"the best of peoples, evolved for mankind" (Al-Quran 3:110)

तौहीद की अमानत सीनों में हैं हमारे ….

इस्लाम के खिलाफ़ हज़ारों किताबें लिखी जा चुकी हैं, सैकड़ों वेबसाइट चल रही हैं, न जाने कितने फेसबुक पेज हैं जो दिन रात इस्लाम के खिलाफ़ पोस्ट करते रहते हैं| हजारों लोगों को इस्लाम के खिलाफ़ लिखने के पैसे दिए जाते हैं, लाखों डॉलर इस्लाम के दुष्प्रचार में खर्च किए जाते हैं|

ये सब जो मेहनत की जाती है अगर इस 50% मेहनत भी किसी दुसरे धर्म के खिलाफ़ की जाती तो शायद उसका नामो-निशान इस दुनिया से मिट जाता|

लेकिन ये इस्लाम है, इसे इस दुनिया और हम सब इंसानों को बनाने वाले अल्लाह की मद्द है| इसी लिए इतने विरोध और षणयंत्र के बाद भी इस्लाम बढ़ रहा है और रोज़ न जाने कितने लोग इस्लाम क़ुबूल कर रहे हैं|

सोचो भाइयों सोचो क्या यही काफ़ी नहीं की आप थोड़ा खुले दिमाग से सोचें और सही धर्म को पहचाने|
अल्लामा इकबाल ने सही फ़रमाया अपनी शायरी में..
“तौहीद की अमानत सीनों में हैं हमारे..
आसान नहीं मिटाना, नामो-निशां हमारा..”

Tauheed ki Amanat Sino me hai Hamare

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