दज्जाल की हकीकत (फितना ऐ दज्जाल) पार्ट 3

Complete Story of Dajjal from Birth to Death (Part 3)

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✦ दज्जाल का इरान से ताल्लुक:

❝ दज्जाल के साथ अश्फहान के सत्तर हजार यहुदी होगे जो इरानी चादरे ओढे हुए होगे। (सही मुस्लिम किताब अल फितन हदीस न. 2944)

❝ दज्जाल कौम यहुद से होगा। (सही मुस्लिम किताब अल फितन हदीस न. 2937)

अश्फहान इरान आबाद का तीसरा बडा शहर है और शोबा अश्फहान का दारूल हुकूमत है, 2006 के अंदाजे के मुताबिक अश्फहान की आबादी 15 लाख है।

इसके अलावा दुसरी हदीसो मे खोज और करमान जो कि इरान मे मौजूद है उनसे जंग के बारे मे हदीस है:

हजरत अबु हुरैरह रजि अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:

❝ कयामत उस वक्त तक नही आएगी जब तक के तुम खोज और करमान के लोगो से जो अहले अजम मे से है, जंग ना कर लोगे, इन लोगो के चेहरे सुर्ख, नाक बैठी हुई, और आंखे चौडी चौडी होगी और चेहरे इस तरह होगे कि जैसे तह बा तह चमडे की ढाल होती है। (सही बुखारी)

मुसनद अहमद बिन हंबल मे रिवायत है कि हजरत अबु हुरैरह रजि अल्लाहु अन्हु ने फरमाया के मेने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को फरमाते हुए सुना कि:

❝ दज्जाल खोज और करमान मे जरूर उतरेगा सत्तर हजार लोगो मे जिन के चेहरे तह बा तह ढाल की मानिंद होगे।

करमान एक शहर का नाम है जो इरान मे मौजूद है, खोज मगरिबी इरान मे है और खुजिस्तान के नाम से मशहूर है।

दज्जाल का साथ देने वालो मे के बारे मे जो सही हदीस आई है, उनमे से अक्सर का ताल्लुक मौजूदा इरान के शहरो के साथ है, दज्जाल का खुरूज किस जगह से होगा इसके मुतालिक हदीस मे कोई खास जगह तय नही है, इब्ने माजा की हदीस के मुताबिक

❝ दज्जाल शाम और इराक के दरमियान एक रास्ते से नामुदार होगा (हदीस न. 4077)

इसका साथ देने वाले सत्तर हजार अश्फहानी यहुदी होगे, खोज और करमान के बारे मे भी सही रिवायत गुजर चुकी है, इन हदीस के क्या मायने लिए जाए ?

इसकी दो सुरते हो सकती है, पहली ये के इरान पर मुकम्मल यहुदीयो का कब्जा हो जाएगा, दुसरी ये के हुकूमत इसी तरह रहेगी लेकिन असल हुक्मरान यहुदी होगे।

इसमे कोई ताज्जुब की बात नही है, इरान मे यहुदी कदीम जमाने से बसे चले आ रहे है, इनमे से बाज कबीलो ने जाहिरी इस्लाम कुबूल कर लिया लेकिन असल यहुदी ही रहे, ऐसा एक फिरका इरान के शहर अश्फहान, रफसनजान, मशहद और दीगर अहम शहरो मे आबाद है, जो ‘जदीद इसलाम” के नाम से मशहूर रहा है।

– अश्फहानी यहुदी तमाम यहुदी कबीलो मे मुमताज मकाम रखते है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि अश्फहानी यहुदी कई मर्तबा हुकूमत इजराइल की इस दरख्वास्त को ठुकरा चुके है जिसमे इजराइल ने उन्हे इजराइल मे आकर बसने की दावत दी थी, चुनांचे इरानी यहुदीयो ने इजराइल की बजाय अमेरिका और फ्रांस जाने को तरजीह दी।

इरानी यहुदी “हाखाम यद यद या शोफज” को अपना रूहानी बाप मानते है, यु तो इरान की यहुदी माओ ने एक से एक बडा यहुदी जना है लेकिन यहा इख्तसार से काम लेते हुए सिर्फ दो यहुदीयो का जिक्र करना मुनासिब है। पहला इब्राहिम नाथान अल मआरूफ मुल्ला इब्राहिम (1816- 1868) और आगा खान अव्वल (1800-1881)

मुल्ला इब्राहिम ने बुखारा, तुर्कीस्तान, काबिल और हिंदुस्तान मे मुसलमानो की जडो को खोखला किया, जबकि आगा खान खानदान पहले हिन्दुस्तान फिर पाकिस्तान के मुसलमानो के नसीब मे आया, आगा खान अव्वल इरान मे करमान शोबे का गर्वनर था, 1840 मे पुरे इरान पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा, इरान से भागकर हिन्दुस्तान चला गया, तकसीम के बाद ये खानदान पाकिस्तान कराची चला गया।

अगर आप यहुदीयो की खास अलामत और रंगो के बारे मे जानते है तो अश्फहान मे हर जगह ये आपको बडी तादाद मे मिलेगे, नक्श व निगार, नीले टाइल्स से बनी इमाम बारगाह है, इन पर खास अलामते अश्फहानी यहुदी इरान के मअसियत मे रीड की हड्डी की हैसियत रखता है।

✦ इरान से यहुदीयो को इतनी मुहब्बत क्यों ?

इरान से यहुदीयो की मुहब्बत की वजह तारीखी है, यहा हजरत दानियाल अलेहिस्सलाम का मकबरा है, हजरत बिनयामीन का जसद है, और कुछ नबीयो के मकबरे मौजूद है, अश्फहान मे ही यहुदीयो का बहुत बडा मरकज मौजूद कायम है, इरान की पाॅलिसीयो मे भी कुछ चीजे ऐसी है जो इरान की जाहिरी तशखीस के बिल्कुल बरअक्स है, इरान अमेरिकी तिजारती ताल्लुकात, इरान भारत दोस्ती की गहरी जडे, हत्ता कि पाकिस्तान से भी ज्यादा अफगानीस्तान पर अमेरिकी कब्जे पर खामोशी, बल्कि अब अमेरिका के साथ खुफिया तआवून, पाकिस्तान के अंदर स्टेट के खिलाफ शियाओ का इस्तेमाल करना वगैरह।

[बरमूडा तिकोन और दज्जाल पेज न. 138] मुसन्नीफ- मौलाना आसिम उमर

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