जन्नती औरत: मुस़ीबत पर स़ब्र की फ़ज़ीलत।

पोस्ट 47 :
जन्नती औरत: मुस़ीबत पर स़ब्र की फ़ज़ीलत।

अ़त़ा बिन अबी रबाह़ से रिवायत है कि, मुझसे इब्ने अ़ब्बास रज़िअल्लाहु अ़न्हु ने फ़रमाया:

❝ क्या मैं तुम्हें एक जन्नती औरत ना दिखाऊं ! मैं ने कहा: ज़रूर। फ़रमाया: ये काली औ़रत, अल्लाह के नबी ﷺ के पास आई और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ मुझे मिर्गी का दौरा पड़ता है और मैं इस हालत में बेपर्दा हो जाती हूं। आप अल्लाह से मेरे लिए दुआ़ करें।

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: अगर तुम चाहो तो स़ब्र करो तुम्हारे लिए जऩ्नत है और चाहो तो मैं तुम्हारे लिए अल्लाह से दुआ़ करता हूं कि वो तुम्हें शिफ़ा दे। उस औ़रत ने कहा: मैं स़ब्र ही कर लूंगी। फिर बोली: दौरे की हालत में मेरी बेपर्दगी हो जाती है। लिहाज़ा अल्लाह से इतनी दुआ़ कर दिजिए कि मेरी बेपर्दगी ना हो। इस पर अल्लाह के नबी ﷺ ने उस के लिए दुआ़ कर दी। 

📕 बुखारी: अल मर्ज़ा 5652
📕 मुस्लिम: अल बिर वस्स़िला वल आदाब 2576

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

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