औरतों का बच्चों को शरिअ़्त पर अ़मल करवाना।

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औरतों का बच्चों को शरिअ़्त पर अ़मल करवाना।

“रूबय्यिअ़् बिन्ते मुअ़्वविज़ रज़िअल्लाहु अ़न्हा फ़रमाती हैं:

❝ अल्लाह के नबी ﷺ ने आ़शूरा की सुब्ह़ अन्सा़र की बस्तियों में (इस ऐलान के साथ) आदमी भेजा कि जिस ने आज इस हाल में सुब्ह़ा की कि वो रोज़ा नहीं था वो बक़िया दिन रोज़ा पूरा करे और जो आज रोज़दार था वो अपना रोज़ा जारी रखे।

फ़रमाती हैं: फ़िर हम ये रोज़ा रखा करते और अपने छोटे बच्चों को भी रोज़ा रखवाते। और हम उनके लिए कपास के खिलौने बना देते। जब उन में से कोई भूक की वजह से रोने लगता तो हम ये खिलौने उसे दे देते (ताकि बहल जाए) यहां तक कि इफ़्तार का वक़्त हो जाता। ❞

📕 बुखारी: अ़स्सौ़म 1960,
📕 मुस्लिम: अस्स़ियाम 1919

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

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