Browsing Category

उम्मत की इस्लाह

बेवजाह तलाक़ चाहने की बुराई।

पोस्ट 29 : बेवजाह तलाक़ चाहने की बुराई। सौबान रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: ❝ जो भी औ़रत बिला किसी मजबूरी के अपने शोहर से तलाक़ का मुतालबा करती है उस पर जन्ऩत की खुश्बू ह़राम है। ❞  📕 मुस्नद…
Read More...

निकाह़ के लिए औ़रत की भी इजाज़त ज़रूरी है।

पोस्ट 28 : निकाह़ के लिए औ़रत की भी इजाज़त ज़रूरी है। इब्ने अ़ब्बास रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: ❝ स़य्यिबा (यानी मुत़ल्लिका या बेवा औ़रत) वली के मुकाबले में अपने निकाह़ का ज़ियादा इख़्तियार रखती…
Read More...

औ़रतों का जिहाद ह़ज है।

पोस्ट 27 : औ़रतों का जिहाद ह़ज है। उम्मुल मोमिनीन आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा से रिवायत है कि, उन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ से अ़र्ज़ किया: ❝ ऐ अल्लाह के रसूल, हम समझते हैं कि जिहाद सबसे अफ़ज़ल अमल है, फिर क्या हम भी जिहाद ना करें? आप ﷺ…
Read More...

शोहर के माल में से स़दका करने की गुंजाइश।

पोस्ट 26 : शोहर के माल में से स़दका करने की गुंजाइश। अबू हुरैराह रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि; अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया: ❝ एक औ़रत जब अपने शोहर की कमाई में से उसके हुक्म के बग़ैर (ख़ैर के कामों में) ख़र्च करती है तो उस को…
Read More...

नबी ﷺ के दौर में औ़रतों का फ़रमाने नबवी की ताबेदारी करना।

पोस्ट 25 : नबी ﷺ के दौर में औ़रतों का फ़रमाने नबवी की ताबेदारी करना। अब्दुल्लाह बिन अ़म्र बिन आ़स़ रज़िअल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं कि: ❝ एक औ़रत अल्लाह के नबी ﷺ के पास आई और उसके साथ उसकी बेटी थी जिसके हाथों में सोने के मोटे मोटे कंगन…
Read More...

ख़्वातीन और नमाज़े ईद।

पोस्ट 24 : ख़्वातीन और नमाज़े ईद। उम्मे अ़तिय्या फ़रमाती हैं: हमें इस बात का हुक्म दिया गया था कि हम ईदैन में हाएज़ा और पर्दानशीन (कुंवारी) ख़्वातीन को भी (ईदगाह) ले आएं ताकि वो मुसलमानों की जमात और उन की दुआ़ में शामिल हो…
Read More...

औरत और इल्मी तह़क़ीक़ व उलमा से सवाल।

पोस्ट 23 : औरत और इल्मी तह़क़ीक़ व उलमा से सवाल। इब्ने अबी मुलैका से रिवायत है कि; ❝ नबी ﷺ की ज़ौजा मोहतरमा आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा का मुआ़मला ये था कि जब भी वो नबी ﷺ से कोई बात सुनती और वो बात उन की समझ में ना आती तो उसे दोबारा…
Read More...

ख़्वातीन का मस्जिद में आना।

पोस्ट 22 : ख़्वातीन का मस्जिद में आना। इब्ने उमर रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि; ❝ उमर रज़िअल्लाहु अ़न्हु की ज़ौजा मोहतरमा फ़ज़्र और इशा की नमाज़ मस्जिद में बाजमात अदा करती थीं। उन से किसी ने पूछा: आप क्यूं (नमाज़ के लिए) घर से…
Read More...

औ़रतों का इल्म की त़लब के लिए जमा होना।

पोस्ट 21 : औ़रतों का इल्म की त़लब के लिए जमा होना। अबू सईद खुद्री रज़िअल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं: ❝ एक औ़रत अल्लाह के नबी ﷺ के पास आई और कहा: ऐ अल्लाह के रसूल, आप की बातें तो स़िर्फ़ मर्दों ही को सुनने मिलती हैं। लिहाज़ा आप कोई दीन…
Read More...

औ़रतें मर्दों की शक़ाइक हैं।

पोस्ट 20 : औ़रतें मर्दों की शक़ाइक हैं। आ़ईशा रज़िअल्लाहु अ़न्हा से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ से पूछा गया कि: ❝एक शख़्स़ (नींद से जागने पर कपड़ों में) गीलापन देखे लेकिन उसे एह्तेलाम याद ना हो (तो वो क्या करे ?) आप ने फ़रमाया: वो…
Read More...