"the best of peoples, evolved for mankind" (Al-Quran 3:110)

⭐ जानीये – क्यों हराम है सुअर का मांस ….

इस्लाम में सुअर का माँस खाना वर्जित(हराम) होने की बात से सभी परिचित हैं। निम्नलिखित तथ्यों द्वारा इस प्रतिबन्ध की व्याख्या की गई है।

1). सुअर के मांस का निषेध पवित्र कुरआन में ।
पवित्र क़ुरआन में कम से कम चार स्थानों पर सुअर का मांस खाने की मनाही की गई है। पवित्र क़ुरआन की सूरह 2 आयत 173, सूरह 5 आयत 3, सूरह 6 आयत 145, सूरह 16 आयत 115 में इस विषय पर स्पष्ट आदेश दिये गए है।
पवित्र कुरआन की निम्न आयत इस बात को स्पष्ट करने के लिए काफी है, कि सुअर का मांस क्यों हराम किया गया है।
» तुम्हारे लिए (खाना) हराम (निषेध) किया गया मुर्दार, खून, सुअर का मांस और वह जानवर जिस पर अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया गया हो। – (कुरआन 5:3)
इस संदर्भ में पवित्र क़ुरआन की सभी आयतें मुसलमानों को संतुष्ट करने हेतु पर्याप्त है, कि सुअर का मांस उनके लिए हराम है।

2). बाइबल ने भी सुअर का मांस खाने की मनाही की है।
संभवतः ईसाई लोग अपने धर्मग्रंथ में तो विश्वास रखते ही होंगे।
बाइबल में सुअर का मांस खाने की मनाही इस प्रकार की गई है।
» और सुअर को, क्योंकि उसके पाँव अलग और चिरे हुए हैं। पर वह जुगाली (Rumination/पागुर) नहीं करता, वह भी तुम्हारे लिये अपवित्र है, तुम उनका मांस न खाना, उनकी लाशो को न छूना, वह तुम्हारे लिए अपवित्र हैं। – (ओल्ड टेस्टामेंट, अध्याय 11, 7 से 8)
कुछ ऐसे ही शब्दों के साथ ओल्ड टेस्टामेंट की पाँचवी पुस्तक में सुअर खाने से मना किया गया है।
» और सुअर तुम्हारे लिए इस कारण से अपवित्र है कि इसके पाँव तो चिरे हुए हैं परन्तु वह जुगाली नहीं करता, तुम न तो उनका माँस खाना और न उनकी लाशों को हाथ लगाना। – (ओल्ड टेस्टामेंट, अध्याय 14 : 8)

3). सुअर के मांसाहार से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं।
अब आईए ! ग़ैर मुस्लिमों और ईश्वर को न मानने वालों की ओर । उन्हें तो बौद्धिक तर्क, दर्शन और विज्ञान के द्वारा ही संतुष्ट किया जा सकता है।
सुअर का मांस खाने से कम से कम 70 विभिन्न रोग लग सकते हैं। एक व्यक्ति के उदर में कई प्रकार के कीटाणु हो सकते हैं, जैसे राउण्ड वर्म, पिन वर्म और हुक वर्म इत्यादि। उनमें सबसे अधिक घातक टाईनिया सोलियम (Taenia Soliam) कहलाता है। सामान्य रूप से इसे टेपवर्म या फीताकृमि भी कहा जाता है। यह बहुत लम्बा होता है और आंत में रहता है। इसके अण्डे रक्त प्रवाह में मिलकर शरीर के किसी भी भाग में पहुंच सकते हैं। यदि यह मस्तिष्क तक जा पहुंचे तो स्मरण शक्ति को बहुत हानि पहुंचा सकते हैं। यदि दिल में प्रवेश कर जाए तो दिल का दौरा पड़ सकता है। आँख में पहुंच जाए तो अंधा कर सकते हैं। जिगर में घुसकर पूरे जिगर को नष्ट कर सकते हैं। इसी प्रकार शरीर के किसी भाग को हानि पहुंचा सकते हैं। एक अन्य अत्यन्त घातक कृमि (कीड़ा) Trichura Tichurasis है ।
यह एक सामान्य भ्रांति है कि यदि सुअर के मांस को भली भांति पकाया जाए तो इन रोगाणुओं के अण्डे नष्ट हो जाएंगे। अमरीका में किये गए अनुसंधान के अनुसार ट्राईक्योरा से प्रभावित 24 व्यक्तियों में 20 ऐसे थे जिन्होंने सुअर का माँस अच्छी तरह पका कर खाया था। इससे पता चला कि सुअर का मांस अच्छी तरह पकाने पर सामान्य तापमान पर भी उसमें मौजूद रोगाणु नहीं मरते जो भोजन पकाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।

4). सुअर के मांस में चर्बी बढ़ाने वाला तत्व होता है।
सुअर के मांस में ऐसे तत्व बहुत कम होते हैं, जो मांसपेशियों को विकसित करने के काम आते हों। इसके विपरीत यह चर्बी से भरपूर होता है। यह वसा रक्त नलिकाओं में एकत्र होती रहती है, और अंततः अत्याधिक दबाव (हाइपर टेंशन) ओर हृदयघात का कारण बन सकती है। अतः इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि 50 प्रतिशत से अधिक अमरीकियों को हाइपर टेंशन का रोग लगा हुआ है।

5). सुअर संसार के समस्त जानवरों से अधिक घिनौना जीव है।
सुअर संसार में सबसे अधिक घिनौना जानवर है। यह गंदगी, मैला इत्यादि खाकर गुज़ारा करता है। मेरी जानकारी के अनुसार यह बेहतरीन सफ़ाई कर्मचारी है, जिसे ईश्वर ने पैदा किया है। वह ग्रामीण क्षेत्र जहाँ शौचालय आदि नहीं होते और जहाँ लोग खुले स्थानों पर मलमूत्र त्याग करते हैं, वहाँ की अधिकांश गन्दगी यह सुअर ही साफ़ करते हैं।
कुछ लोग कह सकते हैं कि आस्ट्रेलिया जैसे उन्नत देशों में सुअर पालन स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में किया जाता है। परन्तु इतनी सावधानी के बावजूद कि जहाँ सुअरों को बाड़ों में अन्य पशुओं से अलग रखा जाता है, कितना ही प्रयास कर लिया जाए कि उन्हें स्वच्छ रखा जा सके किन्तु यह सुअर अपनी प्राकृतिक प्रवत्ति में ही इतना गन्दा है कि उसे अपने साथ के जानवरों का मैला खाने में ही आनन्द आता है।

Suar Ka Gosht, Pork

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1 Comment on "जानीये – क्यों हराम है सुअर का मांस …."

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Tasleem Khan
Guest

Masham Allah …..
Very very advance knowledge for Muslim scientists. …..

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