मेहमान का अच्छे अलफाज़ से इस्तिकबाल करना

हज़रत इब्ने अब्बास फ़रमाते हैं के,

जब रसूलुल्लाह (ﷺ) की ख़िदमत में क़बील-ए-बनू अबदुल कैस के लोग आए,
तो रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया “खुशामदीद” (यानी आपका आना मुबारक हो।)

📕 बुखारी: ५३

फायदा: जब कोई मेहमान आए, तो खुशामदीद, मरहबाया इस तरह के अल्फ़ाज़ कहना सुन्नत है।

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