2 Rabbi Ul Awwal

2 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

इस्लामी तारीख: हज़रत ज़करिया (अ.स), अस्र की नमाज़ की फज़ीलत, मेहमान का अच्छे अलफाज़ से इस्तिकबाल करना, पड़ोसी के साथ अच्छा सुलूक करना, रसूलल्लाह (ﷺ) की नाफ़रमानी करने का गुनाह, अल्लाह और उसके बन्दों के हुकूक …

8 Zil Hijjah

8 Zil Hijjah | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

सीरत – इमाम इब्ने माजा (रहमतुल्लाहि अलैहि), हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा: छूहारों में बरकत, एक फर्ज के बारे में: तक्बीराते तशरीक, खैर व भलाई की दुआ, दुनियावी जिंदगी पर खुश न होना, बीमारी से मुतअल्लिक अहम हिदायत …

28 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

28 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

हूज़ूर (ﷺ) का शाम का पहेला सफर, गुस्ल के लिये तययम्मुम करना, बुढ़ापे में रिज़्क में बरकत की दुआ, मौत को कसरत से याद करने की फ़ज़ीलत, पाक दामन औरतों पर तोहमत लगाने का गुनाह, क़यामत के दिन लोगों की हालत …

20 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

20 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

इस्लामी तारीख: अरबों की अखलाक़ी हालत, सुबह की नमाज अदा करने पर हिफाज़त का जिम्मा, एक सुन्नत: अज़ाबे कब्र से बचने की दुआ, अमल: इंसाफ करने वाले नूर के मिम्बरों पर होंगे, फिजूलखर्ची करने का गुनाह, खाने पीने की चीजों में गौर करने की दावत …

18 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

18 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

मक्का में बुत परस्ती की इब्तेदा, शौहर का हक अदा करना, डर और घबराहट की दुआ, दोस्तों और पड़ोसियों से अच्छा सुलूक करना, कम दर्जे वाले जन्नती का इनाम, दुनिया से बेरग़बती और आखिरत की रगबत के लिये …

14 Rabbi Ul Awwal

14 Rabi-ul-Awal | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

इस्लामी तारीख: हारूत व मारूत, एक फर्ज: नमाज़ के लिये मस्जिद जाना, सज्दा-ए-तिलावत की दुआ, कसरत से सज्दा करने की फ़ज़ीलत, हराम चीज़ों का बयान, कयामत के दिन के सवालात …

2 Zil Hijjah जिल हिज्जा

2. जिल हिज्जा | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

नमाज छोड़ने का नुकसान, मुसीबत या खतरे को टालने की दुआ, मस्जिदे नबवी में चालीस नमाज़ों का सवाब, तकब्बुर से दिल पर मुहर लग जाती है, आखिरत के मुकाबले में दुनिया से राजी होने से बचना, मोमिनों का पुल सिरात पर गुजर …

Safar e Akhirat – Journey After Death by Adv. Faiz Syed

Waise agar dekha jaye tou Akhirat ka safar ek bohot bada topic hai, jo insan ke mout ke baad se shuru hota hai, fir uske baad uske Qabr ki Zindagi ka tamam mu’amla hota hai, uske baad barzaq ke halat, maqame-mehshar me usey dubara utahaya jana, mizan ka qayam hona , hisab aur kitab hona aur fir uske haq me jannat aur jahannum ka faisala hona ,.. tou aayiye is bayan ke waseele se hum Safar e aakhirat ki Haqqaniyat par roshni dalne ki koshish karet hai..

*baraye meharbani aap sabhi hazraat se darkhwast hai ke isey share kar jyada se jyada hazraat tak pohchane me humara tawoon karey..
– JazakAllahu Khairan kaseera !

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