फर्ज अमल के बारे में | Ek Farz ke Baare mein

मय्यित का कर्ज अदा करना

हजरत अली (र.अ) फ़र्माते हैं के: रसुलल्लाह (ﷺ) ने कर्ज को वसिय्यत से पहले अदा करवाया, हालाँकि तुम लोग (कुरआन

फर्ज अमल के बारे में | Ek Farz ke Baare mein

बीमार की नमाज़

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “नमाज़ खड़े होकर अदा करो: अगर ताक़त न हो तो बैठ कर अदा करो, और

फर्ज अमल के बारे में | Ek Farz ke Baare mein

हज किन लोगों पर फर्ज है ?

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: “अल्लाह के वास्ते उन लोगों के जिम्मे बैतुल्लाह का हज करना (फर्ज) है, जो

फर्ज अमल के बारे में | Ek Farz ke Baare mein

शौहर का हक अदा करना

हज़रत आयशा रज़ि० ने रसूलुल्लाह (ﷺ) से पूछा के औरत पर तमाम लोगों में से किसका हक़ ज़्यादा है? तो

फर्ज अमल के बारे में | Ek Farz ke Baare mein

हज की फरज़ियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : “ऐ लोगो ! तुम पर हज फर्ज़ कर दिया गया है, लिहाजा उस को अदा

फर्ज अमल के बारे में | Ek Farz ke Baare mein

अस्र की नमाज़ की फज़ीलत

एक मर्तबा रसूलुल्लाह (ﷺ) ने अस्र की नमाज़ पढ़ाई और फिर लोगों की तरफ मुतवज्जेह हो कर फ़रमाया – “यह

Taqdeer par iman lana

तक़दीर पर ईमान लाना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : “हर चीज़ तकदीर से है, यहाँ तक के आदमी का नाकारा और ना काबिल और

कर्ज़ अदा करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “क़र्ज़ की अदायगी पर ताकत रखने के बावजूद टाल मटोल करना जुल्म है।”

दाढ़ी रखने की अहमियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “मूंछों को कतरवाओ और दाढ़ी को बढ़ाओ।” वजाहत: दाढी रखना शरीअते इस्लाम में वाजिब और

आप (ﷺ) की आखरी वसिय्यत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने आखरी वसिय्यत यह इरशाद फ़रमाई : “नमाजों और अपने ग़ुलामों के बारे में अल्लाह तआला से डरो।”

नमाज़ के छोड़ने पर वईद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : “नमाज़ का छोड़ना आदमी को कुफ्र से मिला देता है।” [मुस्लिम : २४६] एक दूसरी

इल्म हासिल करना एक फ़र्ज़

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फर्ज है।” फायदा : हर मुसलमान पर इल्मे दीन

जमात से नमाज़ अदा करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: “जिस ने तक्बीरे ऊला के साथ चालीस दिन तक अल्लाह की रज़ा के लिए जमात के

ज़कात अदा करना

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (र.अ) इर्शाद फ़र्माते हैं के हमें नमाज़ कायम करने का और जकात अदा करने का हुक्म

--> Ummate Nabi Android Mobile App