15. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

1. इस्लामी तारीख

आमुल हुज़्न (ग़म का साल)

रसूलुल्लाह (ﷺ) की जौज-ए-मोहतरमा हज़रत ख़दीजा (र.अ) और चचा अबू तालिब हर वक्त आप (ﷺ) का साथ दिया करते थे। एक मर्तबा अबू तालिब बीमार हो गए और इंतकाल का वक्त करीब आ गया। आप (ﷺ) ने फ़रमाया : ऐ चचा ! एक मर्तबा ” ला इलाहा इलल्लाह “ कह लो ताके खुदा के सामने तुम्हारी शफ़ाअत के लिये मुझे दलील मिल जाए। लेकिन अबू जहल और अब्दुल्लाह बिन उमय्या वगैरह ने कहा के अबू तालिब ! क्या तुम अब्दुल मुत्तलिब के दीन को छोड़ दोगे? अबू तालिब ने कलिमा पढ़ने से इनकार कर दिया और आखरी लफ़्ज़ जो उन की ज़बान पर था वह यह के मैं अब्दुल मुत्तलिब के दीन पर हूँ और इंतकाल हो गया। अभी चचा के इंतकाल का ग़म हल्का न हुआ था, के उसके कुछ ही दिनों के बाद आप (ﷺ) की जाँनिसार और गमख्वार बीवी हज़रत ख़दीजातुल कुबरा (र.अ) भी इस दुनिया से चल बसीं।

इस तरह यके बाद दीगरे दोनों के इन्तेक़ाल कर जाने से आप (ﷺ) पर रंज व ग़म और मुसीबत का एक पहाड़ टूट पड़ा, क्योंकि आपकी दावत व तबलीग़ के हर मरहले पर अबू तालिब और हजरत स ख़दीजा, दोनों आपका साथ दिया करते थे और हजरत खदीजा (र.अ) तो हमेशा आप की मदद करती थीं और परेशानी के वक्त बेहतरीन मशवरे दिया करती थीं। इस लिये दोनों का एक साल में इंतकाल कर जाना आपके लिए बड़ा हादसा था। इसी वजह से आप (ﷺ) ने इस साल का नाम “आमुल हुज्न” यानी गम का साल रखा।

TO BE CONTINUE ….

📕 आमुल हुज्न


2. अल्लाह की कुदरत

समुन्दरी मछली में अल्लाह की कुदरत

जिस तरह अल्लाह तआला ने हमारे लिये जमीन पर बेशुमार ग़िज़ाएँ पैदा फ़रमाई इसी तरह समन्दर में बेशुमार किस्म की मछलियों को हमारी गिजा बना दिया।

लोग हजारों साल से समुन्दरी मछलियों का शिकार कर के अपनी गिजा हासिल कर रहे हैं। लेकिन आज तक मछलियां खत्म नहीं हुई। और अजीब बात यह है के खारे और मीठे समुन्दर की मछलियों के जायके में कोई खास फर्क नहीं होता।

बेशक यह अल्लाह की कुदरत और बन्दों पर उसकी बड़ी इनायत है जिसने उनके लिये मछली जैसी अहम गिजा का इन्तज़ाम फर्माया।

📕 अल्लाह की कुदरत


3. एक फर्ज के बारे में

हमेशा सच्ची गवाही देना

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :

“ऐ ईमान वालो ! इन्साफ पर कायम रहते हुए अल्लाह के लिए गवाही दो, चाहे वह तुम्हारी जात, वालिदैन और रिश्तेदारों के खिलाफ ही (क्यों न हो।”

📕 सूरह निसा : १३५

फायदा: सच्ची गवाही देना और झूठी गवाही देने से बचना जरुरी है।


4. एक सुन्नत के बारे में

बैतुलखला जाने का तरीका

रसूलल्लाह (ﷺ) जब इस्तंजा के लिये तशरीफ ले जाते, तो चप्पल पहन लेते और सर को ढांप लेते।

📕 बैहकी फी सुनने कुबरा : ९६/१


5. एक अहेम अमल की फजीलत

अपने घर वालों को खिलाना पिलाना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

“जो तुमने खुद खा लिया वह तुम्हारे लिये सदका है और जो कुछ तुम ने अपनी औलाद को खिलाया वह तुम्हारे लिये सदका है और जो कुछ तुम ने अपनी बीवी को खिलाया वह तुम्हारे लिये सदका है और जो कुछ तुमने अपने खादिम को खिलाया उस में भी तुम्हारे लिये सदके का सवाब है।”

📕 मुस्नदे अहमद:१६७२७


6. एक गुनाह के बारे में

शिर्क और कत्ल करने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

“अल्लाह तआला हर गुनाह को माफ कर सकता है, मगर उस आदमी को माफ नहीं करेगा, जो शिर्क की हालत में मर जाए, दूसरा वह आदमी जो किसी (बेगुनाह) मुसलमान भाई को जानबूझ कर क़त्ल कर दे।”

📕 अबू दाऊद: ४२७०


7. दुनिया के बारे में

दुनिया में उम्मीदों का लम्बा होने का फितना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

“मुझे अपनी उम्मत पर सब से ज़ियादा डर ख्वाहिशात और उम्मीदों के बढ़ जाने का है, ख्वाहिशात हक़ से दूर कर देती हैं और उम्मीदों का लम्बा होना, आखिरत को भुला देता है, यह दुनिया भी चल रही है और हर दिन दूर होती चली जा रही है और आखिरत भी चल रही है। और हर दिन करीब होती जा रही है।” (यानी हर वक़्त ज़िन्दगी कम होती जा रही है और मौत करीब आती जा रही है, इसलिये आखिरत की तैयारी में लगे रहना चाहिए)

📕 कंजुल उम्माल : ४३७५८


8. आख़िरत के बारे में

नेक अमल करने वालों का इनाम

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :

“जो लोग ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, वह जन्नत के बागों में दाखिल होंगे, वह जिस चीज़ को चाहेंगे उनके रब के पास उन को मिलेगी। (उनकी) हर ख्वाहिश का पूरा होना भी बड़ा फज़ल व इनाम है।”

📕 सूरह शूरा : २२


9. क़ुरान की नसीहत

हर मामले में इंसाफ करो

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :

” ऐ ईमान वालो ! अल्लाह तआला के लिये सच्चाई पर कायम रहने वाले और इन्साफ के साथ शहादत (गवाही) देने वाले बन जाओ और किसी कौम की दुश्मनी तुम्हें इस बात पर आमादा न कर दे, के तुम इन्साफ न करो (बल्कि हर मामले में) इंसाफ करो, यह परहेजगारी के ज्यादा करीब है और अल्लाह तआला से डरते रहो बेशक जो कुछ तुम करते हो अल्लाह तआला उसे बाखबर है।”

📕 सूर-ए-मायदा : ८

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