۞ हदीस: रसूलुल्लाह (ﷺ) से पचास हज़ार साल के बराबर दिन (यानी क़यामत) के बारे में पूछा गया के वह कितना लम्बा होगा? तो रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया :
“उस ज़ात की कसम जिस के कब्जे में मेरी जान है !वह दिन मोमिन के लिये इतना मुख्तसर कर दिया जाएगा,जितनी देर में यह दुनिया में फर्ज़ नमाज अदा त किया करता था।”
झूठे बादशाह का अंजाम: हदीस झूठे बादशाह का अंजाम: हदीस अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया: "अल्लाह तआला रोज़े क़यामत 3 तरह के लोगो से न कलाम करेगा और न ही उनकी तरफ नज़रे रेहमत से देखेगा, और उनको दर्दनाक अजाब में मुब्तेला करेगा, और वो 3 ये लोग होंगे: "बुढा जानी, झूठा बादशाह और मुतक्कबिर फ़क़ीर।" 📕 सहीह मुस्लिम, हदीस 107
जब बुरा ख्वाब देखे तो यह अमल करे: हदीस Bura Khwab Dekhne Par Kya Karna Chahiye हदीस: रसूलल्लाह (ﷺ) फरमाते है : "जब तुम में से कोई बुरा ख्वाब देखे, तो तीन मर्तबा बाएं तरफ थुक दे और तीन मर्तबा शैतान के शर्र (बुराई) से अल्लाह की पनाह चाहे ( आऊज़ो बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम पढ़े और) करवट बदल कर सो जाए।" 📕 मुस्लिम, हदीस 5904
ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना: हदीस Hadees of the Day ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना: हदीस अबु बक्र सिद्दीक (रजी) से रिवायत है की,रसुलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: "अगर लोग जालीम को जुल्म करते हुए देखे और उसे न रोके तो करीब है की अल्लाह तआला उन सबको अजाब मे मुब्तला कर देगा।" 📕 रियाद अस-सलीहिन, हदीस, 197
पांच चीज़ों को 5 से पहले घनीमत समझो पांच चीज़ों को 5 से पहले घनीमत समझो हदीस: अब्दुल्ला इब्न अब्बास (र.) से रिवायत है के,अल्लाह के नबी (ﷺ) ने फरमाया: “पांच (5) चीज़ों को पांच (5) चीज़ों से पहले घनीमत समझो। (1). अपनी जवानी को बुढ़ापे से पहले,(2). अपनी सेहत को बीमारी से पहले,(3). अपनी मालदारी को गुरबत (गरीबी) से पहले,(4). अपनी फरागत को मसरुफियत से पहले,(5). अपनी जिंदगी को मौत से पहले। 📕 शुआब अल-ईमान, हदीस 9575
मेहमान की दावत व मेहमान नवाजी तीन दिन है मेहमान की दावत व मेहमान नवाजी तीन दिन है रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया : "जो आदमी अल्लाह और यौमे आखिरत पर ईमान रखता हो, उसे अपने मेहमान का इकराम करना चाहिये, एक दिन व रात की खिदमत उस का जाइज हक़ है और उस की दावत व मेहमान नवाजी तीन दिन है, उस के बाद की मेजबानी उस के लिये सदक़ा है और मेहमान के लिये जियादा दिन ठहर कर मेजबान को तंगी में मुब्तला करना जाइज नहीं है।" 📕 बुखारी : ६१३५
रोज़े की हालत में भी झूठ और दगाबाज़ी से बचे | Roze ki Halat me bhi Jhoot aur Dagabazi se bachey Hadees of the Day रोज़े की हालत में भी झूठ और दगाबाज़ी से बचे ۞ हदीस: अबू हुरैरा (र.अ.) से रिवायत है की,रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया - "अगर कोई शक्श (रोजा रख कर भी) झूठ बोलना और दगाबाजी करना ना छोड़े तो अल्लाह सुभानहु ताला को उसकी कोई जरूरत नहीं कि वो अपना खाना पीना छोड़ दे।" 📕 सहिह बुखारी, खंड 3, हदीस 1903
मुतअल्लिक़ीन की खबरगीरी करना एक बेहतरीन सुन्नत हजरत अनस बिन मालिक (र.अ) बयान करते हैं के : "अहले ताल्लुक में से कोई शख्स अगर तीन दिन तक न आता (या उस से मुलाक़ात न होती) तो आप (ﷺ) उसके मुतअल्लिक़ मालूमात फरमाते, अगर वह बाहर (सफर में) होता तो उस के लिये दुआ करते, अगर यह मौजूद होता तो आप उससे मुलाकात फ़रमाते, अगर बीमार होता तो उसकी इयादत फरमाते। 📕 मुस्नदे अबी याला : ३३३५
कयामत किस दिन कायम होगी रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : "तुम्हारे दिनों में अफजल दिन जुमा का दिन है, इसी रोज़ हज़रत आदम (अ.) को पैदा किया गया, इसी रोज़ उन का इन्तेक़ाल हुआ, इसी रोज सूर फूंका जाएगा और इसी दिन क़यामत कायम होगी।" 📕 अबू दाऊद : १०४७
बदन में एक गोश का टुकड़ा है जब वो दुरुस्त होगा तो सारा बदन दुरुस्त होगा: हदीस हदिस: दिल के कैफ़ीयत की अहमियत नुमान बिन बशीर (र.अ.) से रिवायत है के, मैंने रसूलअल्लाह (ﷺ) से सुना की, "सुन लो ! बदन में एक गोश का टुकड़ा है जब वो दुरुस्त होगा तो सारा बदन दुरुस्त होगा और अगर वो बिगड़ गया तो सारा बदन बिगड़ गया और वो तुम्हारा दिल है।" 📕 सहीह अल बुखारी, हदीस: 52
जो चार बातों पर ईमान न लाए, तो वह मोमिन नहीं रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : "जब तक कोई बन्दा इन चार बातों पर ईमान न लाए, तो वह मोमिन नहीं हो सकता।" (१) इस बात की गवाही देके अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं। (२) (इस की भी गवाही देके) मैं अल्लाह का रसूल हूँ उस ने मुझे हक़ के साथ भेजा है। (३) मरने और फिर दोबारा ज़िन्दा होने का यक़ीन रखे। (४) तक़दीर पर ईमान लाए। 📕 तिर्मिजी : २१४५
कयामत के दिन का अंदाज़ कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: "जिस दिन तमाम जानदार और फ़रिश्ते सफ़ बांधकर खड़े होंगे उस रोज कोई कलाम न कर सकेगा, अल्बत्ता जिस को खुदाए रहमान (यानी अल्लाह तआला) बात करने की इजाजत देदे और वह बात भी ठीक ही कहेगा, उस दिन का आना यकीनी है, जो शख्स चाहे अपने रब के पास ठिकाना बना ले।" 📕 सूरह नबाः ३८ ता ३९ इन आयतों में रोज़े क़यामत अल्लाह की अदालत में ह़ाज़िरी का अंदाज दिखाया गया है। और जो इस ख्याल में पड़े हैं कि उन के झूठे माबूद उनकी सिफारिश करेंगे उन को आगाह किया गया…
जन्नत का मौसम कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “उन (अहले ईमान) के सब्र के बदले में (उन्हें) जन्नत और रेशमी लिबास अता किया जाएगा, उन की यह हालत होगी के जन्नत में मसेहरियों पर तकिये लगाए बैठे होंगे, वहाँ उन्हें न गर्मी का एहसास होगा और न वह सर्दी महसूस करेंगे।” 📕 सूरह दहर : १२ ता १३