कयामत की तारीख की ख़बर?

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۞ बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ۞

कयामत की तारीख़ की ख़बर नहीं दी गई

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ही जानता हैं कि कयामत कब आयेगी। कुरान ऐ करीम में बताया गया है कि कयामत अचानक आ जाएगी। बाकी उसकी मुक़र्रर तारीख़ की ख़बर नहीं दी गई।

एक बार हज़रत जिब्रील (अलैहि सलाम) ने इंसानी शक्ल में आकर मज्लिस में हाज़िर लोगों की मौजूदगी में नबी-ऐ-करीम (ﷺ) से पूछा कि “कयामत कब कायम होगी, तो उनके इस सवाल के जवाब में प्यारे नबी (ﷺ) ने इर्शाद फरमाया कि ‘इस बारे में सवाल करने वाले से ज़्यादा उसको इल्म नहीं है जिस से सवाल किया गया है।’[बुखारी व मुस्लिम शरीफ]

यानी इस बारे में हम और तुम दोनों बराबर हैं। न मुझे उसके कायम होने के वक्त का इल्म है और न तुमको है।

एक बार जब लोगों ने प्यारे नबी (ﷺ) से पूछा कि कयामत कब आयेगी तो अल्लाह तआला की तरफ से हुक्म हुआः

“आप फरमा दीजिए कि इसका इल्म सिर्फ मेरे रब(अल्लाह) ही के पास है। उसके वक्त पर उसको सिवाए अल्लाह तआला के कोई जाहिर न करेगा। आसमान व जमीन में बड़ी भारी घटना होगी। वह तुम पर बिल्कुल ही अचानक आ पड़ेगी। वे आपसे इस तरह पूछते हैं जैसे गोया आप उसकी खोज कर चुके हैं। आप फरमा दीजिए कि उसका इल्म सिर्फ अल्लाह के पास है, लेकिन अक्सर लोग नहीं जानते।” [सुरः अल-आराफ]

कयामत अचानक आ जाएगी

अल्लाह तआला क़ुरान -ऐ -मजीद में फरमाता है:

“बल्कि वह(क़यामत) आ जाएगी अचानक उनपर और उनको बदहवास कर देगी। न उसके हटाने की उसको कुदरत होगी और न उनको मोहलत दी जाएगी।” [सूरः अंबिया]

इस मुबारक आयत से और इससे पहली आयत से मालूम हुआ कि कयामत अचानक आ जाएगी।

हज़रत रसूले करीम (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया कि “अलबत्ता कयामत ज़रूर इस हालत में कायम होगी कि दो आदमियों ने अपने दर्मियान (ख़रीदने-बेचने के लिए) कपड़ा खोल रखा होगा और अभी मामला तय करने और कपड़ा लपेटने भी न पायेंगे कि कयामत कायम होगी।

एक इंसान अपनी ऊंटनी का दूध निकाल कर जा रहा होगा कि पी भी न सकेगा और कयामत यकीनन इस हाल में कायम होगी कि इंसान अपना हौज लीप रहा होगा और अभी उसमें (मवेशियों को) पानी भी न पिलाने पायेगा और वाकई कियामत इस हाल में कायम होगी कि इंसान अपने मुंह की तरफ लुक़्मा उठायेगा और उसे खा भी न सकेगा।[बुखारी व मुस्लिम शरीफ]

यानी जैसे आजकल लोग कारोबार में लगे हुए हैं, उसी तरह कियामत के आने वाले दिन भी लगे होंगे कि अचानक कियामत आ पहुंचेगी।

जुम्मे का दिन होगा

जिस दिन कियामत कायम होगी, वह जुमे का दिन होगा। प्यारे नबी (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया कि “सब दिनों से बेहतर जुमा का दिन है। उसी दिन वह(आदम और हव्वा अलैहि सलाम) जन्नत से निकाले गये और कियामत जुमा ही के दिन कायम होगी।[मुस्लिम शरीफ]

दूसरी हदीस में है कि आंहज़रत सैयदे आलम (ﷺ) ने फरमाया कि “जुमा के दिन कियामत कायम होगी। हर करीबी फरिश्ता और आसमान और जमीन और पहाड़ और समंदर, ये सब जुमा के दिन से डरते हैं कि कहीं आज कियामत न हो जाए।[मिश्कात शरीफ]

To be Continued …

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