"the best of peoples, evolved for mankind" (Al-Quran 3:110)

⭐ इस्लाम की मूल आस्थाये

इस्लाम की मुल आस्थाये ३ है , जिन्हें मानना सम्पूर्ण मानवजाति के लिए अनिर्वाय (Compulsory) है |

  • १) तौहिद – एकेश्वरवाद (एक इश्वर में आस्था रखना)
  • २) रिसालत – प्रेशित्वाद (इशदुत, नबी, Messengers)
  • ३) आखिरत – परलोकवाद (मृत्यु के बाद का जीवन)
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पहली अनिर्वाय आस्था – तौहीद
  • 1. पहली अनिर्वाय आस्था – तौहीद
  • 2. दूसरी अनिर्वाय आस्था – रिसालत
  • 3. तीसरी अनिर्वाय आस्था – आखिरत

1. पहली अनिर्वाय आस्था – तौहीद

इस्लाम की सबसे पहली जो आस्था है तौहिद इसको हम आपके सामने रखते है जो मानवता को बताने के लिए इश्वर (अल्लाह) ने हर समय, हर समुदाय, हर जाती के अंदर प्रेषित (नबी, इश्दुत) भेजे ताकि मानवों को बता दे और उनका रिश्ता श्रुष्टि के रचियेता एक इश्वर से जोड़ दे|

*तो तौहिद का अर्थ होता है के – "अल्लाह को एक सत्य इश्वर माने , उसके बारे में ज्ञान प्राप्त करे और उसी की आराधना, उपासना और पूजा करे,.. क्युंकी वो निराकार एक सत्य इश्वर अल्लाह ही है जिसने सारे जगत का निर्माण किया, वही उसका रचियेता , मालिक और उसका रब है..."

– और क्यूंकि उसने इन सबकी रचना की तो ये जरुरी है हम पर के उसी इश्वर की आराधना उपासना और पूजा करे जिसने ये सब मानवों के लिए बनाया है |

*और इसी सन्देश को लेकर इशदूत आये और यही बात एक सत्य इश्वर अल्लाह की बड़े-बड़े ऋषियों ने मुनियों ने, ज्ञानियों ने और जो कोई धर्म का ज्ञान रखता है वो इसके बारे में आपको बताएँगे के इस आस्था की क्या अहमियत है |
– और ऐसे कई प्रेषित आये जिन्होंने ये बाते लोगों को बताई !! और इश्वर के अंतिम प्रेषित मोहम्मद (सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम) इनकी पूरी ज़िन्दगी का सन्देश भी तौहीद (एकेश्वरवाद) ही था |
*एक बार प्रेषित मोहम्मद (सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम) के पास कुछ लोग आये और कहा के –
“हे प्रेषित ! तुम जिस अल्लाह की तरफ लोगों को बुलाते हो; हमे थोडा बताओ तो सही वो कैसा है ?”
*तो प्रेषित मोहम्मद(स०) अपने दिल से कोई बात ना कहते उनपर एक इशवाणी(श्लोक/Verse) आई
और वो यह थी जो के कुरआन का अध्याय ११२ और उसके श्लोक १ से ४ अवतरण हुए और उसमे कहा:

१. (हे प्रेषित तुम कहो उन लोगों से जो प्रश्न करते है मेरे बारे) कहो ! वो अल्लाह एक है ,..
२. वो निरपेक्ष है (उसने पुरे विश्व का निर्माण किया लेकिन उसे किसी भी चीज़ की गरज नहीं है) ,..
३. उसको कोइ संतान नहीं है और ना ही वो किसी की संतान है ,..
४. और उस सत्य इश्वर अल्लाह जैसा दूसरा कोई नहीं है |

*यानी इस्लाम की पहली आस्था ये है के इश्वर को एक जानना और मानना, उसके साथ किसी को भी साझी नहीं ठहराना,..

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6 Comments on "इस्लाम की मूल आस्थाये"

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ARTI
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WHO IS ALLAH

Zakaria Ahmad
Guest
Allah(the God) is the creation of whole the creatures,universe you and me.and he is the only who showed the true path to all human beings.he has sent many prophets and messengers like Noah,Moses,Abraham,ismael,Jakob,Yousuf,Jusus and Muhammad and give the books torat,Bible and Quran.because all the prophets were killed and was not accepted by people and words of books were replaced.the God has keep sending his messengers.and after the prophet the Muhammad was last and the God mission was complete.his message has been reached to all human beings.now this is as islam.hope understood and.May Allah(God) make your heart soft amd show the… Read more »
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