जून 21, 2024

आज का मदरसा

सिर्फ पांच मिनिट का मदरसा क़ुरआन व सुन्नत की रौशनी में

१. इस्लामी तारीख

शराब की हुरमत का हुक्म

शराब की हुरमत का हुक्म

अल्लाह तआला ने मुसलमानों को इस्लामी माहौल में जिन्दगी गुजारने और अहकामे इलाही पर अमल करने के लिये मदीने का साजगार माहौल अता किया, ताके जमान-ए-जाहिलियत की तमाम रस्मों और बुरी आदतों को खत्म कर के इस्लामी मुआशरे का अमली नमूना दुनिया के सामने आ जाए, उन की सब से बुरी आदत शराब नोशी थी, उस की मुहब्बत अरबों की घुट्टी में पड़ी हुई थी,

चुनान्चे शराब और जूए के बारे में पहला हुक्म सन ३ हिजरी में नाजिल हुआ के उस में भलाई के मुकाबले में बुराई और गुनाह जियादा है, हत्ता के अकल व होश तक को खत्म कर देती है, चुनान्चे बाज लोगों ने उसे छोड़ दिया,

फिर दूसरा हुक्म नाजिल हुआ के शराब और नशे की हालत में नमाज के करीब मत जाओ, चुनान्चे सहाब-ए-किराम ने उसको तर्क कर दिया के जब नशे की हालत में नमाज नहीं पढ़ सकते तो उस से बचना चाहिये,

फिर शराब के मुतअल्लिक सूर-ए-माइदा की तीसरी आयत नाजिल हुई, उस में क़तई तौर पर शराब को हराम करार दे दिया गया,

सहाब-ए-किराम के ईमानी जजबे का हाल यह था के हुक्म मिलते ही शराब के बरतन और मटके तोड़ डाले यहाँ तक के मदीना की गलियों और सडकों पर शराब बहती नजर आ रही थी।

To be Continued…

📕 इस्लामी तारीख

२. अल्लाह की कुदरत

नींद का आना

जब इन्सान दिन भर काम कर के थक जाता है, तो अल्लाह तआला उस की थकान दूर करने के लिये उस पर नींद तारी कर देता है, यह नींद उस के फिक्र व ग्रम को दूर कर के ऐसा सुकून व राहत का जरिया बनती है के दुनिया की कोई चीज उस का बदल नहीं बन सकती, फिर अल्लाह तआला ने यह नेअमत अमीर व ग़रीब, आलिम व जाहिल, बादशाह व फकीर हर एक को यकसाँ अता फरमा रखी है। और इस के लिये रात का वक़्त मुतअय्यन कर दिया है।

अगर इन्सान को नींद न आए तो उस का दिमागी तवाजुन बिगड़ जाता है और होश व हवास खत्म हो जाते हैं, लोगों के लिये रात का वक्त मुतअय्यन करना और एक साथ नींद का आना अल्लाह की बड़ी कुदरत है

📕 अल्लाह की कुदरत

३. हुजूर (ﷺ) का मुअजिजा

कंधे का अच्छा हो जाना

एक गज़वे में हजरत खुबैब बिन यसाफ़ (र.अ) को कंधे और गर्दन के बीच में तलवार लगी, जिस की वजह से वह हिस्सा लटक पड़ा, वह आप के पास आए तो हुजूर (ﷺ) ने उस हिस्से पर अपना लुआबे मुबारक (थूक) लगाया और फिर उस को जोड़ा, तो वह चिपक कर ठीक हो गया।

📕 बैहक़ी फी दलाइलिन्नाव्या : २४२५

४. एक फ़र्ज़ अमल के बारे में

5. एक सुन्नत अमल के बारे में

6. एक अहेम अमल की फजीलत

7. एक गुनाह के बारे में

8. दुनिया के बारे में

दुनियावी ज़िन्दगी की हक़ीक़त

क़ुरान में अल्लाह तआला फ़रमाता है –

“तूम खूब जान लो के दुनियावी जिन्दगी (बचपन में) खेल कूद और (जवानी में) ज़ेब व ज़ीनत और बाहम एक दूसरे पर फ़ख्र करना और (बुढ़ापे में) माल व औलाद में एक दूसरे से अपने को ज़्यादा बताना है।”

📕 सूर-ए-हदीद 57:20

9. आख़िरत के बारे में

जन्नत के फल और दरख्तों का साया

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है:

“मुत्तकियों से (तक़वा वालो से) जिस जन्नत का वादा किया गया है, उसकी कैफियत यह है के उसके नीचे नहरें जारी होंगी और उसका फल और साया हमेशा रहेगा।”

📕 सूरह रअद : ३५

10. तिब्बे नबवी से इलाज

11. क़ुरआन व सुन्नत की नसीहत

अहले जहन्नम पर दर्दनाक अजाब

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“बेशक जक्कूम का दरख्त बड़े मुजरिम का खाना होगा, जो तेल की तलछट जैसा होगा,
वह पेट में तेज़ गर्म पानी की तरह खौलता होगा (कहा जाएगा)
उस गुनहगार को पकड़ लो और घसीटते हुए दोजख के बीच में ले जाओ,
फिर उसके सर पर तकलीफ देने वाला खौलता हुआ पानी डालो,
(फिर कहा जाएगा) अज़ाब का मज़ा चख ! तू अपने आप को बड़ी इज्जत व शान वाला समझता था, यही वह अजाब है जिसके बारे में तुम शक किया करते थे।”

📕 सूरह दुखान : ४३ ता ५०