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फर्ज अमल

फ़र्ज़ अमल का हुक्म, फ़र्ज़ आमाल की अहमियत और फ़ज़ीलत कुरान और हदीस की रौशनी में।

अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म देना

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है:"आप अपने घर वालों को नमाज़ का हुक्म करते रहो और खुद भी नमाज़ के पाबन्द रहिये, हम आपसे रोजी तलब नहीं करते, रोजी तो आप को हम देंगे आर अच्छा अंजाम तो परहेजगारों का है।"
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दाढ़ी रखने की अहमियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"मूंछों को कतरवाओ और दाढ़ी को बढ़ाओ।"वजाहत: दाढी रखना शरीअते इस्लाम में वाजिब और इस्लामी शिआर में से है इस लिये तमाम मुसलमानों के लिये उस पर अमल करना इन्तेहाई जरूरी है।
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अच्छी तरह मुकम्मल वुजू कर के नमाज़ के लिये मस्जिद जाना

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"तुम में से जो शख्स अच्छी तरह मुकम्मल वुजू करता है, फिर नमाज ही के इरादे से मस्जिद में आता है, तो अल्लाह तआला उस बंदे से ऐसे खुश होता हैं जैसे के किसी दूर गए हुए रिश्तेदार के अचानक आने से उसके घर वाले खुश होते…
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गुस्ल में पूरे बदन पर पानी बहाना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"(जिस्म) के हर बाल के नीचे नापाकी होती है, लिहाजा तुम बालों को धोओ और बदन को अच्छी तरह साफ करो।"खुलासा: गुस्ल में पूरे बदन पर पानी पहुँचाना फर्ज है।
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आप (ﷺ) की आखरी वसिय्यत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने आखरी वसिय्यत यह इरशाद फ़रमाई :"नमाजों और अपने ग़ुलामों के बारे में अल्लाह तआला से डरो।"( यानी नमाज को पाबन्दी से पढ़ते रहा करो और गुलामों (नौकरों) के हुकूक अदा करो।)
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हज की फरज़ियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :“ऐ लोगो ! तुम पर हज फर्ज़ कर दिया गया है, लिहाजा उस को अदा करो।”
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नेकियों का हुक्म देना और बुराइयों से रोकना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :"कसम है उस जात की जिस के कब्जे में मेरी जान है तुम जरूर बिज जरूर भलाइयों का हुक्म करो और बुराइयों से रोको; वरना करीब है के अल्लाह तआला गुनहगारों के साथ तुम सब पर अपना अजाब भेज दे, और उस वक्त तुम अल्लाह तआला से…
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नमाज़ छोड़ने का नुकसान

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :"जिस शख्स की एक नमाज़ भी फौत हो गई वह ऐसा है के गोया उस के घर के लोग और माल व दौलत सब छीन लिया गया।"
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नमाज़ के छोड़ने पर वईद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : "नमाज़ का छोड़ना आदमी को कुफ्र से मिला देता है।"एक दूसरी हदीस में आप (ﷺ) ने फ़र्माया: "ईमान और कुफ्र के दरमियान फर्क करनेवाली चीज़ नमाज़ है।"
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नमाज़ों का सही होना जरूरी है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :“कयामत के दिन सब से पहले नमाज़ का हिसाब होगा, अगर नमाज़ अच्छी हुई तो बाकी आमाल भी अच्छे होंगे और अगर नमाज खराब हुई तो बाकी आमाल भी खराब होंगे।”
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इल्म हासिल करना एक फ़र्ज़

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :“इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फर्ज है।”फायदा : हर मुसलमान पर इल्मे दीन का इतना हासिल करना फर्ज है के जिस से हलाल व हराम में तमीज़ कर ले और दीन की सही समझ बूझ, इबादात के तरीके और सही मसाइल की मालमात हो…
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अल्लाह तआला सबको दोबारा ज़िन्दा करेगा

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: "अल्लाह वह है, जिसने तुम को पैदा किया और वही तुम्हें रोजी देता है, फिर (वक्त आने पर) वही तुम को मौत देगा और फिर तुम को वही दोबारा जिन्दा करेगा।"वजाहत: मरने के बाद अल्लाह तआला दोबारा जिन्दा करेंगा,…
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वालिदैन के साथ एहसान का मामला करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:"तुम्हारे रब (अल्लाह) ने फैसला कर दिया है उसके के अलावा किसी और की इबादत न करो और वालिदैन के साथ एहसान का मामला करो।"खुलासा: माँ बाप की खिदमत करना और उनके साथ अच्छा बरताव करना फर्ज है।
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