Proud to be Ummat-e-Rasool'Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam)
Worldwide Roman Hindi Hadith/Hadees Collection
Exact matches only
">
">
">
">
Search in posts
Search in pages
Professional WordPress Plugins

Hidayat Post 1463 results in ( 1.146 seconds)

Yahood Wa Nasara Ki Tarha Apne Ulema Ki Ibadat Na Karo ….

∗ Yahood Wa Nasara Ki Tarha Apne Ulema Ki Ibadat Na Karo ….

♥ Al-Quraan : !!! Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
“Inn Logon Ne Allah Ko Chor Ker Apne Aalimon Aur Darweshon Ko Apna Rab Banaya Hai Aur Marium Ke Bete Maseeh Ko Halaan Ke Unhe Sirf Ek Akele Allah Hi Ki Ibadat Ka Hukm Diya Gaya Tha Jiss Ke Siwa Koi Mabood Nahi Woh Paak Hai Unkey Shareek Muqarrar Kerne Se.
- (Surah Tauba, Aayat: 31)
Iss Aayat Ko SunKar Adi Ibne Hatim (RaziAllahu Anhu) Nabi (Sallallahu Alaihi Wassallam) Se Farmaya – ‘Yahood Wa Nasara Ne Tou Apne Ulema Ki Kabhi Ibadat Nahi Ki Phir Yeh Kyon Kaha Gaya Ke Unhone Apne Ulema Ko Rab Bana Liya ?’
Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi Wassallam) Ne Kaha: ‘Unkey Ulema Ne Jis Cheez Ko (Allah Ki Raza Ke Khilaf) Halaal Qaraar Diya Usko Unhone Halaal, Aur Jis Cheez Ko Haraam Kar Diya Usko Haraam Hi Samjha Yehi Inki Ibaadat Karna Hai
- (Tirmizi H#3095)
Isa (Alaihay Salam)

Mujhe Mere Martabey Se Ziyada Na Badhao ….

∗ Mujhe Mere Martabey Se Ziyada Na Badhao ….

» Mehfum-e-Hadees: Hazrate Umar (RaziAllahu Anhu) Se Rivayat Hai Ki Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi Sasallam) Ne Farmaya -
“Mujhe Mere Martabey Se Ziyada Na Badhao !
Jaisey Esa Ibne Mariyam (Alaihi Salam) Ko Nassara Ne Inkey Martabey Se Ziyada Badha Diya Hai,
Main Tou Sirf Allah Ka Banda Hoon!
Isliye Yahi Kaha Karo Ki Main Allah Ka Banda Hoon Aur Uska Rasool Hun’.
- (Sahih Bukhari Hadees 3445)
Isa (Alaihay Salam)

Allah Ke Alawa Kisi Aur Ki Qasam Na Khaao ….

∗ Allah Ke Alawa Kisi Aur Ki Qasam Na Khaao ….

» Hadees : Rasool’Allah (Sallallahu Alayhi Wasallam) Ne Farmaaya -
“Apne Maa-Baap Aur Butho Ki Qasam Naa Khaao Aur Naa Hi Allah Ke Alawa Kisi Aur Ki Qasam Khaao (Agar Qasam Khaney Ki Zaroorat Pad Jaaye) Tou Sirf Allah Ki Sacchhi Qasam Khaao”.
- (Nasai Sharif: 3769)

» Hadees : Abdullah Bin Umar (RaziAllahu Anhu) Ne Bayan Kiya Ki RasoolAllah (Sallallahu Alaihi Wasallam) Mere Waalid Umar Bin Al-Khattab (RaziAllahu Anhu) Ke Paas Aaye Tou Kya Dekha Ki Wo Kuchh Logon Ke Saath Chal Rahe Hain Aur Apne Waalid Ki Qasam Khaate Jaa Rahe Hain.
Ye Sunkar Aap Ne Farmaya – ‘Suno! Allah Paak Ne Tum Logon Ko Apne Baap-Dada Ki Qasmein Khaane Se Manaa Kiya Hai.
Jisko Qasam Khani Hii Hai Wo Sirf Allah Hii Ki Khaaye Warna Chup Rahe’.
- (Sahih Al-Bukhari, Hadees No.6646)

Apni Tazeem Karwana Jahannamiyon Ka Kaam Hai ….

∗ Apni Tazeem Karwana Jahannamiyon Ka Kaam Hai ….

» Mehfum-e-Hadees : Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Farmate Hai Ke -
“Jiski Ye Khushi Ho Ke Log Uski Tazeem Ke Liye Khadey Rahey Wo Apna Thikana Jahannum Me Banaye”.
- (Tirmizi Sharif)

» Sabaq: Doosro’n Se Apni Taarif-wa-Tazeem Karwaana Insan Ke Ghuroormand Hone Ki Alaamat Hai, Lihaja Emaanwalo Ko Itrana Jayej Nahi.

जिहाद का वास्तविक अर्थ होता है “संघर्ष करना”….

∗ जिहाद का वास्तविक अर्थ होता है “संघर्ष करना”….

अक्सर हमारे नोंमुस्लिम भाइयों में यह ग़लतफहमी पायी जाती है के वो जिहाद जैसे शब्द का तथाकथित लोगों से अलग अलग अर्थ समझकर मुसलमानों के अमन के पैगाम को ठुकरा देते है, आईये आज इसका सही मूल्य जानने की कोशिश करते है…

» जिहाद: अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है “संघर्ष करना” , “जद्दो जेहद करना”.
इसका मूल शब्द जहद है, जिसका अर्थ होता है “संघर्ष”.
ये अरबी भाषा में हर प्रकार के संघर्ष के लिए उपयोग होता है.
जिहाद का अर्थ किसी की जान लेना, क़त्ल करना या किसी बेगुनाह को मारना नही है. जिहाद एक पवित्र शब्द एवं कर्म है जिसे इस्लाम को न समझने वाले व्यक्तियों ने तोड़मरोड़ के पेश किया.
कई लोग जिहाद का अर्थ पवित्र युद्ध समझते हैं जो सरासर गलत है, क्योंकि युद्ध के लिए अरबी भाषा में अलग शब्द “गजवा” या “मगाजी” उपयोग होता है.
इस्लाम के शुरुवाती दिनों में मक्का के अन्न्याई मुशरिकीनो ने जब अमन का मुहायदा (शांति सन्देश) तोडा और मुस्लिमों का जीना दुश्वार कर दिया, तब इन्हे अपने हक के लिए जिहाद का हुक्म हुआ. – @[156344474474186:]

जिहाद के दो किस्मे है -
१. जिहाद अल-अकबर (बड़ा जिहाद) -
जिहाद अल-अकबर बड़ा जिहाद है जिसका मतलब होता है इन्सान खुद अपने अन्दर की बुराईयों लढ़े, अपने बुरे व्यवहार को अच्छाई में बदलने की कोशिश करे, अपनी बुरी सोचो और बुरी ख्वाहिशो को कुचल कर एक अच्छा और आस्थिक इन्सान बने. इस जिहाद को अल्लाह ने कुरान में जिहाद अल-अकबर यानी सबसे बड़ा जिहाद कहा है.

२. जिहाद अल असग़र (छोटा जिहाद) -
जिहाद अल-असग़र का उद्देश्य समाज में फैली बुरायिओं के खिलाफ संघर्ष (जद्दो जेहद) करना होता है. जब समाज में ज़ुल्म बढ़ जाये, बुराई अच्छाई पर हावी होने लग जाये, अच्छाई बुराई के आगे हार मानने लग जाये, हक पर चलने वालो को ज़ुल्म व सितम सहन करना पड़े तो उसको रोकने की कोशिश (जद्दो जेहद) करना और उसके लिए बलिदान देना “जिहाद अल-असग़र” है। और इस जिहाद को अल्लाह ने जिहाद अल-अकबर से छोटा जिहाद कहा है.
यानी जिहाद अल-अकबर जो के खुद अपने अन्दर की बुरायिओं से लड़ना बड़ा जिहाद है और तलवार की लडाई छोटी लडाई है जिसे अल्लाह ने जिहाद अल-असगर कहा है.

» जिहाद की अलग अलग परिभाषाये -
1) “अर्थात अपने हक के लिए संघर्ष करना भी एक प्रकार का जिहाद है.”
2) “जिहाद का एक अर्थ अन्याय के खिलाफ लड़ना या संघर्ष करना भी है.”
3) “सत्य के लिए जान की बाज़ी लगाना भी जिहाद है”
4) “माता-पिता की सेवा भी एक प्रकार का जिहाद है”
5) “अपनी नफ़्स (इन्द्रियों) को काबू करना भी एक प्रकार का जिहाद है.
6) “अपने वक्तव्यों से अन्याय के खिलाफ लड़ाई भी एक जिहाद है.
7) “अपने लेखों से अन्याय के खिलाफ लड़ाई जिहाद बिल कलम है.
8) “एक जगह इल्म हासिल करने को भी जिहाद के बराबर कहा गया है”.

इस्लाम में जिहाद का बहुत महत्व है, इसे ईमान का एक हिस्सा कहा गया है. मीडिया एवं इस्लाम के दुश्मनों द्वारा आमजन जो अरबी भाषा और इस्लाम से अनभिज्ञ है, को जिहाद का गलत अर्थ बताकर जिहाद और इस्लाम को बहुत बदनाम किया गया है.
अगर आप इस्लाम या इस्लाम से सम्बन्ध किसी भी विषय को समझना चाहते हैं तो हमें चाहिए की हम अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) साहब की जीवनी के साथ कुरान का अनुवाद पढ़ें.
जिससे हमें परिपूर्ण ज्ञान मिल सके.
Jihaad, Jung, Zulm, Nafs, Khidmat,

Deen Me Har Naya Kaam Biddat Hai Aur Har Biddat Gumraahi ….

∗ Deen Me Har Naya Kaam Biddat Hai Aur Har Biddat Gumraahi ….

» Mehfum-e-Hadees: Hazrate Arbaz Bin Sariyaah (RaziAllahu Anhu) Se Riwayat Hai, Unhoney Kaha Ki Ek Din Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ne Hume Namaz Padhayi,
Phir Aap Humari Taraf Mutwajjah Huye Aur Ek Nasihat Farmayi,
Usey Sun Kar Humari Aankho Se Ansoo Jaari Ho Gaye Aur Dil Dahal Gaye,
Ek Shakhs Ne Kaha – “Ya RasoolAllah ! Yeh Nasihat Tou Aisi Hai Jaise Kisi Wida Hone Waley Ki Hoti Hai (Isliye) Hum Ko (Khaas) Wasiyat Farmayiye”
Rasool’Allah (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ne Farmaya -
“Main Tumhe Wasiyat Karta Hoon Ki Allah Se Darte Rehna Aur (Apne Huqmaran Ki) Sun’na Wa Maan’na, Agar (Sunane Wala) Ghulam Habshi Hi Kyun Na Ho,
Mere Baad Jo Tum Me Se Zinda Rahega, Wah Sakht Gumraahi Dekhega (Matlab Log Deen Me Ikhtelaaf Paida Karenge) Uss Waqt Tum Alllah Ki Kitaab Quraan, Meri Sunnat Wa Khulafa-e-Rashideen Ka Raasta Zaroor Pakadna!
Aur (Deen Ke Ander) Naye-Naye Kaamon (Ke Ijad Karne) Se Bachtey Rehna, Kyunki (Deen Me) Har Naya Kaam Biddat (Innovation) Hai Aur Har Biddat Gumraahi Hai, Aur Har Gumraahi Ka Thikana Jahannum Ki Aag Hai.
- (Abu Dawood, Tirmizi)

Allah Ta’ala Hum Tamaam Ko Zamane Jahiliyat Ke Fitno Se Bachney Ki Taufiq Ata Farmaye,
Har Kism Ki Biddato Se Humare Emaan Ki Salamti Ata Farmaye,
Jab Tak Hume Zinda Rakhe Islam Aur Emaan Par Zinda Rakhe,
Khatma Humara Emaan Par Ho!
!!! Wa Akhiru Dawana Anilhamdulillahe Rabbil A’lameen !!!

पवित्र कुरान में वर्णित मानव भ्रूण का रहस्स – प्रो. डॉ. कीथ मूर …

∗ पवित्र कुरान में वर्णित मानव भ्रूण का रहस्स – प्रो. डॉ. कीथ मूर …

Prof Keith Mooreअक्सर मैने कुछ तथाकथित “नास्तिक” भाईयों को कुरान और हदीस मे वर्णित कुछ बातों की ये कहकर हंसी उड़ाते देखा है कि इस्लाम मे कितनी अधिक बातें विज्ञान के विरुद्ध हैं …. हालांकि ये नास्तिक भाई कोई वैज्ञानिक नही हैं, जिनको किसी मामले पर विज्ञान का कोई नियम लगाना आता हो, इनको तो केवल इस्लाम का मजाक उडाने से मतलब है …. लेकिन जब कुरान और हदीस की इन्हीं “विज्ञान विरुद्ध” बातों पर किसी ज्ञानवान और सच्चाई के पक्षधर गैर मुस्लिम की नजर पड़ती है तब क्या होता है, आइए आज मैं आपको ये बताता हूँ – @[156344474474186:]

प्रो. डॉ. कीथ मूर जो कि वर्तमान समय मे विश्व मे एम्ब्रियोलॉजी अर्थात् भ्रूण शास्त्र के सबसे बड़े ज्ञाता माने जाते हैं, और टोरंटो विश्वविद्यालय (कनाडा) के डिपार्टमेण्ट आफ एनाटॉमी एण्ड सेल बॉयोलॉजी मे विभागाध्यक्ष रह चुके हैं, इन्होंने जब शोध कार्य के लिए कुरान की कुछ पवित्र आयतों का अध्ययन किया तो कुरान को ईश्वरीय ग्रंथ मानने पर मजबूर हो गए …

1980 मे प्रोफेसर कीथ मूर को सऊदी अरब की किंग अब्दुल अजीज युनिवर्सिटी मे शरीर विज्ञान और भ्रूण शास्त्र पर व्याख्यान देने के लिए निमंत्रित किया गया , जब प्रोफेसर मूर सऊदी मे थे तो उन्हे किंग अब्दुल अजीज युनिवर्सिटी की एम्ब्रियोलॉजी कमेटी मे भी शामिल किया गया
इसी समय प्रोफेसर मूर से कहा गया कि वे क़ुरआन में भ्रूण शास्त्र से संबंधित आयतों और भ्रूण शास्त्र से सम्बन्धित हदीसों पर भी अध्ययन कर के उनपर अपने विचार बताएं । प्रोफेसर मूर ने सातवीं शताब्दी ईसवी मे लिपिबद्ध की गई कुरान और हदीस की भ्रूण शास्त्र से सम्बन्धित आयतों आदि का अध्ययन किया तो आश्चर्यचकित रह गए….. क्योंकि उन्हें भ्रूण शास्त्र के संबंध में क़ुरआन में वर्णन ठीक आधुनिक खोज़ों के अनुरूप मिला……
कुछ आयतों के बारे में प्रोफेसर मूर ने कहा कि अभी वे इन आयतों के विषय मे ग़लत या सही का निर्णय नहीं सुना सकते क्यों कि अभी वे खुद इस बारे मे इतना नहीं जानते, इसमें क़ुरआन की सर्वप्रथम अवतरित हुई सूरह(96) “अल-अलक़” की आयत भी शामिल थी जिसका अनुवाद ये है-

“पढ़िए अपने रब्ब के नाम से, जिसने (दुनिया को) पैदा किया, और जिसने इंसान को जमे हुए खून से बनाया ॥”

इस आयत में अरबी भाषा में एक शब्द का उपयोग किया गया है “अलक़” …. इस शब्द का एक अर्थ होता है..”जमा हुआ रक्त” और इसी शब्द “अलक़” का एक और अर्थ होता है “जोंक जैसा”

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को उस समय तक भी यह मालूम नहीं था कि क्या माता के गर्भ में आरंभ में भ्रूण की सूरत जोंक की तरह होती है….। इसलिए डॉ. मूर उस समय तक कहने मे अक्षम थे कि ये आयत कितनी सही अथवा गलत है …. लेकिन कुरान की ये आयत पढ़कर, और पूर्व मे भ्रूण विज्ञान पर कुरान की आयतों के सटीक पाए जाने के कारण प्रोफेसर मूर ने इस आयत पर भी खोज करने की ठान ली….

प्रोफेसर डॉ. मूर ने अपने कई प्रयोग इस बारे में किए और गहन अध्ययन के पश्चात उन्होंने कहा कि -
हां पवित्र कुरान की आयत सत्य कहती है, और वास्तव मे ही माता के गर्भ में आरंभ में भ्रूण जोंक की आकृति में ही होता है …
यही नहीं, कुरान और हदीस का अध्ययन करने के बाद डॉ मूर ने भ्रूण शास्त्र के संबंध में अन्य 80 प्रश्नों के उत्तर भी दिए जो उन्होंने कुरान और हदीस में वर्णित वाक्य और आयतों से जाने थे, इन प्रश्नों के उत्तरो के बारे मे बताते हुए प्रोफेसर मूर ने कहा था कि “अगर आज से 30 वर्ष पहले मुझसे यह प्रश्न पूछे जाते तो मैं इनमें आधे भी उत्तर नहीं दे सकता था, क्यों कि तब तक विज्ञान ने इस क्षैत्र में इतनी प्रगति नहीं की थी…..”

क्या ये विस्मय की बात नही है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जिन प्रश्नों के उत्तर महज़ 30 साल पहले ही खोज पाया है, उन्ही प्रश्नो के उत्तर हमारे प्यारे नबी (सलल्लाहो अलैहि वसल्लम) हमे अब से कई सौ साल पहले दे गए हैं …

1981 में सऊदी मेडिकल कांफ्रेंस में डॉ. मूर ने घोषणा की कि उन्हें कुरान की भ्रूण शास्त्र की इन आयतों को देख कर इस बात का पूरा विश्वास हो गया है कि हज़रत मुहम्मद (सलल्लाहो अलैहि वसल्लम) ईश्वर के पैग़म्बर ही थे । क्योंकि सदियों पूर्व जब विज्ञान खुद भ्रूण अवस्था में हो इतनी सटीक और सच्ची बातें केवल ईश्वर ही कह सकता है …

बेशक आज से चौदह सौ साल पहले ऐसे अत्याधुनिक विज्ञान की बातों का ज्ञान किसी साधारण मनुष्य के पास हो ही नहीं सकता था, ऐसी बातें केवल और केवल ईश्वर की अनुकम्पा से ही कोई जान सकता था ….
डॉ. मूर ने अपनी पुस्तक के 1982 के संस्करण में सभी बातों को शामिल किया है, ये पुस्तक कई भाषाओं में उपलब्ध है और प्रथम वर्ष के चिकित्साशास्त्र के विद्यार्थियों को पढ़ाई जाती है …
इस पुस्तक “द डेवलपिन्ग ह्यूमन” को किसी एक व्यक्ति द्वारा चिकित्सा शास्त्र के क्षैत्र में लिखी गई श्रेष्ठ पुस्तक का अवार्ड भी मिल चुका है ….

वास्तव मे प्रोफेसर डॉ कीथ मूर की प्रसिद्धि मे एक बहुत बड़ी और बहुत महत्वपूर्ण भूमिका पवित्र कुरान और नबी (सलल्लाहो अलैहि वसल्लम) की ज्ञानपरक हदीसों की भी रही है … नास्तिकता का ढोल पीटने वाले अज्ञानी लोग भले ही कुरान की आयत और हदीसों को विज्ञान विरुद्ध कहकर लाख उनकी हंसी उड़ा लें, लेकिन जब भी कुरान और हदीस की इन्हीं बातों पर किसी ज्ञानवान व्यक्ति की नजर पड़ी है, तब तब विज्ञान के क्षेत्र मे नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं ….

बेशक ये निशानियां हैं, उस सर्वशक्तिमान ईश्वर की ओर से अक्ल वालों के लिए … ताकि वे अपने रब्ब को जान जाएं
Prof Keith Moore, Gynecology, Science and Islam

Tawheed Aur Shirk Ki Haqeeqat ….

∗ Tawheed Aur Shirk Ki Haqeeqat ….

★ TAWHEED -
Tawheed Ka Matlab Hai “Ek” Janna Aur “Ek” Man’na. Tawheed Se Muraad Allah Ko Uski Zaat, Sifaat, Uski Ibadat Aur Uske Huqooq Me Munfarid, Yekta Aur Bemisaal Maan’na.
Quraan-o-Hadees Ki Roushni Me Tawheed Ki 3 Kisme Hai.
∗1. Tawheed’e’ruboo’biat,
∗2. Tawheed Asma’wa’sifaat,
∗3. Tawheed Ulu’hiat Ya Tawheed Al’ebaada.

»1. Tawheed’e’ruboo’biat : Se Muraad “Allah Ko Kayenat Ki Har Cheez Ka Khaliq, Malik, Raziq Aur Tamaam Umoor Ki Tadbeer Karnewala Man’na.”
♥ Al-Quraan: (Aye Nabi) Aap (In Mushrikeen Se) Poocho Ke Tumko Aasman Aur Zameen Me Rizq Koun Pahunchata Hai, Ya Tumhare Kaano Aur Aankho Ka Maalik Koun Hai Aur Jaandar Ko Bejaan Se Aur Bejaan Ko Jaandar Se Koun Nikalta Hai, Aur Tamaam Kaamo Ka Intezaam Koun Karta Hai, Wo Fauran Kahenge Ke (Ye Sub Kaam Karne Wala) Allah Hai. Tou Unsey Poocho Ke Phir Tum(Allah Se) Darte Kyon Nahi. - (Surah Yunus(10): Ayat-31).
Iss Ayate Mubarak Se Pata Chala Mushrikeen-e-Makka Tawheed’e’ruboo’biat Ko Mantey They. – @[156344474474186:]

»2. Tawheed Ulu’hiat : Se Muraad Ye Hai Ke Allah Hee Haqeeqi Aur Akela Mabood Hai. Yahi Wo Tawheed Hai Jisko Mushrikeen-e-Makka Samet Har Daur Ke Mushrik Maan’ne Se Inkaar Karte Rahe. Namaz, Roza, Haj, Qurbaani, Dua, Nazr Wa Niaz… Sirf Allah Ke Liye Ho.”
♥ Al-Quraan: Aur (Aye Logon!) Tumhara Mabood Tou Bus Ek Hee Hai, Uske Alawa Koyi Ibadat Ke Layaq Nahi, Wo Bahut Raham Karnewala Aur Meharbaan Hai”. - (Suah Al-Baqrah(2), Ayat-163)

»3. Tawheed Asma’sifaat : Se Muraad Ye Hai Ke Allah Ke Unn Sab Asma Aur Sifaat Ka Iqraar Kiya Jaye Jin Se Allah Ne Quran Me Apne Aap Ko Mousuf Kiya Ya Nabi (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ne Aahadees Me Unka Zikr Kiya. Aur Allah Ke Asma Aur Sifat Me Kisi Ko Shareek Na Kiya Jaye.
Jaise Allah Rabbul Izzat Ne Farmaya:
♥ Al-Quraan: Aye Iblees Tujhe Usey Sajda Karne Se Kis Cheez Ne Roka Jisey Mai Ne Khad Apni Qudrat Se Paida Kiya. – (Surah Sad (38), Ayat-75)
♥ Al-Quraan: Rehmaan Arsh Par Qayim Hai. - (Surah Taha(20): Ayat-5),
♥ Al-Quraan: Allah Ne Musaa (Alaihay Salam) Se Qalaam Kiya. - (Surah An-Nisa(4), Ayat-164),
♥ Mehfum-e-Hadees: Allah Aasmaani Duniya Par Nuzool Farmata Hai. - (Muslim:758),
Allah Ke Asma Wa Sifaat Ko Haqeeqat Par Mahmoul Karte Huye Kisi Qisam Ki Taweel, Kaifiat, Tateel Aur Tamseel Ke Bagair Emaan Lana Tawheed Asma Wa Sifaat Hai.

• Deen-e-Isalm Ki Dawat Ka Sahi Tarika – Ye Hai Ke Dawat Ka Aagaz Tawheed Se Kiya Jaye. Logo Par Tawheed Aur Shirk Ke Fark Ko Wazey Kiya Jaye.
♥ Mehfum-e-Hadees: Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya “Pahli Cheez Jis Ki Taraf Logon Ko Dawat Di Jaye Wo Kalma-e-Shahadat Hona Chahiye.” Yaani Ye Ke Log Allah Hi Ko Ilaah Waahid Maaney. - (Bukhari:1395, Muslim:19)

★ SHIRK -
Shirk Ka Logvi Maani Hota Hai Sharik Karna, Aur Sharai Aetbar Se Shareek Ka Matlab Hota Hai, Ke Allah Ta’ala Ki “Zaat” Ya Phir “Sifat” Me Kisi Ko Sharik Karna.
♥ Mehfum-e-Hadees: “Subse Badaa Gunaah Ye Hai Ke Tu Allah Ke Saat Kisi Ko Shareek Karey Halan Ke Uss(Allah)ne Tujhe Paida Kiya.” - (Bukhari 4477, Muslim 86.)
♥ Al-Quraan: Allah Ke Saath Shirk Na Karna. Beshaq Shirk Badaa Bhari Zulm Hai. - (Surah Luqman(31): Ayat-13)
Lihaza Shirk Se Bachey Aur Tawheed Parast Baney.

• Shirk Ke Nuksaan -
Shirk Jaise Kabira Gunaah Ke Anzam Ke Barey Me Quraan-e-Kareem Me Farmay Ki:
♥ Al-Quraan: “Jisney Allah Ke Sath Kisi Ko Shareek Tehraya, Allah Ne Uspar Jannat Haraam Kar Diya. Uska Thikhana Jahannum Hai Aur Zalimo Ka Koyi Madadgar Na Hoga.” - (Surah Al-Maida(5): Ayat-72)
♥ Mehfum-e-Hadees: “Jo Koyi Iss Haal Me Marey Ke Wo Allah Ke Siwa Kisi Aur Ko Pukaarta Ho Tou Wo Jahannum Me Dakhil Hoga.” - (Bukhari 4497, Muslim 92).

• Shirk Karne Wale Ko Uske Nek Aamal Faida Nahi Denge -
Nek Aamal (Jaise Sadqa, Khairat, Namaz, Roza,…) Aqeede Shirk Ki Moujoodgi Me Bekaar Ho Jate Hai Aur Allah Ke Yaha Qabil Qabool Nahi Rehte. Chunache Allah Ne 18 Jaleel-ul-Qadar Ambiya(Alaihay Salam) Ka Naam Leney Ke Baad Farmaya:
♥ Al-Quraan: “Aur Agar Unn Logon Ne Shirk Kiya Hota Tou Unkey Bhi Sub Aamal Zaya Ho Jatey”.- (Surah Al-An’am(6): Ayat-88)

• La’ilaaha’illAllah Muhammadur RasoolAllah Padh Ne Wala Bhi Mushrik Ho Sakta Hai ?
♥ Mehfum-e-Hadees: Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya: “Tum Yaqeenan Apne Se Pehli Ummato Ki Pairwi Karoge, Aur Pehli Ummato Se Aapki Muraad Yahood Wa Nasara Hai”. - (Bukhari.3456, Muslim.2669)
“Kya Tu Ne Unhe Nahi Dekha Jinhe Kitab Ka Kuch Hissa Mila Hai Ke Wo Boot Aur Tagoot Par Emaan Laate Hai”. - (Surah An-Nisa(4): Ayat-51)
♥ Mehfum-e-Hadees: Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Kaha: “Qayamat Uss Waqt Tak Qayam Na Hogi Jab Tak Meri Ummat Ki Ek Jamaat Mushriko Se Na Jaa Miley Aur Meri Ummat Ke Bahut Se Log Boot Parasti Na Karey”. – (Tirmizi 2219)

• Jab Kisi Qabar Ki Ibadat Ho Tou Usko Boot-Parasti Kaha Jayega
♥ Mehfum-e-Hadees: Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya:
“Aye Allah! Meri Qabar Ko Boot Na Banana Jiski Ibadat Ki Jayey. Allah Ka Uss Qaum Par Sakht Gazab Nazil Hota Hai Jo Apne Nabiyo Ki Qabaro Ko Ibadat-Gaah Bana Letey Hai”. - (Muwatta Imaam Malik 9:88)

♥ Mehfum-e-Hadees: Maa Aisha (RaziAllahu Anhu) Farmati Hai Ke Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Aakhri Waqt Me Farmaya:
“Yahood Wa Nasara Par Allah Ki Laanat Ho, Unhone Apne Ambiya Ki Qabro Ko SajdaGaah Bana Liya”. Agar Iss Baat Ka Khouf Na Hota Ke (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Qabar Ko Bhi Sajda Gaah Bana Liya Jayega Tou Aap Ko Band Hijrey Me Dafan Na Kiya Jata Aur Aap Ki Bhi Qabar Khuli Hoti. - (Bukhari.1390, Muslim.529)

Muashre Me Shirk Failne Ki Ek Aham Waja Ye Hai Ke Shaitan Awliya Allah Se Muhabbat Ko Aad Banakar Guloo Karwata Hai.
Qaum Nooh Ko Dekhiye -
♥ Mehfum-e-Hadees: “Wadd, Suwa, Ghutaif, Yauq, Nasr Noah Ki Qaum Ke Swaleheen The Jin Ki Logon Ne Baadme Parashtish Shuru Kardi”. - (Bukhari 6:442)
♥ Al-Quraan: “Aur Unhone Kaha Ke Tum Apne Maboodo Ko Hargiz Na Cho’dna Aur Wadd, Suwa, Ghutaif, Yauq, Nasr Ko Kabhi Na Cho’dna”. - (Surah Nooh(71): Ayat-23)

• Mushrikeen Makka Gairullaah Ki Ebadat Kyon Kiya Karte??
Allah Iska Jawab Quraan Me Deta Hai:
“Hum(Mushrik) Unki Ibadat Sirf Isliye Karte Hai Ke Wo Allah Ki Nazdeeki Ke Martabe Tak Humari Rasayi Karade”. - (Quran Sura Zumar(39): Ayat-3)
Yaani Mushrikeen-e-Makka Gairullaah Ko Apna Sifarishi Aur Allah Ke Qareeb Ka Zariya Samajhte They.
♥ Al-Quraan: “Wo Kehte Hai Ke Ye Allah Ke Paas Humare Sifarishi Hai”. - (Surah Yunus(10): Ayat-18)
♥ Mehfum-e-Hadees: Aap (Sallallahu Alaihay Wasallam) Farmate Hai – “Ye Aise Log Hai Jab Inme Se Koi Nek Banda Mar Jata Tou Uski Qabar Par Sajda Gaah Bana Dete Hai Aur Tasveere Bana Dete Hai. Ye Allah Ke Nazdeek Badtareen Maqlooq Hai”. - (Bukhari.427, Muslim.528)
Kya Aaj Nek Logon Ki Qabro Ko Aisa He Nahi Karte? Isiliye Quraan Mey Allah Farmata Hai,
♥ Al-Quraan: “Beshaq Tum Allah Ke Siwa Jin Ko Pukaarte Ho Wo Tum Jaise Bandey Hee Hai”. - (Surah Al’aaraf(7): Ayat-194)
Jin Awlia Allah Ko Mushrikeen Pukarte They Unke Barey Me Bataya:
♥ Al-Quraan: “Murde Hai, Zinda Nahi! Unko Ye Bhi Maloom Nahi Ke Ye Kab Uthaye Jayenge”. - (Surah An-Nahl(16): Ayat-21)
♥ Al-Quraan: “Aur Jab (Qayamat Ke Din) Log Jama Kiye Jayenge Wo Unkey Dushman Ho Jayenge Aur Unki Ibadat Ka Inkar Kar Denge. – (Al-Ahqaf(46): Ayat-6)
Allah Ki Zaat Me Shirk Ka Mafhoom Ye Hai Ki -
♥ Al-Quraan: “Na Us’sey Koyi Paida Huwa Naahi Wo Kisi Se Paida Huwa” - (Surah Ikhlas(112): Ayat-3)
“Yaqeenan Wo Kafir Hai Jo Kehte Hai Ke Isa Ibne Mariyam Hee Allah Hai”. - (Surah Al-Ma’ida(5): Ayat-72)
Aur Unhone Uskey Baaz Bando Ko Uska Juzz Tehraa Diya. Beshak(Aisa) Insan Khullam Khulla Na Shukra Hai”. - (Surah Az-Zukhruf(43): Ayat-15)

» Sabaq : Lihaza Hum Sab Par Lazim Hai Ke Deen Ka Buniyadi Aur Sahee Aqeeda Quraan Aur Hadees Ke Roshni Me Janey Aur Usi Paigam-e-Haq Ki Pairwi Kare, Kitabo Sunnat Ke Sahibe Ilm Se Apni Aur Auro Ki Islaah Karte Rahe, Saheee Ilm-e-Deen Hasil Karey Taaki Har Kism Ki Gumrahi Se Khud Bhi Bach Sakey Aur Auro Ko Bhi Bachane Ki Koshish Ki Jaye.. !!! Wa Akhiru Dawana Anilhamdulillahe Rabbil A’lameen !!!
Allah Taala Hume Parhne Sun’ne Se Jyada Amal Ki Taufiq De.. Ameen !!!

EmaanWalon Ko Tou Allah Hi Se Zyada Muhabbat Hoti Hai ….

∗ EmaanWalon Ko Tou Allah Hi Se Zyada Muhabbat Hoti Hai ….

♥ Al-Quraan : !!! Bismillah-Hirrahman-Nirrahim !!!
“Aur Aisey Log Bhi Hai Jinhoney Allah Ke Siwa Aur Shareek Bana Rakhey Hai Jinsey Aisee Mohabbat Rakhtey Hain Jaisey Ki Allah Se Rakhni Chahiye Aur EmaanWalon Ko Tou Allah Hi Se Zyada Mohabbat Hoti Hai Aur Kaash Zaalim Log Jo Baat Azaab Ke Waqt Dekhngey (Usey) Abhi Dekh Letey Ki Sab Quwwat Allah Hi Ke Liye Hai Aur Allah Sakht Azaab Dene Wala Hai”.
- (Surah Al-Baqara (2) , Aayat-165)

Kisi Aurat Ke Paas Nikah Ka Paighaam Na Bheje Agar …

∗ Kisi Aurat Ke Paas Nikah Ka Paighaam Na Bheje Agar …

» Mehfum-e-Hadees : Ibn Umar(RaziAllahu Anhu) Se Riwayat Hai Ki RasoolAllah(Sallallahu Alaihi Wasallam) Ne Farmaya -
“Koi Shakhs Kisi Aurat Ke Paas Nikah Ka Paighaam Na Bheje Agar Uss Shakhs Ka Bhai Uss Hi Aurat Ke Paas Pehle Se Hi Shaadi Ka Paighaam Bhej Chuka Ho.”
- (Sunan Ibn Majah: Hadees No.1868)

» Takhreej: Agar Ye Maaloom Ho Jaaye Ki Uss Aurat Ne Abhi Tak Pehla Waala Paighaam Qubool Nahi Kiya Hai Aur Na Hi Wo Uss Paighaam Ki Taraf Koi Khaas Jhukaao Rakhti Hai Tou Doosra Shakhs Paighaam Bhej Sakta Hai. Aisa Hone Par Uss Aurat Ko Un Dono Me Se Apne Liye Zyada Behtar Shauhar Talaash Karne Ka Mauka Mil Jaayega Aur Waaledain Bhi Apni Beti Ke Liye Is Maamle Me Zyada Behtar Soch Paayenge.