सूर फूंका जायेगा

۞ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ۞

[ps2id id=’soor-kya-hai’ target=”/]सुर क्या है ?

कयामत की शुरूआत सूर फूंकने से होगी। प्यारे नबी (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया कि “सूर एक सींग है, जिसमें फूंका जाएगा।[मिश्कात शरीफ]

और यह भी इरशाद फ़रमाया कि “मैं मज़े की ज़िंदगी क्‍यों कर गुजारूंगा, हालांकि सूर फूकने वाले (फरिश्ते) ने मुंह में सूर ले रखा है और अपना कान लगा रखा है और माथा झुका रखा है। इस इंतिज़ार में कि कब सूर फूंकने का हुक्म हो।[मिश्कात शरीफ]

अल्लाह ताला ने सूरः मुदस्सिर में सूर को नाकुर फरमाया है। चुनांचे इरशाद है:

“फिर जब नाकूर (यानि सूर) फूंका जायेगा तो वह काफिरों पर एक सख्त दिन होगा जिसमें कुछ आसानी न होगी।”

सूरः ज़ुमर में इर्शाद फरमाया:

“और सूर में फूंका जाएगा। सो बेहोश हो जाएंगे। जो भी आसमानों और जमीन में है सिवाए उनके जिनका होश में रहना अल्लाह चाहें। फिर दोबारा सूर में फूंका जाएगा तो वह फौरन खड़े हो जाएंगे, हर तरफ देखते हुए।”

क़ुरआनी आयतों और नबी की हदीसों में दो बार सूर फूंके जाने का ज़िक्र है। पहली बार सूर फूंका जाएगा तो सब बेहोश हो जाएंगे (इल्ला मन
शजल्लाह) फिर जिंदे तो मर जाएंगे और जो मर चुके थे उनकी रूहों पर बेहोशी की हालत पैदा हो जाएगी। इसके बाद दोबारा सूर फूंका जाएगा तो मुर्दों की रूहें उनके बदनों में वापस आ जाएंगी और जो बेहोश थे उनकी बेहोशी चली जाएगी। उस वक्त का अजीब व गरीब हाल देखकर सब हैरत से तकते होंगे और अल्लाह के दरबार में पेशी के लिए तेजी के साथ हाजिर किए जाएंगे।

सूरः यासीन में फरमाया :

“और सूर में फूंका जाएगा। बस अचानक वह अपने रब की तरफ जल्दी-जल्दी फैल पड़ेंगे। कहेंगे कि हाय! हमारी ख़राबी! किसने हमको उठा दिया, हमारे लेटने की जगह से। (जवाब मिलेगा कि) यह वह माजरा है जिसका रहमान (अल्लाह) ने वादा किया है और पैग॒म्बरों ने सच्ची ख़बर दी। बस एक चिंधाड़ होगी। फिर उसी वक्त वे सब हमारे सामने हाज़िर कर दिए जाएंगे।”

यानी कोई न छिप कर जा सकेगा। सब अल्लाह के हुज़ूर में मौजूद कर दिए जाएंगे।

[ps2id id=’do-sur-ke-bich-kitna-waqt-hoga’ target=”/]दो सुर फुंकने के दरमियान कितना वक्त होगा ?

हजरत अबू हुरैराह (र.अ.) ने फरमाया कि प्यारे नबी (ﷺ) ने ‘पहली बार और दूसरी बार सूर फूंकने की दर्मियानी दूरी बताते हुए चालीस का अदद फरमाया। मौजूद लोगों ने हज़रत अबूहुरैराह (र.अ.) से पूछा कि चालीस क्या? चालीस दिन या चालीस माह या चालीस साल। आंहज़रत (ﷺ) ने क्या फरमाया? इस सवाल के जवाब में हज़रत अबू हुरैराह (र.अ.) ने अपनी ला-इल्मी जाहिर की और फरमाया कि मुझे ख़बर नहीं (या याद नहीं) कि आंहज़रत (ﷺ) ने सिर्फ चालीस फरमाया या चालीस साल या चालीस दिन फरमाया।

दोबारा सूर फूंके जाने के बाद अल्लाह तबारक व तआला आसमान से पानी बरसा देगा, जिसकी वजह से लोग (कब्रों से) उग जाएंगे जैसे (ज़मीन से) सब्जी (उग जाती है)। यह भी फरमाया कि इंसान के जिस्म की हर चीज़ गल जाती है यानी मिट्टी में मिलकर मिट्टी हो जाती है सिवाए एक हड्डी के कि वह बाकी है। कियामत के दिन उसी से जिस्म बना दिए जाएंगे। यह हड्डी रीढ़ की हड्डी है।”

बुखारी व मुस्लिम की एक हदीस में है कि राई के दाने के बराबर रीढ़ की हड्डी बाकी रह जाती है, उसी से दोबारा जिस्म बनेंगे। – [अत्तर्गीब कतहींब]
सूरः ज़ुमर की आयत में यह जो फरमाया कि सूर फूंके जाने से सब बेहोश हो जाएंगे, सिवाए उनके जिनको अल्लाह चाहे। इसके बारे में तफ़सीर लिखने वालों के कुछ कौल हैं, किसी ने फरमाया कि शहीद मुराद हैं। किसी ने कहा कि जिब्रील (अलैहि सलाम) व मीकाईल (अलैहि सलाम) और इसू्राफील (अलैहि सलाम) के बारे में फरमाया है। किसी ने अर्श उठाने वालों को इस छूट में शामिल किया है। इनके अलावा और भी कौल हैं (अल्लाह ही बेहतर जानता है)। मुम्किन है कि बाद में इन पर भी फना छा जाए, जिसे इस छूट में बयांन किया जाता है। जैसा कि आयत “लि मनिल मुल्कल यौम। लिल्लाहिल वाहिदिल कुहृहार” की तफ़सीर में साहिबे मआलिमुल तंजील लिखते हैं कि जब मख्लूक के फना हो जाने के बाद अल्लाह तआला “लि मनिल मुल्कुल यौम” (किस का राज है आज?) फरमायेंगा, तो कोई जवाब देने वाला न होगा। इसलिए ख़ुद ही जवाब में फरमाएगा: “लिल्लाहिल वाहिदिल कुह्हार” (आज बस अल्लाह का राज है जो तनहा है और कहहार’ है)।

यानी आज के दिन बस उसी एक हकीकी बादशाह का राज है और वो जबरदस्त कहर वाला है। जिसके सामने हर ताकत दबी हुई है। तमाम दुनिया की हुकूमतें और राज इस वक्त फना हैं।

[ps2id id=’sur-fukne-ke-baad-hosh-me-koun-honge’ target=”/]सुर फुकने के बाद कौन होश में बाकि रहेंगे ?

हजरत अबू हुरैराह (र.अ.) रिवायत फरमाते हैं कि आंहज़रत सैयदे आलम (ﷺ) ने फरमाया कि:

बेशक लोग कयामत के दिन बेहोश हो जाएंगे और मैं भी उनके साथ बेहोश हो जाऊंगा । फिर सबसे पहले मेरी ही बेहोशी दूर होगी तो अचानक देखूंगा कि मूसा (अलैहि सलाम) अर्शे इलाही को एक तरफ पकड़े ख़ड़े हैं। मैं नहीं जानता कि वह बेहोश होकर मुझ से पहले होश में आ चुके होंगे या उनपर बेहोशी आयी ही न होगी और वे उनमें से होंगे जिनके बारे में अल्लाह का इर्शाद है ‘इल्ला मन शाजल्लाह’ है।[मिश्कात शरीफ]

 

To be Continued …

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