शोहर को राज़ी करने की फ़ज़ीलत

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शोहर को राज़ी करने की फ़ज़ीलत

इब्ने अ़ब्बास रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि,
अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:

❝ क्या मैं तुम्हें जन्ऩती मर्द कौन हैं ना बतादूं ? लोगों ने अ़र्ज़ किया: ज़रूर ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ ! आप ने फ़रमाया: नबी जन्ऩती है, सिद्दीक़ जन्ऩती है, शहीद जन्ऩती है, बचपन ही में फौत होने वाला बच्चा जन्ऩती है, और वो शख़्स़ भी जन्ऩती है जो शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में अपने मुसलमान भाई से सिर्फ़ अल्लाह की ख़ातिर मुलाक़ात के लिए जाता है।

और तुम्हारी जन्ऩती औ़रतें वो हैं जो अपने शोहर से मुहब्बत करने वाली, उस के लिए ख़ैर ही का ज़रिया बनने वाली हैं, ऐसी औ़रत कि जब उस का शोहर उस से नाराज़ हो जाए तो खुद शोहर के पास जाए और उसके हाथ में अपना हाथ दे कर कहे: मैं उस वक़्त तक नींद की राह़त नहीं पा सकती जब तक आप मुझसे राज़ी ना हो जाए।

(तमाम फ़ी फ़वाइदिही, बैहक़ी, त़बरानी)
(अस़्सह़ीह़ा 1/578 रक़म 287) अल्फ़ाज़ बैहक़ी के हैं ।

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

 

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