दज्जाल की हकीकत (फितना ऐ दज्जाल) पार्ट 5

Complete Story of Dajjal from Birth to Death (Part 5)

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दज्जाल कौन है? कहा है? और कब निकलेगा?

दज्जाल कौन है इस हवाले से बाज़ हज़रात का दुसरा कौल है के वो “हैरम आबीफ” है।

२.हैरम आबीफ :

बाज अहले इल्म की राय है कि इससे हैरम आबीफ (या सखरा आसफ) मुराद है, ये हजरत सुलेमान (अलैहि सलाम) के दौर मे हैकल सुलेमानी के नो बडे मास्टर मेसेंज का सरबराह ग्रेंड मास्टर था और जिन्नात से ताल्लुक रखता था।

यहुदी मजहबी दास्ताने के मुताबिक इसको (मआजल्लाह) फरिश्तो ने कायनात की तामीर के जादूई राज बता दिए थे, इससे वो राज लेने के लिए उसे कत्ल कर दिया गया, यहुद की बदकिस्मती देखिए के वो अल्लाह के सच्चे पेगम्बर हजरत सुलेमान (अलैहि सलाम) से अपनी निस्बत करते है, लेकिन उनकी इताअत नही करते, इनपर जादू के झूठे बोहतान लगाते है जबकि दुसरी तरफ वो हैरम आबीफ को देवता तसव्वुर करते है, उनके मुताबिक कुरान शरीफ मे जो ये मजकूर है “और (हमने) जिन्नो को इस (सुलेमान) का ताबेअ फरमान बना दिया जिनमे हर किस्म के मुआमर और गौता खोर थे”

इन मास्टर मेसेंज जिन्नो मे हैरम आबीफ भी था, नीज आयत कुरानी ” और हमने आजमाया सुलेमान को और डाल दिया उसकी कुर्सी पर एक जिस्म” ! से यही हैरम आबीफ मुराद है, जिसने मस्ख शुदा यहुदी रिवायत के मुताबिक सुलेमानी अंगुठी चुराई थी, और तख्त सुलेमानी पर कब्जा कर लिया था, इस इजराइली रिवायत को हमारे मुफस्सीरिन ने नकल किया है, और इस पर सख्त तरदीद की है,

Baitul Mukaddas

हजरत कतादा रहीमुल्लाह ये रिवायत बयान करते है जो अल्लामा इब्ने कसीर रहीमुल्लाह के मुताबिक यहुदी उलमा से ली गई है।
“हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम को हुक्म दिया गया कि बैतूल मुकद्दस इस तरह तामीर करे कि लोहे की कोई अवाज सुनने मे ना आए, उन्होंने बहुत कोशिश की लेकिन कामयाब ना हो सके, तब उन्होने एक जिन्न के बारे मे सुना जिसका नाम सखरा या आसफ था, वो इस तकनीक से आगाह था, हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम ने आसफ को बुलाया, इसने हीरे के साथ पत्थरो को काटने का अमल दिखाया, इस तरीके से शर्त पुरी हो गई, चुनांचे हैकल सुलेमानी या बैतूल मुकद्दस तामीर हो गया,

एक दिन हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम गुस्ल के लिए जा रहे थे, उन्होंने अपनी अंगूठी आसफ के हवाले की, ये अंगूठे बहुत मुकद्दस और सुलेमान अलेहिस्सलाम की सल्तनत की मोहर थी, (एक और रिवायत के मुताबिक हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम ने ये अंगूठी अपनी एक बीवी को दी जिससे आसफ ने ले ली) आसफ ने ये अंगूठी समुद्र मे फेंक दी, और खुद सुलेमान अलेहिस्सलाम का रूप ले लिया, अपना हुलिया तब्दील कर लिया, इस तरह आसफ ने हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम की सल्तनत और तख्त छीन लिया, आसफ ने हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम की हर चीज पर अख्तियार हासिल कर लिया सिवाय बीवीयो के, अब उसने बहुत सी ऐसी चीजे करना शुरू कर दी जो अच्छी नही थी।

हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम के एक सहाबी थे जिस तरह उमर रजि अल्लाहु अन्हु मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सहाबी थे, इनको शक हो गया के सुलेमान (अलेहिस्सलाम) के रूप मे आसफ है, चुनांचे उन्होने आसफ का इम्तिहान लिया, साथी ने आसफ से एक सवाल पुछा, जिसका जवाब उसने तौरात की तालीमात के खिलाफ दिया, अब सब लोगो को अंदाजा हो गया कि ये शख्स हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम पेगम्बर नही, अंजाम कार ये हुआ कि हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम ने अपनी हुकूमत भी वापस ले ली और आसफ को गिरफ्तार कर लिया। (तफसीर इब्ने कसीर जिल्द 4, सफा 400)

यहुदी चुंकि हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम के सच्चे पैरोकार और मानने वाले नही थे, उन्होने इस दास्तान मे कई तौहीन आमेज वाक्यात शामिल कर दिए, अल्लामा इब्ने कसीर रहीमुल्लाह फरमाते है “अहले किताब (यहुदीओ) का एक गिरोह इस पर इमान नही रखता था के हजरत सुलेमान अलेहिस्सलाम अल्लाह के पेगम्बर है, इसलिये ज्यादा इमकान यही है कि ऐसे लोगो ने ये दास्ताने छिपा ली हो।

✦ फ्रीमेसंस और दज्जाल

The Grand Architect Of The Universe (यहुदी इसको अपना देवता और मसीहा ख्याल करते है)

अलगरज हैरम आबीफ नामी इंसान जिन्न या जिन्नाती इंसान यहुदी की मुहरफ दास्तानो के मुताबिक “कायनात का ग्रेंड आर्किटेक्ट” था, उसे मुकद्दस हेकल के कलस पर ले जाया गया, उसकी एक आंख खराब थी, उस पर मरते वक्त तशद्दुद किया गया जिससे उसका हुलिया बिगड गया, यहुदी की आलमी तंजीम “फ्रीमेसंस” की मखसूस अलामत हर्फ “G” का इशारा God की तरफ नही, ये The Grand Architect Of The Universe का मुखफफ है।

यहुदी इसको अपना देवता और मसीहा ख्याल करते है, और क्लोनिंग के जरिए इसको दोबारा जिन्दा करने की उम्मीद पर साइंसी तर्जुबात किए जा रहे है। फ्रीमेसनरी की तीसरी डीग्री की तकरीब (या आखिरी डीग्री है जो गैर यहुदी को दी जाती है) मे ये अलफाज इस्तेमाल हुआ है,
؛ما آت..نیب.. سین..آ, ما, آت, با, آ
ये पुरानी मिश्री जुबान है इसका मतलब है “अजीम है फ्रीमेसनरी का सीनियर मास्टर, अजीम है फ्रीमेसनरी का जज्बा”

The Structure of Freemasonry Life Magazine 08 October 1956 in The Masonic Library Museum of PA

इसमे सीनियर मास्टर से यही नीम इंसान नीम जिन्न किस्म का बद अकीदा वा बद अमल शख्स मुराद है, यहुदी चुकि इस मुर्दा को जिन्दा करके उठाने की फिक्र मे है, लिहाजा वो मास्टर मेसन बनाने की तकरीब की Raise यानी “उठाने” की तकरीब कहते है, बनाने की तकरीब नही कहते है, यहुद को अपने मास्टर और कायनात के ग्रेंड आर्किटेक्ट की टीम को जेंटिक साइंस मे महारत के जरिए उठाने की उम्मीद है।

ये राय यहुदी की मखसूस मजहबी रिवायत के मुताबिक तो दुरूस्त हो सकती है, लेकिन हकीकत मे किसी तरह सही नही, इसलिये की हदीस शरीफ के मुताबिक दज्जाल मुर्दा नही, जिन्दा है, इसकी नअश किसी साइंसी अमल से जिन्दा नही होगी, अलबत्ता जब अल्लाह तआला का हुक्म होगा, इसके जिन्नाती किस्म के जिन्दा वजूद को दुनिया मे फसाद फैलाने के लिए रिहाई मिल जाएगी,

किसी मुफस्सीर, मुहद्दीस, मुवर्रीख या मुहक्कीक ने ये बात आज तक नही कही के दज्जाल हैकल सुलेमानी के मास्टर मेसेंज मे शामिल था, फिर उसे मार दिया गया और फिर उसे यहुदी जिन्दा करेगे, जहा तक बात यहुदी मजहबी दास्तानो की है, तो इनका कहना ही क्या? यहुद की बरबादी का सबस यही मनगढंत किस्से कहानीया ही तो है।

To be Continue … 

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