दुनिया पर मुतमइन नहीं होना चाहिये

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है : “जिन लोगों को हमारे पास आने की उम्मीद नहीं है और वह दुनिया की जिन्दगी पर राजी हो गए और उस पर वह मुतमइन हो बैठे और हमारी... [Read More]

हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “हर शख्स मौत के बाद अफसोस करेगा, सहाबा ने अर्ज किया: या रसूलअल्लाह (ﷺ) ! किस बात का अफसोस करेगा? आप (ﷺ) ने फ़र्माया : अगर नेक है, तो जियादा नेकी... [Read More]

पेट से ज्यादा बुरा कोई बर्तन नहीं

“आदमी (इंसान) ने पेट से ज्यादा बुरा कोई बर्तन नहीं भरा। इब्ने आदम को चंद लुक्मे काफी है जो उसकी पीठ को सीधा रखे। लेकिन अगर ज्यादा खाना ज़रूरी हो तो तिहाई पेट खाने के... [Read More]

अस्तगफार कि दुआ (जिसने ये दुआ की उसके सारे गुनाह मुआफ कर दिए गए)

۞ हदीस: ज़ैद (र.अ) से रिवायत है के, रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: जिसने ये कहा तो उसके गुनाह मुआफ कर दिए जायेंगे चाहे वो मैदाने जंग से ही क्यों न भाग गया हो: “अस्तग्फिरुल्लाह अल... [Read More]

सामने वाले की बात पूरी तवज्जोह से सुनना

जब आप (ﷺ) से कोई मुलाकात करता और गुफ्तगू करता, तो आप (ﷺ) उस की तरफ से तवज्जोह न हटाते, यहाँ तक के वह आप से रुख न हटा लेता। 📕 इब्ने माजा: ३७१६, अन... [Read More]

Insh Allah | इंशाअल्लाह का मतलब हिंदी में

insha Allah meaning in hindi | इंशाअल्लाह का मतलब होता है: ‘अगर अल्लाह ने चाहा’ तो। जब कोई शख्स भविष्य में कोई कार्य करना चाहता है, या उसका इरादा करता है...

अहले जन्नत का इनाम : उस दिन बहुत से चेहरे तर व ताजा होंगे

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता :  “उस दिन बहुत से चेहरे तर व ताजा होंगे, अपने (नेक) आमाल की वजह से खुश होंगे, ऊँचे ऊँचे बागों में होंगे। वह उन बागों में कोई बेहूदा बात... [Read More]

मेहमान का इकराम करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :  “जब कभी भी कोई मुसलमान अपने मुसलमान भाई से मुलाकात के लिये जाए और मेजबान मेहमान का एजाज व इकराम करने की गर्ज से मेहमान को तकिया पेश करे तो... [Read More]

मौत और माल की कमी से घबराना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “आदमी दो चीज़ों को नापसंद करता है, (हालांकि दोनों उस के लिए खैर है) एक मौत को, हालांकि मौत फ़ितनों से बचाव है, दूसरे माल की कमी को, हालांकि जितना... [Read More]

मोमिनों का पुल सिरात पर गुजर

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : “पुलसिरात पर मोमिनीन “रबि सल्लिम सल्लिम” ऐ रब! सलामती अता फ़र्मा, कहते हुए गुजरेंगे।” 📕 तिर्मिज़ी : २४३२, अन मुगीरा बिन शोअबा (र.अ)