4 रजब | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

4 रजब | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

Contents

4 Rajab | Sirf Panch Minute ka Madarsa

1. इस्लामी तारीख

हज़रत उमर (र.अ) की बहादुरी

हज़रत उमर (र.अ) की बहादुरी से कौन नावाकिफ होगा, सारी दुनिया उन की शुजाअत व दिलेरी का एतेराफ़ करती है। शुरू इस्लाम में मुसलमान काबा के पास नमाज़ नहीं पढ सकते थे, लेकिन उमर फ़ारूक़ (र.अ) के इस्लाम लाते ही मुसलमान खान-ए-काबा में खुल्लम खुल्ला नमाज पढने लगे।

हजरत अली (र.अ) फर्माते हैं के मेरे इल्म के मुताबिक हर एक ने हिजरत छुप कर की; लेकिन हजरत उमर ने अलल एलान हिजरत की। जब उन्होंने हिजरत का इरादा फर्माया, तो अपनी तलवार गले में लटकाई और अपनी कमान कंधे पर डाली और बहुत सारे तीर हाथ में लेकर बैतुल्लाह के पास आए और इत्मीनान से तवाफ़ किया और फिर मकामे इब्राहीम के पास जा कर दो रकात नमाज पढी। फिर मुश्रिकीन की एक एक टोली में गए और फर्माया के जो यह चाहता हो के उसकी माँ उस के मरने पर रोए और उस की औलाद यतीम हो जाए और उस की बीवी बेवा हो जाए, वह मक्का से बाहर आकर मेरा मुकाबला करे। इसके बाद आप ने हिजरत की, मगर कोई भी आपका पीछा करने की हिम्मत न कर सका।

हजरत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (र.अ) फरमाते हैं के उमर (र.अ) का इस्लाम लाना मुसलमानों की फ़तह थी और उनकी हिजरत मुसलमानों की मदद थी और उनकी खिलाफत रहमत थी।


2. हुजूर (ﷺ) का मुअजिजा

हज़रत अली (र.अ) की आँख का ठीक हो जाना

जंगे खैबर के दिन आपने पूछा : “अली कहा है? लोगों ने कहा उन की आँखे दुख रही है, आप (ﷺ) ने फर्माया : उन को बुलाओ, तो हजरत अली आए, आप ने उनकी आँखों पर अपना थूक मुबारक लगा दिया, तो वह उसी वक्त अच्छी हो गई, गोया कुछ हुआ ही नहीं।

[ बुखारी 2942 ]


3. एक फ़र्ज़ के बारे में

जकात की फर्जियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने हजरत मुआज बिन जबल को यमन भेजते वक्त फर्माया

“(यमन वालो) को बता देना के अल्लाह तआला ने उन पर उनके माल में जकात फर्ज की है।

[ बुखारी १४९६ ]

वजाहत: अगर किसी के पास निसाब के बराबर माल हो तो उसमें से जकात अदा करना फर्ज है।


4. एक सुन्नत के बारे में

दुनिया व आखिरत की भलाई की दुआ

इस दुआ का खुब एहतमाम करना चाहिए, इस में दोनो जहा की भलाई तलब की गई है ,
“रसूलुल्लाह (ﷺ) इस दुआ को अक्सर पढ़ा करते थे।

“रब्बाना आतिना फिद दुनिया हसानतौं वाफिल आखिरति हसानतौं वक़िना आजाबन्नार”

तर्जुमा : ऐ हमारे रब हमें दुनिया में भी भलाई अता फरमा और आखिरत मे भी भलाई अता फरमा और दोजख के अजाब से हमे बचा।

[ कुरआन 2:201 ]


5. एक अहेम अमल की फजीलत

शौहर की खुशी पर जन्नत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“जिस औरत ने इस हाल में इन्तकाल किया, के उस का शौहर उससे राजी था, तो वह जन्नत में दाखिल होगी।”

[ तिमिर्जी: ११६१, अन उम्मे सल्मा (र.अ)]


6. एक गुनाह के बारे में

सच्ची गवाही को छुपाने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“तुम गवाही मत छुपाया करो और जो शख्स इस (गवाही) को छुपाएगा, तो बिलाशुबा उसका दिल गुनहगार होगा और अल्लाह तआला तुम्हारे किए हुए कामों को खूब जानता है।”

[ सूरह बकरा: २८३ ]


7. दुनिया के बारे में

दुनियावी ज़िन्दगी धोका है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

दुनियावी ज़िन्दगी तो कुछ भी नहीं सिर्फ धोके का सौदा है।

वजाहत : जिस तरह माल के जाहिर को देख कर खरीदार फँस जाता है, इसी तरह इंसान दुनिया की चमक दमक से धोका खा कर आखिरत से गाफिल हो जाता है, इसलिए इन्सानों को दुनिया की चमक दमक से होशियार रहना चाहिए।

[ सूरह आले इमरान : १८५ ]


8. आखिरत के बारे में

कब्र में ही ठिकाने का फैसला

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जब तुम में से कोई वफ़ात पा जाता है, तो उस को सुबह व शाम उस का ठिकाना दिखाया जाता है अगर जन्नती हो तो जन्नत वालों का और अगर जहन्नमी है तो जहन्नम वालों का, फिर कहा जाता है : यह तेरा ठिकाना है यहां तक के अल्लाह तआला क़यामत के दिन तुझे दोबारा उठाए।”

[बुखारी : १३७९, अन अब्दुल्लाह बिन उमर (र.अ) ]


9. तिब्बे नब्बीसे इलाज

खजूर से इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“जचगी की हालत में तुम अपनी औरतों को तर खजूर खिलाओ और अगर वह न मिलें तो सूखी खजूर खिलाओ।”

खुलासा : बच्चे की पैदाइश के बाद खजूर खाने से औरत के जिस्म का फासिद खून निकल जाता है। और बदन की कमजोरी खत्म हो जाती है।

[ मुस्नदे अबी याला; ४३४ ]


10. कुरआन की नसीहत

लोगों के लिये वही चीज पसंद करो जो तुम अपने लिये पसंद करते हो

रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

तक़वा व परहेजगारी इख्तियार करो, सब से बड़े इबादत गुजार बन जाओगे
और थोड़ी चीज पर रजामन्द हो जाओ सब से बड़े शुक्रगुज़ार बन जाओगे
और लोगों के लिये वही चीज पसंद करो जो तुम अपने लिये पसंद करते हो, तुम (सच्चे) मोमिन बन जाओगे
और तुम अपने पड़ोसी के साथ हुस्ने सुलूक करो (पक्के) मुसलमान बन जाओगे
और कम हँसा करो, क्योंकि ज्यादा हँसने से दिल मुर्दा हो जाता है।”

[ इब्ने माजा : ४२१७ ]


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