शोहर का बीवी पर हक़

पोस्ट 09 :
शोहर का बीवी पर हक़

“अब्दुल्लाह बिन औफ़ रज़िअल्लाहु अ़न्हु से रिवायत है कि, फ़रमाते हैं:”
जब मुआ़ज़ रज़िअल्लाहु अ़न्हु मुल्के शाम से लौटे तो आते ही नबी ﷺ के आगे सज्दे में गिर गए।

आप ﷺ ने पूछा: ऐ मुआ़ज़ ये क्या है ? वो बोले: मैं शाम गया तो देखा कि वहां लोग अपने बड़ों और सरदारों को सज्दा करते हैं लिहाज़ा मुझे ये बात बहुत अच्छी लगी कि हम आप के साथ भी ऐसा ही करे। अल्लाह के नबी ﷺ ने फ़रमाया:

ऐसा हर्गिज़ ना करना। अगर मैं किसी को हुक्म देता कि वो अल्लाह के सिवा किसी को सज्दा करे तो औ़रत को हुक्म देता कि वो अपने शोहर को सज्दा करे।

📕 इब्ने माजा 1503-ह़सन स़ही़ह़

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एक रिवायत में यूं हैं:

किसी बशर के लिए ये स़ही़ह़ नहीं कि वो किसी बशर को सज्दा करे। अगर ये बात दुरूस्त होती कि एक बशर दूसरे बशर को सज्दा करे तो मैं औ़रत को हुक्म देता कि वो अपने उपर अपने शोहर के हक़ की अज़मत के सबब उसे सज्दा करे।

📕 मुस्नद अहमद, नसाई; रावी: अनस
📕 स़ही़ह़ अल जामे 7725-स़ही़ह़

मालूम हुआ के बीवी के लिए शोहर का मक़ाम बोहोत ही ऊँचा है, बावजूद इसके शोहर को सजदा करना जायज़ नहीं, क्यूंकि सजदा खालिस अल्लाह सुब्हानहु तआला के लिए है।

————-J,Salafy————
इल्म हासिल करना हर एक मुसलमान मर्द-और-औरत पर फर्ज़ हैं
(सुनन्ऩ इब्ने माजा ज़िल्द 1, हदीस 224)

 

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