औ़रतों का इल्म की त़लब के लिए जमा होना।

पोस्ट 21 :
औ़रतों का इल्म की त़लब के लिए जमा होना।

अबू सईद खुद्री रज़िअल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं:

❝ एक औ़रत अल्लाह के नबी ﷺ के पास आई और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल, आप की बातें तो स़िर्फ़ मर्दों ही को सुनने मिलती हैं। लिहाज़ा आप कोई दीन हमारे लिए भी त़ै करें जिसमें हम आप की ख़िदमत में हाज़िर हों और जो इल्म अल्लाह ने आप को अ़त़ा फ़रमाया है उस में से हमें भी सिख़ाएं। इस पर आप ﷺ ने फ़रमाया: (ठीक है) तुम लोग फुलां दिन फुलां जगा जमा हो जाना। तो वो जमा हुवीं।

अल्लाह के रसूल ﷺ उन के पास गए और आप ने उन्हें उस इल्म में से सिखाया जो अल्लाह ने आप को अ़त़ा फ़रमाया था। आप ﷺ ने फ़रमाया: तुम में से जिस औ़रत ने अपने आगे तीन बच्चे भेजे हों वो बच्चे उस के लिए जहन्ऩम से बचाओ बन जाएंगे। एक औ़रत ने पूछा: ऐ अल्लाह के रसूल, अगर दो बच्चे हों तो? दो मर्तबा उस औ़रत ने ये सवाल दोहराया। आप ﷺ ने जवाब में कहा: दो भी, दो भी, दो भी।

📕 बुखारी: अल ऐतेस़ाम बिल क़िताब वस्सुऩ्ना 7310
📕 मुस्लिम: अल बिर् वस्सिलति वल अदब 4768

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

Series : ख़्वातीन ए इस्लाम

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