‎बुतपरस्ती (मूर्तिपूजा) की शुरुवात कब और कैसे हुई?

दुनिआ में बुतपरस्ती / मूर्तिपूजा की शुरुवात कब और कैसे हुई ?

नबी नूह (अलैहिस्लाम) जिस कौम मे मबउस थे उस कौम मे पाँच नेक सालेहीन नेक बुजुर्ग औलिया थे।
उनकी मज्लिशों मे बैठकर लोग अल्लाह को याद करते थे और मसाइल सुनते थे,
इससे उनके दीन को तक्वियत पहुचती थी।

जानिए कौन थे: नूह अलैहि सलाम

जब वे ग़ुजर गए तो क़ौम मे परेशानी हुई कि अब न वो मज्लिस रही न वो मसाइल रहे,
अब कहा बैठे ?

उस वक्त शैतान ने उनके दिलों मे यह फूंक मारी कि इन बुजूर्गों की इबादतगाहों मे
उनकी तस्वीर (बूत) बनाकर अपने पास रखलों।

जब उन तस्वीरों को देखोगे तो उनका जमाना याद आ जाएगा और वह क़ैफियत पैदा हो जाएगी।

तो उन के पाँचों के मुजस्समें बनाए गए और उन पाँचों का नाम था (1) वद , (2) सुवाअ , (3) यग़ूस , (4) नसर , (5) यऊक।
उनका कुरआन मे जिक्र है ये पाँच बुत बनाकर रखे गए।

उनका मक्सद सिर्फ तज़्कीर था की उन तस्वीरों(बुतो) के जरीए याद दिहानी हो जाएगी। उनको पूजना मक्सद नही था।
शूरू मे जब तक लोगो के दिलों मे मारिफत रही, उन बुजूर्गों के असरात रहे।

लेकिन जब दुसरी नस्ल आई तो उनके दिलों मे वह मारफत नही रही उनके सामने तो यही बुत थे

और जब तीसरी नस्ल आई तब तक शैतान अपना काम कर चुका था।
उनके दिलों मे इतनी भी मारफत नही रही। उनके सामने बुत ही बुत रह गए।

उन्ही को सज़्दा , उन्ही को नियाज उन्ही की नजर यहा तक की शिर्क शुरू हो गया।
फिर तो नजराने वसूल किए जाने लगे, मेंले और उर्स न जाने क्या क्या खुराफात शुरू हो गई।

📕 तफ़्सीरे इब्ने कसीर:पारा 29 ,पेज. 42 ,सूर: नूह के दुसरे रूकूअ मे

इस तरह से आगे चलकर दुनिआ में बुतपरस्ती की शुरुवात हुई।

*अल्लाह हम सबको हिदायत दे और बुतपरस्ती के फ़ितने बचाये,
*हमे और हमारी नस्लों को तौहीद परस्त बनाए। अमीन, अल्लाहुम्मा अमीन।

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