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नमाज़ के छोड़ने पर वईद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : “नमाज़ का छोड़ना आदमी को कुफ्र से मिला देता है।” [मुस्लिम : २४६]

एक दूसरी हदीस में आप (ﷺ) ने फ़र्माया: “ईमान और कुफ्र के दरमियान फर्क करनेवाली चीज़ नमाज़ है।” [इब्ने माजा : १०७८]

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