23. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). मुसलमानों का मदीना हिजरत करना, (2). नींद का आना, (3). माँगी हुई चीज़ का लौटाना, (4). तीन उंगलियों से खाना, (5). दिखावे के लिए कपड़ा पहनना, (6). दुनिया खोल दी जाएगी, (7). अल्लाह के हुक्म पर चलो ताकि तुम टेढ़े रास्ते से बच सको।

Sirf Paanch Minute ka Madrasa in Hindi

Sirf 5 Minute Ka Madarsa (Hindi Book)

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1. इस्लामी तारीख

मुसलमानों का मदीना हिजरत करना

मक्का मुकरमा में मुसलमानों पर बेपनाह जुल्म व सितम हो रहा था, इस लिये रसूलल्लाह (ﷺ) ने दूसरी बैते अकबा के बाद मुसलमानों को मदीना जाने की इजाज़त दे दी। मुसलमानों में सबसे पहले अबू सलमा (र.अ) ने हिजरत का इरादा किया और सवारी तय्यार कर के सामान रखा और अपनी बीबी उम्मे सलमा और लड़के सलमा को साथ लिया, मगर बनी मुग़ीरा ने उम्मे सलमा को जाने न दिया और बनी अब्दल असद ने उनके बेटे सलमा को छीन लिया। जिसमें उस बच्चे का एक हाथ भी उखड़ गया। उस के बाद अबू सलमा तन्हा हिजरत कर गए। उम्मे सलमा रोजाना मक़ामे अबतह पर आकर रोती रहती थी। इस तरह एक साल का अरसा गुजर गया। आखिर एक शख्स ने उन पर रहम खा कर उनके शौहर अबू सलमा के पास भेजने पर कुरैशे मक्का को राजी कर लिया। उस वक़्त बनी अब्दल असद ने उनके लड़के सलमा को वापस किया। जिसे ले कर वह किसी तरह मदीना पहुँच गई। उन के अलावा दीगर मुसलमानों को भी हिजरत करने में बहुत ज़ियादा मुसीबतें उठानी पड़ीं

इस्लाम की खातिर अपने महबूब वतन, माल व दौलत और रिश्तेदारों को छोड़ना पड़ा। हजरत सुहैब (र.अ) ने जब हिजरत का इरादा किया, तो मुश्रिकीन ने रोक लिया। हज़रत सुहैब (र.अ) ने उन्हें अपना सारा माल देकर राजी किया और हिजरत फ़रमाई। इस की खबर रसूलुल्लाह (ﷺ) को मिली, तो आप ने फ़र्माया के सुहैब ने नफे का सौदा किया, जिस का जिक्र कुरआन में है।

TO BE CONTINUED …

📕 इस्लामी तारीख


2. अल्लाह की कुदरत

नींद का आना

जब इन्सान दिन भर काम कर के थक जाता है, तो अल्लाह तआला उस की थकान दूर करने के लिये उस पर नींद तारी कर देता है, यह नींद उस के फिक्र व ग्रम को दूर कर के ऐसा सुकून व राहत का जरिया बनती है के दुनिया की कोई चीज उस का बदल नहीं बन सकती, फिर अल्लाह तआला ने यह नेअमत अमीर व ग़रीब, आलिम व जाहिल, बादशाह व फकीर हर एक को यकसाँ अता फरमा रखी है।

और इस के लिये रात का वक़्त मुतअय्यन कर दिया है। अगर इन्सान को नींद न आए तो उस का दिमागी तवाजुन बिगड़ जाता है और होश व हवास खत्म हो जाते हैं, लोगों के लिये रात का वक्त मुतअय्यन करना और एक साथ नींद का आना अल्लाह की बड़ी कुदरत है।

📕 अल्लाह की कुदरत


3. एक फर्ज के बारे में

माँगी हुई चीज़ का लौटाना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“(वापसी की शर्त पर) माँगी हुई चीज़ को वापस किया जाएगा।”

खुलासा : अगर किसी शख्स ने कोई सामान यह कह कर माँगा के वापस कर दँगा, तो उस का मुक़र्रर वक्त पर लौटाना वाजिब है, उसको अपने पास रख लेना और बहाना बनाना जाइज नही है।

📕 इब्ने माजा : २३९८


4. एक सुन्नत के बारे में

तीन उंगलियों से खाना

हजरत कअब बिन मालिक (र.अ) फरमाते हैं : रसूलुल्लाह (ﷺ) तीन उंगलियों से खाते थे और जब खाने से फारिग हो जाते तो उंगलियाँ चाट लेते थे।

नोट: खाने के बाद उंगलियों को चाटना सुन्नत है, लेकिन इस तरह नहीं चाटना चाहिये के देखने वाले को नागवार हो।

और भी पढ़े : उंगलियों के पोरो में होते है किटकनाशक

📕 मुस्लिम:५२९८


5. एक अहेम अमल की फजीलत

तहज्जुद की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

”जब कोई आदमी रात को अपनी बीवी को बेदार करता है और अगर उस पर नींद का ग़लबा हो, तो उसके चेहरे पर पानी छिडक कर उठाता है और फिर दोनों अपने घर में खड़े होकर रात का कुछ हिस्सा अल्लाह की याद में गुज़रते हैं तो उन दोनों की मग़फिरत कर दी जाती है।”

📕 तबरानी कबीर:3370, अन अबी मालिक (र.अ)


6. एक गुनाह के बारे में

दिखावे के लिए कपड़ा पहनने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“जो शख्स शोहरत के लिए दुनिया में कपड़े पहनेगा, अल्लाह तआला उसको कयामत के दिन रुसवाई के कपड़े पहनाएगा और फिर उसमें आग भड़काएगा।”

📕 इब्ने माजाह, ३६०८


7. दुनिया के बारे में

अनकरीब दुनिया खोल दी जाएगी

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“अनकरीब दुनिया की दौलत तुम पर खोल दी जाएगी, यहाँ तक के तुम अपने घरों को इस तरह आरास्ता करोगे जैसे काबा शरीफ़ को आरास्ता किया जाता है।”

📕 तिबरानी कबीर : ४०३५


8. आख़िरत के बारे में

आखिरत की कामयाबी दुनिया से बेहतर है

आखिरत की कामयाबी दुनिया से बेहतर है

अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है :

“तुम लोगों को जो कुछ दिया गया है वह सिर्फ दुनियावी जिन्दगी में (इस्तेमाल की) चीजें हैं और जो कुछ (अज्र व सवाब) अल्लाह के पास है, वह इस (दुनिया) से कहीं बेहतर और बाकी रहने वाला है और वह उन लोगों के लिये है जो ईमान लाए और अपने रब पर भरोसा रखते हैं।”

[ सूर-ए-शूराः ३६ ]


9. क़ुरान से इलाज

नज़रे बद का इलाज

एक शख्स को नजर लग गई, तो रसूलुल्लाह (ﷺ) ने उसके सीने पर हाथ मार कर यह दुआ फरमाई:

तर्जुमा : ऐ अल्लाह ! इस की गर्मी, इस की ठंडक और तकलीफ को दूर कर दे। चुनान्चे वह शख्स (ठीक हो कर) खड़ा हो गया।

📕 मुस्नदे अहमद : १५२७३


10. क़ुरान की नसीहत

अल्लाह के हुक्म पर चलो ताकि तुम टेढ़े रास्ते से बच सको

कुरान में अल्लाह तआला फरमाता है:

“ये बताये हुए अहकाम ही मेरा सीधा रास्ता है, तुम इसी पर चलो और दूसरे गलत रास्तों पर मत चलो वरना वो रास्ते तुमको राहे खुदा से हटा देंगे, अल्लाह तआला इस बात का तुमको ताकीद के साथ हुक्म देता है ताकि तुम टेढ़े रास्ते से बच सको।”

📕 सूरह अनम: 153


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