16 Jamadi-ul-Akhir | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

16 Jamadi-ul-Akhir | Sirf Panch Minute ka Madarsa

1. इस्लामी तारीख

वफ्दे नजरान की मदीने में आमद

नजरान यमन के एक शहर का नाम है। यहाँ के लोग ईसाई थे। सन ९ हिजरी में रसूलुल्लाह (र.अ)  ने अहले नजरान को इस्लाम की दावत दी। तो साठ अफराद पर मुश्तमिल एक वफ़्द आप की ख़िदमत में हाजिर हुआ। जिन में शुरहबील बिन वदाआ, अब्दुल्लाह, जब्बार बिन कैस जैसे बड़े बड़े पादरी थे। और काफले का अमीर अब्दुल मसीह आकिब था।

उन्होंने हजरत ईसा (अ.स)  के बारे में सवालात किये। जिनके जवाब में अल्लाह तआला ने सूर-ए-आले इमरान की इब्तेदाई अस्सी आयतें नाजिल फ़रमाई। इन आयात में अल्लाह तआला की तरफ से हज़रत ईसा (अ.स)  की बगैर बाप की पैदाइश, उन की नुबुव्वत, व रिसालत, मजहबे इस्लाम की सच्चाई और यहूद व नसारा के एतेरजात का साफ साफ जवाब दिया गया।

मगर उन्होंने मानने से इन्कार कर दिया। तो रसूलुल्लाह (ﷺ) ने उन को मुबाहला (जिस फरीक का अक़ीदा बातिल हो उस पर अल्लाह की लानत और हलाकत की दुआ करने) की दावत दी। हुजूर (ﷺ) हज़रत हसन, हुसैन, हज़रत अली और फातिमा (र.अ)  को ले कर मैदान में आ गए। मगर नजरान के पादरियों को मुबाहला करने की हिम्मत नहीं हुई। फिर आप (ﷺ) ने फर्माया : अगर यह लोग मुबाहला करते, तो पूरी वादी आग से भर जाती और तमाम अहले नजरान हलाक हो जाते, इस के बाद उन्होंने सालाना जिज़या (टेक्स) अदा करने पर सुलह कर ली।

जिज़ये की वसूलयाबी के लिये अमीने उम्मत हजरत अबू उबैदा (र.अ)  को उन के साथ भेज दिया। उनकी तब्लीग और दावती कोशिशों से इस पूरे इलाके में इस्लाम फैल गया।

📕 इस्लामी तारीख

To be Continued ...


2. हुजूर (ﷺ) का मुअजिजा

आँख की रोशनी का तेज होना

हज़रत आयशा (र.अ)  फर्माती हैं के आप (ﷺ) अंधेरे में इस तरह देखते थे, जिस तरह रौशनी और उजाले में देखते थे।

📕 बैहकी फी दलाइलिन्नुबुब्यह: २३२६


3. एक फर्ज के बारे में

नमाज़ दीन ऐ इस्लाम का सुतून है

एक आदमी ने आप (ﷺ) से अर्ज़ किया ऐ अल्लाह के रसूल ! इस्लाम में अल्लाह के नजदीक सबसे ज़ियादा पसन्दीदा अमल क्या है ? आप (ﷺ) ने फर्माया :

"नमाज़ को उस के वक्त पर अदा करना और जो शख्स नमाज़ को (जान बूझ कर) छोड़ दे उसका कोई दीन नहीं है, और नमाज़ दीन का सुतून है।"

📕 बैहकी फी शोअबिल ईमान : २६८३, अन उमर (र.अ)


4. एक सुन्नत के बारे में

बीमार पुरसी के वक़्त की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब किसी बीमार की इयादत के लिये जाते या आप (ﷺ) की खिदमत में बीमार को हाज़िर किया जाता तो आप यह दुआ पढ़ते:

 اَللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ مُذْهِبَ الْبَاسِ اشْفِ أَنْتَ الشَّافِيْ لَا شَافِيَ إِلَّا أَنْتَ شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا

ALLAHumma Rabbannasi Muzhibal-baasi-shfee Antashhaafi La Shaafi Illa Anta Shifa-an La Yughaadiru Saqama

तर्जमा : “ऐ अल्लाह! लोगों के रब्ब! बीमारी को दूर करने वाले! शिफ़ा ‘अता फरमाए| तू ही शिफ़ा देने वाला है। तेरे सिवा कोई शिफ़ा देने वाला नहीं। ऐसी शिफ़ा ‘अता फरमा के जिसके बाद बीमारी बाक़ी न बचे।”

📕 बुखारी: ५६७५, अन आयशा (र.अ)


5. एक अहेम अमल की फजीलत

अल्लाह के लिये अपने भाई की जियारत करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"क्या मैं तुम्हें जन्नती लोगों के बारे में खबर न करूं? सहाबा (र.अ) ने अर्ज किया: जरूर या रसूलल्लाह (ﷺ)!

आप (ﷺ) ने फर्माया: नबी जन्नती है, सिद्दीक जन्नती है और वह आदमी जन्नती है जो सिर्फ अल्लाह की रजा के लिये शहर के दूर दराज इलाके में अपने भाई की जियारत के लिये जाए।"

📕 तबरानी औसत: १८१०, अन अनस बिन मालिक (र.अ)


6. एक गुनाह के बारे में

कंजूसी करने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

"जो लोग अल्लाह तआला के अता करदा माल व दौलत को (खर्च करने में) बुख्ल (कंजूसी) करते हैं, वह बिल्कुल इस गुमान में ना रहें के (उनका यह बूख्ल करना) उनके लिये बेहतर है, बल्के वह उन के लिये बहुत बुरा है,

कयामत के दिन उनके जमा करदा माल व दौलत को तौक बनाकर गले में पहना दिया जाएगा और आसमान व जमीन का मालिक अल्लाह तआला ही है और अल्लाह तआला तुम्हारे आमाल से बाखबर है।"

📕 सूरह आले इमरानः १८०

© HindiQuran.in


7. दुनिया के बारे में

दुनिया की चीजें चंद रोजा हैं

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : 

"जो कुछ भी तुम को दिया गया है, वह सिर्फ चंद रोज़ा ज़िन्दगी के लिये है और वह उस की रौनक है और जो कुछ अल्लाह तआला के पास है, वह इस से कहीं बेहतर और बाकी रहने वाला है। क्या तुम लोग इतनी बात भी नहीं समझते?"

📕 सूरह कसस : ६०

© HindiQuran.in


8. आख़िरत के बारे में

मोमिन के साथ क़ब्र का सुलूक

रसलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"जब मोमिन बन्दे को दफन किया जाता है, तो कब्र उस से कहती है: तुम्हारा आना मुबारक हो, मेरी पुश्त पर चलने वालों में तुम मुझे सब से जियादा महबूब थे, जब तुम मेरे हवाले कर दिए गए और मेरे पास आ गए, तो तुम आज मेरा हुस्ने सुलूक देखोगे, तो जहाँ तक नजर जाती है क़ब्र कुशादा हो जाती है और उसके लिये जन्नत का दरवाजा खोल दिया जाता है।"

📕 तिरमिजी : २४६०, अन अबी सईद खुदरी (र.अ)


9. तिब्बे नबवी से इलाज

दिल की कमज़ोरी का इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

"तुम लोग सन्तरे का इस्तेमाल किया करो, क्योंकि यह दिल को मज़बूत बनाता है।"

📕 कंजुल उम्माल : २८२५३

फायदा : मुहद्दिसीन तहरीर फ़रमाते हैं के सन्तरे का जूस पेट की गन्दगी को दूर करता है, क़े और मतली को खत्म करता है और भूक बढ़ाता है।


10. नबी (ﷺ) की नसीहत

छह चीजों की जमानत: जब बात करो तो सच बोलो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"तुम अपनी तरफ से मुझे छह चीजों की जमानत दे दो मैं तुम्हें जन्नत की जमानत देता हूँ। जब तुम बात करो तो सच बोलो, जब वादा करो तो पूरा करो, जब तुम्हारे पास अमानत रखी जाए तो अमानत अदा करो, अपनी शर्मगाहों की हिफाजत करो, अपनी आँखों को नीचे रखो और अपने हाथों को (जुल्म व सितम से) रोके रखो।"

📕 मुस्नदे अहमद : २२२५१, अन उबादा बिन सामित (र.अ)

[icon name=”info” prefix=”fas”] इंशा अल्लाहुल अजीज़ ! पांच मिनिट मदरसा सीरीज की अगली पोस्ट कल सुबह ८ बजे होगी।

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