक्या ये संभव है कि जीवन भर आप जिस विचारधारा का विरोध करते आए हों एक मोड़ पर आकर आप उसके अनुनायी बन जाएं. कुछ ऐसा ही हुआ है नीदरलैंड में.लंबे समय तक इस्लाम की आलोचना करने वाले डच राजनेता अनार्ड वॉन डूर्न ने अब इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है.: @[156344474474186:]

अनार्ड वॉन डूर्न नीदरलैंड की घोर दक्षिणपंथी पार्टी पीवीवी यानि फ्रीडम पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्य रह चुके हैं. यह वही पार्टी है जो अपने इस्लाम विरोधी सोच और इसके कुख्यात नेता गिर्टी वाइल्डर्स के लिए जानी जाती रही है.
मगर वो पांच साल पहले की बात थी. इसी साल यानी कि 2013 के मार्च में अर्नाड डूर्न ने इस्लाम धर्म क़बूल करने की घोषणा की.
नीदरलैंड के सांसद गिर्टी वाइल्डर्स ने 2008 में एक इस्लाम विरोधी फ़िल्म ‘फ़ितना’ बनाई थी. इसके विरोध में पूरे विश्व में तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं थीं.
“मैं पश्चिमी यूरोप और नीदरलैंड के और लोगों की तरह ही इस्लाम विरोधी सोच रखता था. जैसे कि मैं ये सोचता था कि इस्लाम बेहद असहिष्णु है, महिलाओं के साथ ज्यादती करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है. पूरी दुनिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ इस तरह के पूर्वाग्रह प्रचलित हैं.”
अनार्ड डूर्न जब पीवीवी में शामिल हुए तब पीवीवी एकदम नई पार्टी थी. मुख्यधारा से अलग-थलग थी. इसे खड़ा करना एक चुनौती थी. इस दल की अपार संभावनाओं को देखते हुए अनार्ड ने इसमें शामिल होने का फ़ैसला लिया.

» पहले इस्लाम विरोधी थे अनार्ड :
पार्टी के मुसलमानों से जुड़े विवादास्पद विचारों के बारे में जाने जाते थे. तब वे भी इस्लाम विरोधी थे.
वे कहते हैं, “उस समय पश्चिमी यूरोप और नीदरलैंड के बहुत सारे लोगों की तरह ही मेरी सोच भी इस्लाम विरोधी थी. जैसे कि मैं ये सोचता था कि इस्लाम बेहद असहिष्णु है, महिलाओं के साथ ज्यादती करता है, आतंकवाद को बढ़ावा देता है. पूरी दुनिया में इस्लाम के ख़िलाफ़ इस तरह के पूर्वाग्रह प्रचलित हैं.”
अनार्ड वॉन ने लंबे समय तक इस्लाम का विरोध करने के बाद अब इस्लाम धर्म क़बूल कर लिया है.साल 2008 में जो इस्लाम विरोधी फ़िल्म ‘फ़ितना’ बनी थी तब अनार्ड ने उसके प्रचार प्रसार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था. इस फ़िल्म से मुसलमानों की भावनाओं को काफ़ी ठेस पहुंची थी. वे बताते हैं, “‘फ़ितना’ पीवीवी ने बनाई थी. मैं तब पीवीवी का सदस्य था. मगर मैं ‘फ़ितना’ के निर्माण में कहीं से शामिल नहीं था. हां, इसके वितरण और प्रोमोशन का हिस्सा ज़रूर था.” अनार्ड को कहीं से भी इस बात का अंदेशा नहीं हुआ कि ये फ़िल्म लोगों में किसी तरह की नाराज़गी, आक्रोश या तकलीफ़ पैदा करने वाली है. वे आगे कहते हैं, “अब महसूस होता है कि अनुभव और जानकारी की कमी के कारण मेरे विचार ऐसे थे. आज इसके लिए मैं वाक़ई शर्मिंदा हूं.”

» सोच कैसे बदली ?
अनार्ड ने बताया, “जब फ़िल्म ‘फ़ितना’ बाज़ार में आई तो इसके ख़िलाफ़ बेहद नकारात्मक प्रतिक्रिया हुई. आज मुझे बेहद अफ़सोस हो रहा है कि मैं उस फ़िल्म की मार्केटिंग में शामिल था.”
नीदरलैंड के सांसद गिर्टी वाइल्डर्स ने 2008 में इस्लाम की आलोचना करने वाली एक फ़िल्म बनाई थी.

» इस्लाम के बारे में अनार्ड के विचार आख़िर कैसे बदलने शुरू हुए ?
वे बताते हैं, “ये सब बेहद आहिस्ता-आहिस्ता हुआ. पीवीवी यानि फ़्रीडम पार्टी में रहते हुए आख़िरी कुछ महीनों में मेरे भीतर कुछ शंकाएं उभरने लगी थीं. पीवीवी के विचार इस्लाम के बारे में काफ़ी कट्टर थें, जो भी बातें वे कहते थे वे क़ुरान या किसी किताब से ली गई होती थीं.” इसके बाद दो साल पहले अनार्ड ने पार्टी में अपनी इन आशंकाओं पर सबसे बात भी करनी चाही. पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. तब उन्होंने क़ुरान पढ़ना शुरू किया. यही नहीं, मुसलमानों की परंपरा और संस्कृति के बारे में भी जानकारियां जुटाने लगें.

» मस्जिद पहुंचे :
अनार्ड वॉन डूर्न इस्लाम विरोध से इस्लाम क़बूल करने तक के सफ़र के बारे में कहते हैं, “मैं अपने एक सहयोगी से इस्लाम और क़ुरान के बारे में हमेशा पूछा करता था. वे बहुत कुछ जानते थे, मगर सब कुछ नहीं. इसलिए उन्होंने मुझे मस्जिद जाकर ईमाम से बात करने की सलाह दी.” उन्होंने बताया, “पीवीवी पार्टी की पृष्ठभूमि से होने के कारण मैं वहां जाने से डर रहा था. फिर भी गया. हम वहां आधा घंटे के लिए गए थे, मगर चार-पांच घंटे बात करते रहे.”
अनार्ड ने इस्लाम के बारे में अपने ज़ेहन में जो तस्वीर खींच रखी थी, मस्जिद जाने और वहां इमाम से बात करने के बाद उन्हें जो पता चला वो उस तस्वीर से अलहदा था. वे जब ईमाम से मिले तो उनके दोस्ताने रवैये से बेहद चकित रह गए. उनका व्यवहार खुला था. यह उनके लिए बेहद अहम पड़ाव साबित हुआ. इस मुलाक़ात ने उन्हें इस्लाम को और जानने के लिए प्रोत्साहित किया. वॉन डूर्न के मस्जिद जाने और इस्लाम के बारे में जानने की बात फ़्रीडम पार्टी के उनके सहयोगियों को पसंद नहीं आई. वे चाहते थे कि वे वही सोचें और जानें जो पार्टी सोचती और बताती है.

» अंततः इस्लाम क़बूल लिया :
फ़्रीडम पार्टी के नेता गीर्ट वाइलडर्स नीदरलैंड में बुर्के पर रोक लगाने की वकालत करते आए हैं. मगर इस्लाम के बारे में जानना एक बात है और इस्लाम धर्म क़बूल कर लेना दूसरी बात. पहले पहले अर्नाड के दिमाग़ में इस्लाम धर्म क़बूल करने की बात नहीं थी. उनका बस एक ही उद्देश्य था, इस्लाम के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना. साथ ही वे ये भी जानना चाहते थे कि जिन पूर्वाग्रहों के बारे में लोग बात करते हैं, वह सही है या यूं ही उड़ाई हुई. इन सबमें उन्हें साल-डेढ़ साल लग गए. अंत में वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इस्लाम की जड़ें दोस्ताना और सूझ बूझ से भरी हैं. इस्लाम के बारे में ख़ूब पढने, बातें करने और जानकारियां मिलने के बाद अंततः उन्होंने अपना धर्म बदल लिया.
अनार्ड के इस्लाम क़बूलने के बाद बेहद मुश्किलों से गुज़रना पड़ा. वे कहते हैं, “मुझपर फ़ैसला बदलने के लिए काफ़ी दबाव डाले गए. अब मुझे ये समझ में आ रहा था कि मेरे देश नीदरलैंड में लोगों के विचार और सूचनाएं कितनी ग़लत हैं.”

» परिवार और दोस्तों को झटका :
अनार्ड अब इस्लाम को दोस्ताना और सूझ बूझ से भरे संबंधों वाला मानते हैं. परिवार वाले और दोस्त मेरे फ़ैसले से अचंभित रह गए. मेरे इस सफ़र के बारे में केवल मां और मंगेतर को पता था. दूसरों को इसकी कोई जानकारी नहीं थे. इसलिए उन्हें अनार्ड के मुसलमान बन जाने से झटका लगा. कुछ लोगों को ये पब्लिसिटी स्टंट लगा, तो कुछ को मज़ाक़.
अनार्ड कहते हैं कि अगर ये पब्लिसिटी स्टंट होता तो दो-तीन महीने में ख़त्म हो गया होता. वे कहते हैं, “मैं बेहद धनी और भौतिकवादी सोच वाले परिवार से हूं. मुझे हमेशा अपने भीतर एक ख़ालीपन महसूस होता था. मुस्लिम युवक के रूप में अब मैं ख़ुद को एक संपूर्ण इंसान महसूस करने लगा हूं. वो ख़ालीपन भर गया है.” (बीबीसी से बातचीत पर आधारित)

हदीस का परिचय ….

∗ हदीस का परिचय ….
Hadees Kya Hai?♥ हदीस का परिचय
पवित्र क़ुरआन के बाद मुसलमानों के पास इस्लाम का दूसरा शास्त्र अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की कथनी और करनी है जिसे हम हदीस और सीरत के नाम से जानते हैं।

♥ हदीस की परिभाषाः
हदीस का शाब्दिक अर्थ है: बात, वाणी और ख़बर। इस्लामी परिभाषा में ‘हदीस’ मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की कथनी, करनी तथा उस कार्य को कहते हैं जो आप से समक्ष किया गया परन्तु आपने उसका इनकार न किया। अर्थात् 40 वर्ष की उम्र में अल्लाह की ओर से सन्देष्टा (नबी, रसूल) नियुक्त किए जाने के समय से देहान्त तक आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने जितनी बातें कहीं, जितनी बातें (more…)

Safar Aur Bimaari Me Roz-Marra Ke Ibadaton Ka Sawaab ….

∗ Safar Aur Bimaari Me Roz-Marra Ke Ibadaton Ka Sawaab ….

» Mehfum-e-Hadees : Ibrahim Abu Isma’il As-Saksaki (Razi Allahu Anhu) Se Rivayat Hai Ki Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya Ki
“Jab Banda Bimaar Hota Hai Ya Safar Karta Hai Toh Uskey Liye Unn Tamam Ibadaton Ka Sawaab Likha Jata Hai Jinhe Sehat Ke Waqt Kiya Karta Tha”.
- (Sahih Bukhari, Vol 4, H#2996 : @[156344474474186:])

Shadi Ki Mubarak Baad Dene Ki Dua ….

∗ Shadi Ki Mubarak Baad Dene Ki Dua ….

» Mehfum-e-Hadees : Abu Hurairah (Razi Allahu Anhu) Se Rivayat Hai Ki,
Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Jab Kisi Ko Shaadi Ki Mubarak Baad Dete Toh Ye Dua Kahte
“Barak’Allahu Laka Wa Barak Alaik Wa Jama’aa Baynakuma Fi Khairin”
Tarjuma : Allah Tumko Barkat De Aur Tum Par Barkat Nazil Kare Aur Tum Dono Ko Bhalayee Ki Taufiq De
- (Sunan Abu Dawud, Vol 2, 363-Sahih : @[156344474474186:])

Namaz Me Padhey Jaane Wale Kuch Aham Surah ….

∗ Namaz Me Padhey Jaane Wale Kuch Aham Surah ….

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!! : @[156344474474186:]
»1. Surah Al-Fatiha : Alhamdulillahi Rabbil ‘Alamiin, Ar Rahmaa Nir Rahim Maaliki Yaumidiin, Iyaaka Na ‘Ubudu Wa Iyaaka Nastaiin Ihdina Siratal Mustaqiim Siraatal Laziina An Amta Alay Him Ghairil Maghdubi Alay Him Wa Lad Daaalliim (Ameen).

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
»2. Surah Kausar : Inna Aa’taina Kal Kausar.Fasalli Li Rab-Bika Wan Har Inna Shani Aka Hu Wal Abtar

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
»3. Surah Falaq : Qul ‘Auzu Bi Rabbil Falaq Min Sharrimaa Khalaq Wa Min Sahrri Ghasiqin Izaa Waqab Wa Min Sahrrinnaffa Sati Fil Uqad Wa Min Sahrri Haasidin Izaa Hasad.

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
»4. Surah Naas : Qul ‘Auzu Birabbin Naas Malikin Naas Ilaahin Naas Min Sharril Was Waasil Khanaas, Allazi Yawas Wisu Fii Suduurin Naas Minal Jinnati Wan Naas.

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
»5. Surah Ikhlas : Qul Hu Wallaahu Ahad Allahu Samad Lam Yalid Walam Yuulad Walam Yakul Lahu Kufu Wan Ahad.

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
»6. Surah Kaafiruun : Qul Yaa Ayuhal Kaafirun Laa ‘Abudu Maa Ta’ Buduun Walaa Antum ‘Aabiduuna Maa ‘Abud Walaa Ana ‘Aabidum Maa ‘A Battuum Walaa Antum ‘Aabiduna Maa ‘Aabud Lakum Diinukum Wa Liya Diin.

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
»7. Surah Qadr : Innaa Anzalnaahu Fiy Laylatil Qadr Wa Maa Adraaka Maa Laylatul Qadr Laylatul Qadri Khayrum Min Alfi Shahr Tanazzalul Malaaikatu War Ruuhu fiyhaa BiIzni Rabbihim Min Kulli Amrin Salaamun Hiya Hattaa Matla’il Fajr.

Waswasao Ka Bayan ….

∗ Waswasao Ka Bayan ….

» Mehfum-e-Hadees : Abu Huraira (Razi Allahu Anhu) Se Riwayat Hai Ke, Huzoor Ke Sahaba Me Se Kuch Hazraat Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Khidmat Me Hazir Huey Aur Aap Se Puchne Lage Ke Hum Apne Dilo Me Aise Khayal (Waswase) Mehsoos Karte Hai Ke Inhe Bayan Karna Bahut Bada Gunaah Maloom Hota Hai,
Aap (Sallallahu Alaihay Wasallam)Farmaya Ke – ‘Kya Tum Ne Ye Baat Payi Hai? ‘
Arz Kiya – ‘Haan !’
Toh Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya – ‘Ye Khula Hua Emaan Hai’.
- (Muslim, Miratul Manaji Jild 1, Safa 87, Waswasao (Burey Khayalaat) Ka Baab : @[156344474474186:])

» Tafseer:
∗1. Ye Sahaba-e-Kiram Ke Kamal-e-Emaan Ki Daleel Hai Ke Waswasao Per Amal Karna Toh Kya Isey Zubaan Per Laate Bhi Ghabrate Hai.
∗2. Waswase Ko Badaa Bura Samajhna.
∗3. Yaani Waswase Aana Kamal-e-Emaan Ki Daleel Hai Kyunke Chor Bhare Ghar Me Hee Hamla Karta Hai Aur Shaitaan Momin Ke Emaan Par Hamla Karne Ke Firaaq Me Hee Zyada Laga Rehta Hai.

♥ Qaul-e-Mubarak : Hazrat Ali Murtuza Farmate Hai Ke,
“Jo Namaz Waswasao Se Khali Ho Wo Namaz Yahood-O-Nasara Ki Hai (Mirqaat) Ya Waswasao Ko Buraa Samajhna Aen-e-Emaan Hai Kyunke Kafir Toh Inhe Acha Samajhkar Iss Per Emaan Le Aate Hai”.

Allah Taala Humare Emaan Ki Salamti Ata Farmaye…

Taqdeer Ke Bare Me Kuchh Aqeede ….

∗ Taqdeer Ke Bare Me Kuchh Aqeede ….

» Mehfum-e-Hadees : Taqdeer Par Emaan Rakhna Farz Hae, Iss Ke Bare Me Ziyada Bahes Aur Ghour-O-Fikr Karne Se Sahaba-e-Kiram Ko Bhi Manaa Farma Diya Gaya Tha, Iss Ke Bare Me Ziyada Bahes Karna Halakat Ka Sabab Hai.
- (Tirmizi Hadees No.2133 Baab:Maa Ja’a Fi Ttashdeed Fil-Khoudi Fil Qadr : @[156344474474186:])

» Duniya Me Jo Kuchh Bhalayi Ya Burayi Hone Wali Thi, Un Tamam Ko Allah Ta’ala Azal Se Hi Janta Hae. Aur Us Ne Apne Ilm Ke Muwafiq Un Tamam Baton Ko Likh Diya Hai. Jo Shakhs Jaisa Karne Wala Tha, Allah Ta’ala Ne Uski Taqdeer Me Wahi Likha, Ye Nahi Ke…. Allah Ta’ala Ne Jaisa Likh Diya Ab Bande Ko Majbooran Waisa Hi Karna Padega.

» Buraa Kaam Karke Taaqdeer Ki Taraf Mansoob Kar Dena, Yaa Ye Kehna Ke Allah Ne Aisa Hi Chaha Toh Mai Ne Aisa Kardiya, Ye Bahut Hi Buri Baat Hai. Balke Hukm Ye Hai Ke Nek Kaamon Ko Taqdeer Ki Taraf Mansoob Kare, Aur Burey Kaam Ko Apne Nafs Ki Shararat Samjhe.

» Taqdeer (Qaza) Ki Teen Qismen Bayan Ki Gai Hai. @[156344474474186:]
1). Qaza-e-Mubram – Ye Atal Faisla Hota Hai, Kisi Bhi Tarah Nahi Badalta. Jab Khas Bande Uske Bare Me Kuchh Sifarish Karna Chahte Hai To Pahle Hi Bata Diya Jata Hai Ke Ye Atal Faisla Hai, Iss Muamle Ko Chhor Do. Jaise Ke Allah Tala Ibrahim (Alaihay Salam) Se Farmata Hai,
♥ Al-Quraan : “Aye Ibraheem! Iss Muamle Me Mat Pado, Beshak Tumhare Rab Ka Hukm Aa Chuka, Aur Un(Mushriko) Par Aisa Azaab Aane Wala Hai Jo Phera Nahi Jaega”. – (Surah Hood, Ayat No.76)

2). Qaza-e-Mu’allaq – Yaani Ye Atal Faisla Nahi Hota, Balke Bande Ki Nekion Aur Koshishon Se Woh Faisla Badal Sakta Hai. Jaisa Ke Ek Hadees Sharif Me Hai.
» Mehfum-e-Hadees : “Yaani. Har Surat Me Bhalai Hai, Uski Koshish Karo Jo Tumko Faida De. Aor Allah Se Madad Mango, Aajiz Mat Bane Raho”.
- (Muslim Sharif : Hadees No.2664)

3). Qaza-e-Shibhe Mubram – Yaani! Firishton Ke Kitab Me Toh Usko ‘Mubram’ Likh Diya Jata Hai. Magar! Allah Ta’ala Ke Ilm Me Usko Mua’aalq Ke Darje Me Rakha Jata Hai. Usko Bahut Hee Khas Aur Muqarrab Bandon Ki Sifarish Aur Khas Duaon Ke Zarie Tabdeel Kiya Ja Sakta Hai.

Ek-Doosre Ke Burey Naam Na Rakho ….

∗ Ek-Doosre Ke Burey Naam Na Rakho ….

♥ Al-Quraan : Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
» Aur Ek Doosre Ke Burey Naam Na Rakho.
- (Surah Hujurat, Ayat 11) : @[156344474474186:]
» Tashrih : Iss Ayat Ke Tehat Chand Maslay Maloom Hote Hai,
∗1. Ek Toh Yeh Ke Musalman Ko Kisi Bhi Tarha Ke Bure Lafzo Me Na Bulao.
∗2. Doosra Yeh Ke Jis Gunahgar Ne Apne Gunaah Se Tauba Karli Ho Phir Usay Iss Gunaah Ka Taana No Do.
∗3. Teesra Yeh Ke Musalman Ko Aise Laqab Se Na Pukaro Jo Usse Nagawaar Ho Agarchay Woh Aeb Uss Me Moujud Ho. Jaise Koi Jismani Tour Par Kisi Hisse Se Kamzor Ho Toh Tum Par Yeh Laazmi Hai Ke Usey Uss Hisse Ke Mutalik Hargiz Takleef Bhari Baate/Taana Na Do.

निकाह औरत मर्द के साथ-साथ दरअसल दो खानदान का भी रिश्ता होता हैं ….

∗ निकाह औरत मर्द के साथ-साथ दरअसल दो खानदान का भी रिश्ता होता हैं ….
निकाह दरहकीकत एक ऐसा ताल्लुक हैं जो औरत मर्द के दरम्यान एक पाकदामन रिश्ता हैं जो मरने के बाद भी ज़िन्दा रहता हैं बल्कि निकाह हैं ही इसलिये के लोगो के दरम्यान मोहब्बत कायम रह सके| जैसा के नबी सल्लललाहो अलेहे वसल्लम ने फ़रमाया-
» हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ी अल्लाहु अनहु) से रिवायत हैं के रसूलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया – के ‘आपस मे मोहब्बत रखने वालो के लिये निकाह जैसी कोई दूसरी चीज़ नही देखी गयी|’
- (इब्ने माजा : @[156344474474186:])
» हदीसे नबवी से साबित हैं के निकाह औरत मर्द के साथ-साथ दरअसल दो खानदान का भी रिश्ता होता हैं जो निकाह के बाद कायम होता हैं|
इसका अव्वल तो ये फ़ायदा होता हैं के अगर एक मर्द और औरत की निकाह से पहले मोहब्बत मे हो तो गुनाह के इमकान हैं लेकिन अगर उनका निकाह कर दिया जाये तो गुनाह का इमकान नही रहता. दूसरे उनकी मोहब्बत हमेशा के लिये निकाह मे तबदील हो जाती हैं जो जायज़ हैं साथ ही दो अलग-अलग खानदान आपस मे एक-दूसरे से वाकिफ़ होते हैं और एक नया रिश्ता कायम होता हैं|
मोहब्बत के साथ-साथ निकाह नफ़्स इन्सानी के सुकुन का भी ज़रिय हैं जिससे इन्सान सुकुन और फ़ायदा हासिल करता हैं|
अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं-
» अल-कुरान : और उसी की निशानियो मे से एक ये हैं की उसने तुम्हारे लिये तुम्ही मे से बीवीया पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर सुकून हासिल करे और तुम लोगो के दरम्यान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी| इसमे शक नही गौर करने वालो के लिये यकिनन बहुत सी निशानिया हैं|
- (सूरह रूम सूरह नं 30 आयत नं 21)

40 Din Namaz Qabool Nahi, Agar….

∗ 40 Din Namaz Qabool Nahi, Agar….

» Mehfum-e-Hadees: Hazrate Hafsa (Razi Allahu Anhu) Ne Farmaya Ki Huzoor-e-Akram (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya Ki,
“Agar Koi Musalman Kisi Majoosi, (Kuffar Baba) Ke Paas Jakar Kucch Daryaft Karta Hai Toh Uski 40 Din Ki Namaz Qubool Nahi Hoti”.
- (Muslim Sharif Vol-2 Page-233 : @[156344474474186:])
» Note: 40 Din Ki Namaz Qabool Na Honey Se Muarad Yeh Nahi Ke 40 Din Namaz Chorr De, Bulki Namaz IntehayiJaruri Hai Par Afsos Ke Woh 40 Din Qabool Na Hongi.