जहन्नम का जोश कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : "जब जहन्नम (क़यामत के झुटलाने वालों) को दूर से देखेगी, तो वह लोग (दूर ही से) उस का जोश व खरोश सुनेंगे और जब वह दोज़ख़ की किसी तंग जगह में हाथ पाँव जकड़ कर डाल दिये जाएंगे, तो वहाँ मौत ही मौत पुकारेंगे। (जैसा के मुसीबत में लोग मौत की तमन्ना करते हैं)।" 📕 सूर-ए-फुरकान : १२ ता १३
हदीस: फज़र और असर पाबन्दी से अदा करना... हदीस: फज़र और असर पाबन्दी से अदा करना। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : "हरगिज़ वह आदमी जहन्नम में दाखिल नहीं हो सकता, जो सूरज निकलने से पहले फज़्र की नमाज और सूरज गुरूब होने से पहले अस्र की नमाज़ पढ़े।" 📕 मुस्लिम : १४३६
दोज़ख़ में बिच्छू के डसने का असर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : "दोजख में खच्चरों की तरह बिच्छू हैं, एक बार जब उनमें से एक बिच्छू डसेगा, तो दोजखी चालीस साल तक उस की जलन महसूस करेगा।" 📕 मुस्नदे अहमद : १७२६०
नर्म मिज़ाजी इख्तियार करना लोगों के साथ नर्मी से पेश आने की फ़ज़ीलत रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : "क्या मैं तुम को ऐसे शख्स की खबर न दूँ जो दोजख के लिये हराम है और दोज़ख की आग उस पर हराम है? हर ऐसे शख्स पर जो तेज़ मिजाज न हो बल्के नर्म हो, लोगों से क़रीब होने वाला हो, नर्म मिजाज हो।" 📕 तिर्मिज़ी : २४८८, अन इब्ने मसऊद (र.अ)
अहले जहन्नम पर दर्दनाक अजाब कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : “बेशक जक्कूम का दरख्त बड़े मुजरिम का खाना होगा, जो तेल की तलछट जैसा होगा, वह पेट में तेज़ गर्म पानी की तरह खौलता होगा (कहा जाएगा) उस गुनहगार को पकड़ लो और घसीटते हुए दोजख के बीच में ले जाओ,फिर उसके सर पर तकलीफ देने वाला खौलता हुआ पानी डालो,(फिर कहा जाएगा) अज़ाब का मज़ा चख ! तू अपने आप को बड़ी इज्जत व शान वाला समझता था, यही वह अजाब है जिसके बारे में तुम शक किया करते थे।” 📕 सूरह दुखान : ४३ ता ५०
ईद के बाद शव्वाल के 6 रोजे की फ़ज़ीलत रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: “जो शख्स रमजान के रोजों को रखने के बाद शव्वाल के छ: (६) रोजे भी रखे, तो वह पूरे साल के रोजे रखने के बराबर है। 📕 मुस्लिम : २७५८ फायदा: जो शख्स शव्वाल के पूरे महीने में कभी भी इन 6 रोजों को रखेगा तो वह इस फजीलत का मुस्तहिक होगा।
अज़ाबे कब्र से बचने की दुआ रसूलुल्लाह (ﷺ) यह दुआ कसरत से फ़रमाते थे: तर्जमा: ऐ अल्लाह ! मैं अज़ाबे कब्र, अज़ाबे दोजख, ज़िंदगी और मौत के फितने और दज्जाल के फितने से तेरी पनाह चाहता हूँ। 📕 बुखारी: १३७७. अन अबी हुरैरह रज़ि०
क़यामत के दिन इन्सान के आज़ा की गवाही कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है: "जिस दिन अल्लाह के दुश्मन (यानी कुफ्फार) दोज़ख की तरफ जमा (करने के मौकफ में) लाएंगे,फिर वह रोके जाएँगे (ताके बाकी आजाएँ) यहाँ तक के जब वह उसके करीब आजाएँगे तो उनके कान, उनकी आँखें और उनकी खाल, उनके खिलाफ उन के किये हुए आमाल की गवाही देंगी।” 📕 सूरह फुसिलत: १९ ता २०
दुनिया चाहने वालों का अन्जाम कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “जो कोई दुनिया ही चाहता है, तो हम उस को दुनिया में जितना चाहते हैं, जल्द देते हैं फिर हम उस के लिए दोजख मुकर्रर कर देते हैं, जिस में (ऐसे लोग कयामत के दिन) जिल्लत व रुसवाई के साथ ढकेल दिए जाएंगे।” 📕 सूर-ए-बनी इसराईलः १८
कुरआन की कोई सूरत पढ कर सोना रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: “जब मुसलमान बिस्तर पर (सोते वक्त) कुरआन की कोई भी सूरत पढ लेता है, तो अल्लाह तआला उस की हिफाजत के लिए एक फरिश्ता मुकर्रर फरमा देता है और उसके जागने तक कोई तकलीफ़ देह चीज उसके करीब भी नहीं आती।” 📕 तिर्मिज़ी: ३४०७ फायदा: जो शख्स शव्वाल के पूरे महीने में कभी भी इन 6 रोजों को रखेगा तो वह इस फजीलत का मुस्तहिक होगा।
इंसाफ न करने का वबाल रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : "जो शख्स मेरी उम्मत की किसी छोटी या बड़ी जमात का जिम्मेदार बने फिर उनके दर्मियान अदल व इन्साफ न करे तो अल्लाह तआला उसको औंधे मुंह जहन्नम में डाल देगा।" 📕 तबरानी कबीर : १६९११
जहन्नमी हथौड़े रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : "अगर जहन्नम के लोहे के हथौड़े से पहाड़ को मारा जाए, तो वह रेजा रेजा हो जाएगा, फिर वह पहाड़ दोबारा अपनी असली हालत पर लौट आएगा।" 📕 मुस्नदे अहमद : ११३७७
क़यामत के दिन खुश नसीब इन्सान रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: "कयामत के दिन लोगों में से वह खुश नसीब मेरी शफाअत का मुस्तहिक होगा, जिसने सच्चे दिल से "कलिम-ए-तय्यिबा" “ला इलाहा इलल्लाहु” पढ़ा होगा।" 📕 बुखारी : १९
नेक बंदों की नेअमतों का बयान कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : "परहेज़गार लोग बागों और ऐश व राहत में होंगे। उन को जो चीजें ऐश व आराम की उन के रब ने अता की होगी उस को खा रहे होंगे और उन का रब उन को दोज़ख के अज़ाब से महफूज रखेगा, (और कहा जाएगा) तुम खूब मज़े के साथ खाओ पियो (यह) तुम्हारे नेक आमाल के बदले में है, जो तुम (दुनिया) में किया करते थे (और वह लोग) बराबर बिछे हुए तख्तों पर तकिये लगाए हुए होंगे और हम बड़ी बड़ी आँखों वाली हूरों से उनका निकाह कर देंगे।" 📕 सूरह तूर :…
ग़लत हदीस बयान करने की सज़ा रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : "मेरी हदीस को बयान करने में एहतियात करो और वही बयान करो जिस का तुम्हें यक़ीनी इल्म हो, जो शख्स जान बूझ कर मेरी तरफ से कोई गलत बात बयान करे, वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।" 📕 तिर्मिज़ी: २९५१