♥ Dua: “Rabbi Sharli Sadri Wa Yassirli Amri Wahlul Uqdatan Mil-Lisaani Yafqahu Qawli”

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Ilm Ki Ahmiyat Aur Fazilat ….

∗ Ilm Ki Ahmiyat Aur Fazilat ….

www.Ummat-e-Nabi.com : ♥ Al-Quraan: Allah Ta’ala Yakinan Unn Logon Ko Jo Tum Me Se Imaan Laaye, Aur Jinhone Ilm Haasil Kiya Unkey Darjaat Buland Kar Ke Rahega.
- [Surat Al-Mujadila(58): Ayat-11] : @[156344474474186:]

♥ Isi Tarha Ilm Ki Ahmiyat Aur Fazilat Ke Talluk Se Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi WaSallam) Farmate Hai -
» Hadees: “Ilm Haasil Karna Har Musalmaan Par Farz Hai”.
- (Miskat P:24)
» Hadees: “Har Cheez Ka Ek Raasta Hai Aur Jannat Ka Raasta Ilm Hai”.
- (K.Ummal)
» Hadees: “Raat Me Ek Pal (Ghadi) Ke Liye Ilm Padhna Padhaana Raat Bhar Ki Ibadat Se Behtar Hai”.
- (Darami, Mishkat Sharif, Anwarul Hadis Page-58)
» Hadees: “Ilm Ki Majlish Me Haazir Hona 1000 Nafil Padhne Se Afzal Hai”.
- (Tafseer Roo’hul Bayaan, J#10, P#221)
» Hadees: “Behtareen Sadqa Yeh Hai Ki Musalman Aadmi Ilm Haasil Kare, Phir Apne Musalman Bhai Ko Sikhaaye”
- (Ibn-E-Majah J:1 S:158 H:243)
» Hadees: “Ilm Ki Talab Me Jis Ke Qadam Khak Aalud Ho. Allah Uske Jism Ko Jahannam Par Haraam Kar Dega Aur Allah Ke Farishte Uske Liye Dua-e-Magfirat Karenge”.
(Tafsir-e-Kabir)
» Hadees: “Jo Ilm Ki Talaash Me Kisi Raste Par Chalta Hai, Allah Uske Liye Jannat Ka Rasta Aasaan Farma Deta Hai”.
- (Ibne Maja, Jild-1, Page:145)
» Hadees: “Jo Shakhs Talab-e-Ilm Me Rehta Hai, Allah Uske Rizq Ka Zaamin Hai”.
- (Tareekh-e-Baghdad, Raqam-1535, Jild-3, Page-398)
» Hadees: “Jis Ne Ilm Talash Kiya Tou Yeh Talash Uskey Gujasta Gunaaho Ka Kaffara Ho Gayi”.
- (Mir’aatul Manahij, Jild 1, Safa 203)
» Hadees: “Jis Shakhs Ko Iss Haal Me Mout Aaye Ki Wo Ilm Hasil Kar Raha Ho, Taa’ki Iss Ke Zariye Islam Ko Zinda Karey(Faila Sakey) Tou Uss Ke Aur Ambiya Ke Darmiyan Jannat Me Sirf Ek Darjah Ka Farq Hoga”.
- (Mishkat Sharif: Hadees No-231)

Aakhir Me Allah Rabbul Izzat Se Dua Hai Ke, Allah Hum Tamaam Ko Beshumar Ilm Aur Amal Ki Taufiq Dey,
Beshumaar Sharayi Aur Duniyawi Ilm Ki Doulat Se Nawaze …
Sahih Ilm Ke Jarye Allah Ki Marfat Hasil Karne Ki Taufiq Ata Farmaye …
Jab Tak Humey Zinda Rakhe Islam Aur Imaan Par Zinda Rakhe …
Khaatma Humara Imaan Par Ho…
!!! Wa Akhiru Dawana Anilhamdulillahe Rabbil A’lameen !!!

Ilm-o-Hidayat Ki Misaal ….

∗ Ilm-o-Hidayat Ki Misaal ….

» Mehfum-e-Hadees: Abu Musa (RaziAllahu Anhu) Se Riwayat Hai Ke RasoolAllah (Sallallahu Alayhi Wasallam) Ne Farmaya -
Allah Ta’ala Ne Mujhe Jis Ilm-o-Hidayat Ke Saath Bheja Hai Uski Misaal Uss Baarish Ki Tarah Hai Jo Kisi Zameen Par Khub Barsey.(Aur Jis Zameen Par Barish Barsi Wo 3 Tarah Ki Thi)
1). Uska Ek Tukda Umda Tha Jisne Paani Ko Apne Andar Jazab Kar Liya, Fir Khub Ghaas Aur Sabza Ugaya.
2). Zameen Ka Ek Dusra Umda Tukda Sakht Tha.(Jisne Paani Tou Jazab Nahi Kiya Lakin ) Uskey Uper Paani Jama Ho Gaya.
Allah Ta’ala Ne Is Se Bhi Logo Ko Nafa Pahonchaya. Unhone Khud Bhi Paani Piya, Jaanwaro Ko Bhi Pilaya Aur Kheto Ko Bhi Sairab Kiya.
3). Wo Barish Zameen Ke Aise Tukdo Par Bhi Barsi Jo Chatpal Maidan Hi They. Jiska Paani Na Jama Kiya Aur Na Hi Kisi Ko Ghaas Ugai. (Isi Tarah Log Bhi 3 Kism Ke Hotey Hai)

# Pehli Misaal : Uss Shakhs Ki Hai Jisne Deen Me Samaz Hasil Ki Aur Jis Hidayat Ko Dey Kar Allah Ta’ala Ne Mujhe Bheja Hai Allah Ta’ala Ne Usey Uss Hidayat Se Nafa Pahonchaya. Usne Khud Bhi Sikha Aur Dusro Ko Bhi Sikhaya.
# Dusri Misaal : Uss Shakhs Ki Hai Jisne Khud Tou Faida Nahi Uthaya Magar Dusre Logo Ne Uss Se Faidah Haasil Kiya.
# Teesri Misaal : Uss Shakhs Ki Hai Jisne Uski Tarah Sir Uthakar Bhi Na Dekha Aur Na Allah Ta’ala Ki Uss Hidayat Ko Qubool Kiya Jis Ke Saath Allah Ta’ala Ne Muje Bheja Hai.

- Sahih Muslim Book 030, Hadith Number 5668.
- Sahih Bukhari Volume 001, Book 003, Hadith Number 079.

Momin Ka Kirdaar ….

∗ Momin Ka Kirdaar ….

» Mehfum-e-Hadees: Hazrate No’man Bin Bashir (RaziAllahu Anhu) Riwayat Karte Hain Ki, Huzoor Nabi-e-Akram (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ne Farmaya:
“Momineen Ki Misaal Ek Dusarey Par Raham Karne, Dosti Rakhne Aur Shafqat Ka Mujahira Karne Me Ek Jism Ki Tarah Hai, Chunanche Jab Jism Ke Kisi Bhi Hisse Ko Takleef Pahunchti Hai Tou Saara Jism Bekhwaabi Wa Bukhaar Me Uss Ka Shareek Hota Hai.”
Muttafaque Alayh -
[Bukhari As-Sahih, 05/2238, Raqam-5665]
[Muslim As-Sahih, 04/1999, Raqam-2586]
[Ahmad Bin Hanbal Al-Musnad, 04/270]
[Bayhaqi As-Sunan-ul-Kubra, 03/353, Raqam-6223]
[Bayhaqi, Shuab-ul-Iman, 06/481, Raqam-8985]
[Bazzar Al-Musnad, 08/238, Raqam-3299]
[Ibn Mundah Al-Iman, 01/455, Raqam-319]
[Ibn Sulayman Al-Qureshi, 01/74]
[Al-Minhaj-us-Sawi, Safah-104, 105, Raqam-19]

Aye Allah ! Mere Kaam Ko Mere Liye Aasan Kar ….

∗ Aye Allah ! Mere Kaam Ko Mere Liye Aasan Kar ….

» Dua : “Rabbi Sharli Sadri Wa Yassirli Amri Wahlul Uqdatan Mil-Lisaani Yafqahu Qawli”
• Tarjuma: “Aye Mere Rab! Tu Mere Liye Mera Seena Khol Dey Aur Isey Risalat Ka Vajan Sahne Ke Liye Faila Dey, Aur Mere Kaam Ko Mere Liye Aasan Kar Dey, Aur Meri Zubaan Ki Giroh Ko Khol Dey Taaki Log Meri Baat Ko Acchi Tarha Se Samjhe.
- (Al-Quraan; Surah Taha 20:25-28)

चाँद के टूटने के विश्वास से सिद्ध होते है वैज्ञानिक तथ्य …

∗ चाँद के टूटने के विश्वास से सिद्ध होते है वैज्ञानिक तथ्य …

www.Ummat-e-Nabi.com : बहुत समय से गैर मुस्लिम भाईयों को मुस्लिमों के इस विश्वास का मजाक उडाते देख रहा हूँ कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने चांद के दो टुकड़े कर दिए थे ..
ये लोग कहते हैं कि मुसलमान बार बार इस्लाम धर्म को विज्ञान पर खरा उतरने वाला धर्म बताते हैं, पर इस्लाम मे वर्णित चांद के तोड़ने और नबी के द्वारा बिना किसी विमान के आकाश की सैर जैसी इन अवैज्ञानिक बातों के जरिए इस्लाम भी झूठ और अंधविश्वास ही फैलाता है …

पहली बात तो हम इन भाईयों से यही कहेंगे कि इस्लाम को फैलाने के लिए अल्लाह और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने चमत्कार दिखाने का सहारा नही लिया बल्कि इस्लाम फैला अपने उच्च नैतिक नियमों के कारण …. लेकिन आप कुरान और हदीस पढ़ेन्गे तो पाएंगे कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का चमत्कार न दिखाना भी कुफ्फार की नजरों मे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के झूठे होने का प्रमाण था और ये कुफ्फार लोगों को ये कह कहकर भड़काया करते थे कि ये कैसा नबी है जो साधारण आदमियों की तरह बाजारों मे घूमता फिरता है, यदि ये वास्तव मे नबी होता तो अल्लाह ने इसके साथ एक फरिश्ता रखा होता और ये चमत्कार दिखाता होता इस कारण, कुछ एक चमत्कार जो अल्लाह के हुक्म से नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दिखाए, वे एक तो इसलिए ताकि कुफ्फार के आरोपों को झुठलाया जा सके,
और दूसरा कारण ये कि वे गैर मुस्लिम जो चमत्कार को ही ईश्वर की निशानी मानते थे और सम्मोहन करने वाले जादूगरो के जादू के कारण ही उन्हें ईश्वर का साथी मानने लगे थे, वे लोग भी अल्लाह के द्वारा किए गए सच्चे चमत्कार को देखकर ये जान लें कि मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को ईश्वर का सच्चा साथ प्राप्त है …

चांद के दो टुकड़े करने के लिए भी कुफ्फारे मक्का ने प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को बहुत उकसाया और ये वादे किए कि अगर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सच्चे हैं और सचमुच अल्लाह के रसूल हैं, तो वे चांद को तोड़कर दिखा दें, फिर हम इनका नबी होना तस्लीम कर लेंगे और मुसलमान हो जाएंगे …

अल्लाह और उसके नबी जानते थे कि कुफ्फार के ये दावे और वादे सिर्फ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को झूठा साबित करने की नीयत से किए गए हैं, इस्लाम कुबूल करने की नीयत से नहीं …
लेकिन यहाँ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई को दांव पर लगाया गया था सो अल्लाह की मर्ज़ी से नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उंगलियों के इशारे से चांद के दो टुकड़े कर के अपनी सच्चाई का सबूत भी कुफ्फार को दिया, और कुफ्फार का ये झूठ भी दुनिया के सामने ले आए कि चांद के टूटते ही वो मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का नबी होना तस्लीम कर के ईमान ले आएंगे ….
कुफ्फारे मक्का चांद के तोड़े जाने को जादू कहकर इस सच से इनकार करने लगे, और न नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को उन्होंने नबी तस्लीम किया, न मुसलमानों को यातनाएँ देनी बंद कीं…

बहरहाल … चांद के दो टुकड़े होने का ये वाकया सच्चा था ये हम आज भी पूरे दावे से कहते हैं … नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) द्वारा चन्द्रमा के तोड़े जाने की इस घटना ने कई वैज्ञानिक तथ्यों को भी स्पष्ट कर दिया जिनकी पुष्टि आज भी अंतरिक्ष विज्ञानी करते हैं… – @[156344474474186:]

» 1 – चांद को देखकर दुनिया मे पहले की आबादियां उसे एक ठण्डी रौशनी का पुन्ज समझती थीं जैसे सूरज एक गर्म प्रकाश पुंज है, और रौशनी को न छुआ जा सकता है न ही तोड़ा जा सकता है , इस्लाम से पहले चांद को कोई भी व्यक्ति ऐसी ठोस वस्तु नहीं मानता था जिसे स्पर्श किया जा सकता हो …. ये खयाल बीसवीं शताब्दी तक लोगों मे बना रहा जब तक नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर उतर कर ये साबित न किया कि चांद मिट्टी और चट्टानों से बना एक विशाल उपग्रह है … लेकिन चांद के तोड़े जाने के वाकये से इस्लाम ने 1400 साल पहले ही ये सिद्ध कर दिया कि चांद एक ठोस आकाशीय संरचना है …

» 2 - पूरी दुनिया के लोगों मे चांद को देवता या दैवीय शक्ति आदि मानने का भी चलन था इस्लाम से पूर्व … लेकिन चांद को तोड़कर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने ये सिद्ध किया कि चांद एक ठोस निर्जीव आकाशीय पिण्ड से अधिक कुछ नहीं और उसमें कोई दैवीय शक्ति नहीं, और न ही वो कोई देवता है…. दुनिया भर के अनेक गैर मुस्लिम अब तक चांद मे दैवीय शक्तियों का वास समझते थे, लेकिन अपने इतिहास से लेकर आज तक मुस्लिमों ने ऐसा अंधविश्वास चांद के विषय मे कभी नहीं रखा ॥

» 3 – चांद के तोड़ने के मुस्लिमो के इस दावे ने इस सम्भावना को भी दुनिया के सामने रखा कि यदि 1400 वर्ष पहले चांद को तोड़कर जोड़ा गया था, तो इस बात के चिन्ह आज भी चांद की सतह पर मिलने चाहिए,
आज हमारे पास NASA द्वारा लिये गये चांद की सतह के कुछ चित्र हैं, जिनमें चांद की सतह पर एक विशाल दरार दिखाई पड़ रही है …. जैसे किसी टूटी हुई चीज़ दोबारा जोड़कर रखने पर बन जाती है ….. हम जानते है कि विरोधी इस दरार के चन्द्रमा की सतह पर होने के भी अलग अलग कयास निकालेंगे पर चांद के टूटने की बात नहीं मानेंगे… पर इस्लाम मे चांद के टूटने के विश्वास का मजाक ये लोग तब उड़ा सकते थे जब चांद पर ऐसी कोई दरार न मिली होती ….. इस दरार के पाये जाने के बावजूद यदि लोग चांद के टूटने की सम्भावना पर विचार न करें तो इसे उन लोगों के पूर्वाग्रह का ही परिणाम कहा जाएगा…

बहरहाल जो लोग चांद के टूटने को इस्लाम का अंधविश्वास साबित करना चाहते हैं, वे अपनी इस बात कि चांद कभी नहीं टूटा था को सिद्ध करने का कोई प्रमाण नहीं दे सकते …. लेकिन चांद टूटा था इस बात का एक बड़ा प्रमाण मुस्लिमों के पास अवश्य है !!
Chand, Mojza , Mojza-e-Rasool , Moon , Science and Islam

Jisney RasoolAllah Ki Ita-At Ki Usney Allah Ki Ita-At Ki ….

∗ Jisney RasoolAllah Ki Ita-At Ki Usney Allah Ki Ita-At Ki ….

www.Ummat-e-Nabi.com : ♥ Al-Quraan: Jisney RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Ita’at Ki Bus Usney Allah Ki Ita-At Ki”
- [An-Nisa(4): Ayat-80]
» Wajahat: Iss Aayte Mubarak Se Yeh Baat Wajeh Hoti Hai Ke, RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Ita-At Karna Goya Allah Ki Ita-At Karna Hai, Aur RasoolAllah Ki Farmabardari Goya Allah Ki Farmabardari Hai..
Aayiye Jaan Letey Hai Ke RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Kya Shakhsiyat Hai, Aapki Zaat-e-Mubarak Kya Hai? Aapka Muqaam Kya Hai ? …
Aap Wo Zaat-e-Mubarak Hai Jinki Wajah Se Jannat Ka Darwaza Khola Jayega Roze Qayamat,
Aap (Sallallahu Alaihay Wasallam) Wo Shakhsiyat Hai Jo Sabse Pahle Jannat Me Dakhil Hongey,
Aap (Sallallahu Alaihay Wasallam) Wo Shakhsiyat Hai Jinke Zande Taley Roze Qayamat Tamaam Nabi Aur Rasool Aur Unke Ummati Aqwam(Jama/Hajir) Honge..

Lekin Aaj Humne RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Shakhsiyat Ki Kitni Nafrmani Ki Hai Aayie Jara Muhasba Kar Letey Hai ..
Aaj Humara Yeh Muamla Hai Ke RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Sunnat Humari Zindagi Me Aa Bhi Jaye, Fir Bhi Hum Apne Man-maani Tareeke Par Zindagi Jeetey Rahenge ….
Kyunki Humarey Tou Bado Ne Yeh Kiya,
Humare Khandan Ka Purana Tareeka Hai Ye,
Humari Qaum, Samaj, Shahero Aur Basti Ka Tareeka Ye Hai..
Lihaza Sunnat Hum Nahi Maan Sakte.. (Nauzubillah)

Yaha Allah Ta’ala Hume Uss Nabi Ki Sunnate Mubarak Par Amal Lazim Kar Raha Hai Jo Tamam Aalam Ke Nabi Hai, Jo Imam-Ul-Ambiya Hai…
Yeh Nabi Jab Meraz Me Jatey Hai Tou Tamam Ambiya (Alahi Salam) Ki Imamat Kartey Hai, Aise Nabi Ki Ita-At Allah Hum Par Lazim Kar Raha Hai, Aur Inhi Nabi (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Baate Hum Chodkar Hum Iski-Uski Aur Fala Fala Ki Baate Mantey Hai .. Quraan Aur Aahadees Ko Chodkar Hum Jahilana Aqaid Par Imaan Latey Hai ..

Yaad Rakhiye Kalma “La Ilaha IllAllah Muhammadur Rasoolullah” Ka Aadha Zuz Hai “Imaan-Birr-Rasool” Yaani RasoolAllah Par Imaan Rakhna….
Aaj Hum Kalma Tou Padhtey Hai RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ka Lekin Tareeka Fir Kisi Aur Ka Ikhtiyar Karte Hai ,
Kalma Tou Padhtey Hai RasoolAllah Ka Fir Baat Kisi Aur Ki Mantey Hai,
Kalma Tou Padhtey Hai RasoolAllah Ka Lekin Apne Amaal Aur Ikhtilaf Me Kisi Aur Ke Paas Jaatey Hai,
Kalma Tou Padhtey Hai RasoolAllah Ka Aur Tamaam Zindagi Ke Shobey Aap Ki Sunnat Se Khali Hai,
Aur Fir Hum Apne Aap Ko Jannat Ke Mustahik, Aashike Rasool, Ahle Sunnat Wal Jamat, Aur Haq Par Samjhne Lag Jatey Hai ,.. Subhanallah … – @[156344474474186:]

Kya Yahi Pahchan Hai Ek Aashike Rasool Ki ? Ke Sirf Kalma Padhke Iske Takazo Ko Zubaan Par Hi Khatm Kar Diya Jaaye…
Nahi !! Hargiz Nahi …
Yaad Rakhiye Agar Humne ‘Muhammadur Rasoolullah’ Kaha Tou Humari Zindagi Ka Khatma Aur Zindagi Ka Har Pailu RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Tareeke Par Hi Hona Chahiye..
Yahi Iss Kalme Ka Sahi Mayna Hota Hai ..
Tou Goya “Jisney RasoolAllah Ki Ita-At Ki Usney Allah Ki Ita-At Ki” ..

Aur RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ka Muqaam Kya Hai Iss Barey Me Quraan Me Allah Ta’ala Ek Aur Jagah Farmata Hai Ke -
♥ Al-Quraan: Tou Qasam Hai Tere Rab Ki! Yeh Log Imanwale Nahi Ho Sakte Jab Tak Ke Apne Tamam Ikhtelaaf Me Aap (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ko Haaqim Na Bana Ley. Aur Jo Faisla Aap Suna Dey Tou Usko Taslim (Kabool) Na Karey Tab Tak Ye Log Imaanwale Nahi Ho Sakte..
- [Surah (4) Nisa: Ayat-65]
Kya Wakay Me Hum Aaj RasoolAllah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Faisle Mubarak Ke Jarye Aapas Me Huey Ikhtelaaf Ko Door Karne Ki Koshish Kar Rahe Hai ????
Think About It ….

Allah Ta’ala Hume Parhne Sun’ne Se Jyada Amal Ki Toufiq Ata Farmaye!!!
!!! Wa Akhiru Dawana Anilhamdulillahe Rabbil A’lameen !!!

पेड़ पौंधो में जीवन होने के प्रमाण १४०० साल पहले से ही कुरान में …

∗ पेड़ पौंधो में जीवन होने के प्रमाण १४०० साल पहले से ही कुरान में …

ईश्वर द्वारा रची गई इस अद्भुत सृष्टि मे एक अद्भुत रचना है, वनस्पति जगत ….
पेड़ पौधों को हम अपनी आंखो से जीवित प्राणियों की तरह छोटे से बड़ा होते, बढ़ते बनते देखते हैं …. पेड़ों को खुद हम अपने हाथ से भोजन खिलाते और पानी पिलाते हैं यानी उन्हें खाद और पानी देते हैं ….

एक और लक्षण होता है प्राणियों मे जीवन का और वो है उनकी बुद्धि … ये बुद्धि हम प्रत्यक्ष से पशुओं मे देखते हैं .. लेकिन यदि ध्यान दिया जाए तो इन पशुओं से भी कहीं अधिक बुद्धि अनेकों पेड़ पौधों मे भी प्रत्यक्ष रूप से दिखती है …

छोटे कीटो से लेकर चूहे और छिपकलियों तक को मूर्ख बनाकर उनका शिकार कर लेने वाले कीटभक्षी और मांसभक्षी पौधों के बारे मे भी आपने पढ़ा होगा और सम्भवत: टीवी पर देखा भी होगा … और बड़े बड़े जानवरों को मूर्ख बना देने वाला पौधा तो अक्सर हमारे घरों मे ही मौजूद होता है …. छुईमुई का पौधा गाय, भैंस और बकरी जैसे जानवरों को मूर्ख बना देता है इन पशुओं के सून्घते ही ये पौधा अपनी पत्तियों को सिकोड़ लेता है जानवर समझते हैं ये पौधा सूखा है और इसमें खाने को कुछ नही और आगे बढ़ जाते हैं … बताईए किसमे ज्यादा बुद्धि है… इस पौधे मे या उन जानवरों मे ???
पेड़ों मे जीवित प्राणियों वाले ये सारे खुले खुले लक्षण देखकर भी कोई उन्हे निर्जीव समझे… तो दोष उस व्यक्ति की बुद्धि का है , पेड़ स्पष्ट तौर पर सजीव होते हैं ।

और जो चीज स्पष्ट तौर पर नहीं दिखती थी वह भी 1400 वर्ष पहले पवित्र कुरान मे बता दी गई कि पेड़ वंश बढ़ाने के लिए आपस मे यौन क्रिया करते हैं ….
कुरान की सूरह ताहा की आयत नम्बर 53 मे लिखा है कि अल्लाह ने पेड़ पौधों को उनके “अज़वाज” अर्थात् विपरीत लिंगी साथियों के साथ बनाया यानि नर एवं मादा पेड़ बनाए
– @[156344474474186:]
सभी जानते हैं कि वंश बढ़ाना जीवन और जीवित प्राणियों का ही लक्षण है … लेकिन पेड़ भी नर एवं मादा होते हैं और उनका वंश भी यौन क्रिया द्वारा ही वे आगे बढ़ाते हैं ये बात आधुनिक विज्ञान को अट्ठारहवीं शताब्दी मे पता चली…. जबकि पवित्र कुरान मे इस बात का जिक्र आज से चौदह सौ साल पहले ही कर दिया गया था

Tum Qabro Ko Masjide Na Banana ….

∗ Tum Qabro Ko Masjide Na Banana ….

» Mehfum-e-Hadees: Hazrate Jundub Bin Abdulullah (RaziAllahu Anhu) Se Riwayat Hai Ki Mai Ne Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ko Irshad Farmatey Huwe Suna Ki :
“Tum Me Se Pahle Ke Log Apne Nabiyo Aur Waliyo Ki Qabaro Ko Masjidein Bana Letey They, Khabardar! Tum Qabro Ko Masjide Na Banana, Mai Tumhe Iss Se Manaa Karta Hoon.”
- [Sahi Muslim 532, Al-Hakim 2: 550, Fiqh-us-Sunnah Volume 002]

Sawaal(2) : Allah Ka Bando Par Kya Haq Hai?

∗ Sawaal(2) : Allah Ka Bando Par Kya Haq Hai?

» Jawaab: Mehfum-e-Hadees: Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi Wasallam) Farmatey Hai Ke -
★ Mehfum-e-Hadees : Allah Ka Haq Bando Par Ye Hai Ke Sirf Usi Ki Ibadat Karey, Aur Kisiko Uska Shareek Na Thehraye.. Aur Bando Ka Haq Allah Par Ye Hai Ke Jo Koyi Shirk Na Karey Usey Azaab Na Dey.
- (Bukhari:2856, Muslim:30)

♥ Al-Quraan : Jo Log Emaan Laaye Aur Apne Emaan Ko Zulm Se Mahfooj Kiya Unke Liye Aman Hai Aur Wahi Hidayat Paney Wale Log Hain”.
– (Surah 6 Al-An’am, Aayat-82)

Dr. Morris Bokay’s Journey of Faith …

∗ Dr. Morris Bokay’s Journey of Faith …

Dr. Morris Bokayडॉ मौरिस बुकाय फ्रांस के सबसे बड़े डाक्टर थे, और उनका धर्म ईसाई था ॥
1898 मे जब मिस्र मे लाल सागर के किनारे एक अति प्राचीन मानव शरीर मिला जो आश्चर्यजनक रूप से हज़ारों साल गुजर जाने के बाद भी सुरक्षित था, सभी को इस मृत शरीर का रहस्य जानने की उत्सुकता रहती थी इसीलिए इस शरीर को 1981 मे चिकित्सकीय खोज के लिए फ्रांस मंगवाया गया और इस शरीर पर डाक्टर मौरिस ने परीक्षण किए ….

परीक्षणों से डाक्टर मौरिस ने निष्कर्ष निकाले कि जिस व्यक्ति की ये मृत देह है उसकी मौत समुद्र मे डूबने के कारण हुई थी क्योंकि डाक्टर मौरिस को उस मृत शरीर मे समुद्री नमक का कुछ भाग मिला था, साथ ही ये भी पता चला कि इस व्यक्ति को डूबने के कुछ ही समय बाद पानी से बाहर निकाल लिया गया था …. लेकिन ये बात डाक्टर मौरिस के समक्ष अब भी एक पहेली थी कि आखिर ये शरीर अपनी मौत के हजारो साल बाद भी सड़ गल कर नष्ट क्यों नहीं हुआ ….
तभी उन्हें अपने एक सहकर्मी से पता चला कि मुस्लिम लोग बिना जांच रिपोर्ट के सामने आए ही ये कह रहे हैं कि ये व्यक्ति समुद्र मे डूब कर मरा था, और ये मृत देह उस फिरऔन की है जिसने अल्लाह के नबी हजरत मूसा (अलैहि सलाम) और उनके अनुयायियों का कत्ले आम कराना चाहा था, क्योंकि फिरऔन की लाश के सदा सुरक्षित रहने और उसके समुद्र मे डूब कर मरने की बात उनकी पवित्र पुस्तक कुरान मे लिखी है जिसपर वो विश्वास करते हैं …

मौरिस को ये सोचकर बहुत हैरत हुई कि इस मृत देह के समुद्र मे डूब कर मरने की जिस बात का पता मैंने बड़ी बड़ी अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से लगाया वो बात मुस्लिमों को पहले से कैसे मालूम चल गई ? और जबकि इस लाश के अपनी मृत्यु के हजारों साल बाद भी नष्ट न होने का पता 1981से महज़ 83 साल पहले चला है, तो उनकी कुरान मे ये बात 1400 साल पहले कैसे लिख ली गई ??
इस शरीर की मौत के हजारों साल बाद भी इस शरीर के बचे रह जाने का कोई वैज्ञानिक कारण डाक्टर मौरिस या अन्य वैज्ञानिक जब पता न लगा सके तो इसे ईश्वर के चमत्कार के अतिरिक्त और क्या माना जा सकता था ??

बाइबल के आधार पर भी मृत देह के मिलने की लोकेशन और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर उस मृत शरीर की लगभग 3000 वर्ष की उम्र होने के कारण मौरिस को ये विश्वास तो हो रहा था कि ये शरीर फिरऔन का ही है, अत: डाक्टर ने फिरऔन के विषय मे अधिक जानने के लिए तौरात शरीफ (बाइबल : ओल्ड टेस्टामेण्ट) का अध्ययन करने का निर्णय किया, लेकिन तौरात मे उन्हें सिर्फ इतना लिखा हुआ मिला कि फिरऔन और उसकी फौज समुद्र मे डूब गए और उनमें से एक भी नहीं बचा . लेकिन फिरऔन की लाश का कहीं जिक्र तक न था …

मौरिस के ज़हन मे कई सवाल खटकते रहे, और आखिरकार वो इन सवालों के जवाब हासिल करने सऊदी अरब मे चल रही एक बड़ी मेडिकल सेमिनार मे हिस्सा लेने पहुंच गए, जहाँ उन्होंने फिरऔन की मृत देह के परीक्षण मे जो पाया वो बताया, उसी वक्त डाक्टर मौरिस की बात सुनकर एक मुस्लिम डाक्टर ने कुरान पाक खोलकर सूरह यूनुस की ये आयत पढ़कर सुना दी कि…
♥ अल कुरान: “इसलिए हम तेरे जिस्म को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद वालों के लिए एक निशानी हो जाए ! बेशक बहुत से लोग हमारी निशानियों की तरफ से लापरवाह रहते हैं ” - [सुरह: यूनुस:आयत-92] – @[156344474474186:]

इस आयत का डाक्टर मौरिस बुकाय पर कुछ ऐसा असर पड़ा कि उसी वक्त खड़े होकर उन्होने ये ऐलान कर दिया कि- “मैने आज से इस्लाम कुबूल कर लिया, और इस पवित्र कुरान पर विश्वास कर लिया

इसके बाद अपने वतन फ्रान्स वापस जाकर कई साल तक डाक्टर मौरिस कुरान और साइंस पर रिसर्च करते रहे, और फिर उसके बाद कुरआन के साइंसी चमत्कारों के विषय मे ऐसी ऐसी किताबें लिखी जिन्होंने दुनियाभर मे धूम मचा दी थी