इत्र लगाना

हजरते आयशा (र.अ) से मालूम किया गया के रसूलुल्लाह इत्र लगाया करते थे? उन्होंने फ़रमाया “हाँ मुश्क वगैरह की उम्दा

सोने के आदाब (सुन्नत)

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब सोने का इरादा करते तो अपने दाहने हाथ को दाहने गाल के नीचे रख कर सोते फिर

बीमारों की इयादत करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) बीमारों की इयादत करते और जनाजे में शरीक होते और गुलामों की दावत कबूल फरमाते थे।

नमाज़ के लिये पैदल आना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “सब से जियादा नमाज का सवाब उस आदमी को मिलेगा जो सबसे जियादा पैदल चल

तीन उंगलियों से खाना

हजरत कअब बिन मालिक (र.अ) फरमाते हैं : रसूलुल्लाह (ﷺ) तीन उंगलियों से खाते थे और जब खाने से फारिग

सफर में आसानी की दुआ

सफर में जाने का इरादा करे तो यह दुआ पढ़े : तर्जुमा: ऐ अल्लाह ! जमीन को हमारे लिये समेट

अज़ान के बाद दुआ पढ़ना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: “जो बन्दा अजान सुनते वक़्त अल्लाह से यूँ दुआ करे: Allahumma Rabba Hadhihi-D-Dawatit-Tammaa Was-Salatil Qaimah, Aati

माफ़ करने की सुन्नत

हज़रत आयशा (र.अ) बयान करती हैं के “रसूलुल्लाह (ﷺ) ने अपनी जात के लिए कभी किसी से कोई बदला नहीं

पुरे यकींन से दुआ करो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “तुम अल्लाह तआला से ऐसी हालत में दुआ किया करो के तम्हें कुबूलियत का पूरा

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