अमानत का वापस करना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: “अल्लाह तआला तुम को हुक्म देता है के जिन की अमानतें हैं उनको लौटा

सजद-ए-तिलावत अदा करना

हज़रत इब्ने उमर (र.अ) फ़र्माते हैं “हुजूर (ﷺ) हमारे दर्मियान सजदे वाली सूरह की तिलावत फ़र्माते, तो सजदा करते और हम लोग

बीवी को उस का महर देना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: “तुम लोग अपनी बीवियों को उन का महर खुश दिली से दे दिया करो,

सूद से बचना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: “ऐ ईमान वालो! तुम कई गुना बढ़ा कर सूद मत खाया करो (क्योंकि सूद

सज्द-ए-सहु करना

रसुलअल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: “जब तुम में से किसी को (नमाज़ में) भूल चूक हो जाए, तो सज्द-ए-सह्व कर ले।”

मय्यित का कर्ज अदा करना

हजरत अली (र.अ) फ़र्माते हैं के रसुलल्लाह (ﷺ) ने कर्ज को वसिय्यत से पहले अदा करवाया, हालाँकि तुम लोग (कुरआन

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