कयामत किन लोगों पर कायम होगी?

۞ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ۞

सबसे बड़े ज़ालिमों पर क़यामत नाज़िल होगी

हजरत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद (र.अ.) से रिवायत है कि हज़रत रसूले करीम (ﷺ) ने इर्शाद फ़रमाया कि “कयामत सबसे बुरी मख़्लूक पर कायम होगी।” यह भी इर्शाद फरमाया कि ‘उस वक्त तक कयामत कायम न होगी जब तक जमीन में अल्लाह-अल्लाह किया जाता रहेगा।’ यह भी इरशाद फरमाया कि ‘कयामत किसी ऐसे शख्स पर कायम न होगी जो अल्लाह-अल्लाह कहता होगा।” [मुस्लिम शरीफ]

एक लम्बी हदीस में है कि (चूंकि किसी मुसलमान की मौजूदगी में कयामत कायम न होगी। इसलिए दुनिया के इसी दिन व रात के होते हुए) अचानक अल्लाह तआला एक उम्दा हवा भेज देगा जो मुसलमानों की बगलो में लगकर हर मोमिन और मुस्लिम की रूह कब्ज़ कर लेगी और सबसे बुरे लोग बाकी रह जाएंगे जो (सबके सामने बेहयाई से) गधों की तरह औरतों से ज़िना करेंगे। [मिश्कात शरीफ]

ठंडी हवा के जरिए तमाम मोमिनो को मौत दी जाएगी

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ.) से रिवायत है कि प्यारे नबी (ﷺ) ने इरशाद फरमाया कि “दज्जाल को कत्ल करने के बाद हजरत ईसा (अलैहि सलाम) सात साल लोगों में रहेंगे। इस दौर में दो आदमियों के बीच ज़रा दुश्मनी न होगी। फिर अल्लाह तआला मुल्क शाम (आजका सीरिया) की तरफ से एक ठंढी हवा भेज देगा, जिसकी वजह से तमाम मोमिन ख़त्म हो जाएंगे (और) जमीन पर कोई भी ऐसा शख्स बाकी न रहेगा, जिसके दिल में ख़ैर का (या फरमाया ईमान का) कोई जर्रा होगा। यहां तक कि अगर तुम (मुललमानों में से) कोई शख्स किसी पहाड़ के अन्दर (खोह में) दाख़िल हो जाएगा, तो वह हवा वहां भी दाखिल होकर उसकी रूह कब्ज़ कर लेगी।

इसके बाद सबसे बुरे लोग रह जाएंगे (जो बुरे करतूतों और शरारत की तरफ बढ़ने में) हल्के परिंदों की तरह (तेजी से उड़ने वाले) होंगे और (दूसरों का ख़ून बहाने और जान लेने में) दरिंदों-जैसे अखलाख वाले होंगे। न भलाई को पहचानते होंगे, न बुराई को बुराई समझते होंगे। उनका यह हाल देखकर इंसानी शक्लों में शैतान उनके पास आकर कहेगा कि (अफसोस! तुम कैसे हो गये) तुम्हें शर्म नहीं आती (कि अपने बाप-दादों को छोड़ बैठे)। वे उससे कहेंगे कि तू ही बता हम क्या करें? इसलिए वे उनको बुत परस्ती को तालीम देगा (और वे बुत की पूजा करने लगेंगे) वे इसी हाल में होंगे (यानी क़त्ल व ख़ून, बिगाड़-फसाद और बुत परस्ती में पड़े होंगे) और उनको ख़ूब रोजी मिल रही होगी और अच्छी जिंदगी गुज़र रही होगी कि सूर(Trumpet) फूंक दिया जाएगा। सूर की आवाज सब ही सुनेंगे। जो-जो सुनता जाएगा (डर की वजह से, हैरान होकर) एक तरफ को गरदन झुका देगा और दूसरी तरफ को उठा देगा।

हज़ार में 999 दोजखी होंगे

फिर फरमाया कि सबसे पहले जो शख़्स उसकी आवाज़ सुनेगा, वह वह होगा जो ऊटों को पानी पिलाने का हौज़ लीप रहा होगा। वह शख्स सूर
की आवाज सुनकर बेहोश हो जाएगा और फिर सब लोग बेहोश हो जाएंगे। फिर अल्लाह एक बारिश भेजेगा जो ओस की तरह होगी, उससे आदमी उग जाएंगे (यानी कब्रों में मिट्टी के जिस्म बन जाएंगे)। फिर दोबारा सूर फूंका जाएगा तो अचानक सब खड़े देखते होंगे। इसके बाद एलान होगा कि ऐ लोगो! चलो अपने रब की तरफ और फ़रिश्तो को हुक्म होगा कि इनको ठहराओ। इनसे सवाल होगा। फिर एलान होगा कि (इस सारे मज्मे से) दोजख्रियों को अलग कर दो । इसपर पूछा जाएगा (अल्लाह जल्ल ल शानुहू से) कि किस तादाद में से कितने दोजख़ी निकाले जाएं, जवाब मिलेगा कि हर हज़ार में 999 दोजखी (जहन्नुमी) निकालो|

इसके बाद आंहजरत सैयदे आलम (ﷺ) ने फरमाया कि “यह दिन होगा कि जिसके डर और दहशत से, बच्चे बूढ़े हो जाएंगे और यह दिन बड़ा ही मुसीबत का होगा।” [मुस्लिम शरीफ]

इन हदीसों से मालूम हुआ कि कयामत कायम होने के वक्त कोई मुसलमान दुनिया में मौजूद न होगा। इस बड़ी मुसीबत से अल्लाह तआला इन इंसानों को बचाये रखेंगे, जिनके दिल में जर्रा बराबर भी ईमान होगा।

To be Continued …

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