0 37

कैदियों के साथ हुस्ने सुलूक

ग़ज़व-ए-बद्र में ७० मुश्रिकीन कैद हुए, जिन को मदीना मुनव्वरा लाया गया, हुजूर (ﷺ) ने कैदियों को सहाबा में तकसीम कर दिया, उन के साथ हुस्ने सुलूक और भलाई करने का हुक्म दिया, इस हुक्म को सुनते ही सहाबा ए किराम (र.अ) ने उन के साथ ऐसा सुलूक किया के दुनिया की कोई कौम उस अदल व इंसाफ और हुस्ने सुलूक की मिसाल पेश नहीं कर सकती।

आप (ﷺ) के चचा हज़रत अब्बास (र.अ) के बाजू कमर से कसे हुए थे, उन के कराहने की वजह से जब आप (ﷺ) बेचैन हो गए तो सहाबा ने उन की रस्सी ढीली कर दी, उनकी इस रिआयत की वजह से अद्ल व इन्साफ करते हुए हुजूर (ﷺ) ने तमाम कैदियों की रस्सियाँ ढीली करा दी, सहाबा के हुस्ने सुलूक का यह हाल था के उन्होंने अपने बच्चों को भूका रख कर कैदियों को खाना खिलाया और अपनी ज़रूरत के बावजूद उन को कपड़े पहनाए।

मालदार कैदियों से चार हज़ार दिरहम फिदया लेकर छोड दिया गया और पढ़े लिखे गरीब कैदियों को दस दस आदमियों को लिखना पढ़ना सिखाने के बदले आज़ाद कर दिया गया और अनपढ़ ग़रीब कैदियों को बिला किसी मुआवजे के रिहा कर दिया गया।

To be Continued …

Install App

Leave a Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More