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कुरआन व सुन्नत की नसीहत

दुनिया और आख़िरत की भलाई के बारे में कुरआन और नबी ए करीम ﷺ की रेहनुमायी।

ऐ ईमान वालो तुम शैतान के नक्शे कदम पर न चलो

कुरआन में अल्लाह तआला फर्रमाता है :"ऐ ईमान वालो तुम शैतान के नक्शे कदम पर न चलो और जो शैतान के नक्शे कदम पर चलेगा, तो शैतान तो बे हयाई और बुरी बातों का हुक्म करता है।"
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अल्लाह का सहारा मजबूती से पकड़ लो

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :"और अल्लाह का सहारा मजबूती से पकड़ लो, वही तुम्हारा काम बनाने वाला है और (जिस का काम बनाने वाला अल्लाह हो तो) अल्लाह तआला क्या ही अच्छा काम बनाने वाला है और क्या ही अच्छा मददगार है।"
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अल्लाह तआला ने ज़ुल्म को हराम कर दिया है

रसूलुल्लाह (ﷺ) हदीसे कुदसी बयान करते हुए फर्माते हैं के अल्लाह तआला फर्माता है :“ऐ मेरे बन्दो! मैंने अपने ऊपर जुल्म को हराम कर दिया है और उस को तुम्हारे दर्मियान भी हराम कर दिया है, लिहाजा तुम एक दूसरे पर जुल्म मत किया करो।"
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जमीन पर अकड़ कर मत चलो

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :"जमीन पर अकड़ कर मत चलो (क्योंकि) तुम न तो जमीन को फाड़ सकते हो और ना तन कर चलने से पहाड़ों की बुलन्दी तक पहुँच सकते हो।"
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दावत कबूल करे

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"जब तुम में से किसी को खाने की दावत दी जाए तो उस को कबूल करना चाहिये, फिर अगर वह चाहे तो खाना खाले और न चाहे तो छोड़ दे।"
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अल्लाह तआला अद्ल व इंसाफ का हुक्म देता है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:"अल्लाह तआला अद्ल व इन्साफ और अच्छा सुलूक करने का और रिश्तेदारों को माली मदद करने का हुक्म देता है और बेहयाई, ना पसन्द कामों और जुल्म व ज़ियादती से मना करता है, वह तुम्हें ऐसी बातों की नसीहत करता है,…
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खाने में बरकत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"बरकत खाने के बीच में उतरती है, तुम किनारे से खाया करो,खाने के। बीच से मत खाया करो।"
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अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक न करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:"अल्लाह तआला के साथ किसी को शरीक न करो, माँ, बाप के साथ अच्छा सुलूक करो, और तंगदस्ती के खौफ से अपनी औलाद को कत्ल न करो, हम तुम, को भी रिज्क देते हैं और उन को भी; खुले और छुपे बेहयाई के कामों के करीब न…
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मजलूम की बद्दुवा से बचो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया:“ऐसे शख्स की बद्दुआ से बचो, जिस पर जुल्म किया गया हो, इस लिए के उसकी बद्दुआ और अल्लाह के दर्मियान कोई आड़ नहीं होती है।”
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अल्लाह और उस के रसूल की इताअत करो

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :” ऐ ईमान वालो! तुम अल्लाह और उस के रसूल की इताअत करो और (शरीअत के मुताबिक फैसला करने वाले) हाकिमों की भी इताअत करो।”
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वसिय्यत के लिए दो इंसाफ पसंद लोग गवाह हो

कूरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:"ऐ ईमान वालो ! जब तुम में से किसी को मौत आने लगे. "वसीय्यत के वक्त शहादत के लिये तूम (मुसलमानों) में से दो इन्साफ पसन्द आदमी गवाह होने चाहिये या फिर तुम्हारे अलावा दूसरी कौम के लोग गवाह होने चाहिये।…
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औरतो से उनकी दिनदारी की वजह से निकाह करो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :"तुम औरतों से (सिर्फ) उन के हुस्न व जमाल की वजह से शादी न करो क्योकि हुस्न व जमाल खत्म होने वाला है और न उनकी मालदारी की वजह से शादी करो, मुमकिन है यह मालदारी उनको नाफ़रमानी में मुब्तला कर दे, अलबत्ता उनसे…
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