अल्लाह तआला ने ज़मीन पर बुलंद और ऊँचे ऊँचे पहाड बनाए, जिस की चोटियों बादलों से भी ऊपर तक पहुंची हुई होती है और फिर उन्हीं पहाड़ों से नदियां, समुंदर, दर्या, मील और मीठे मीठे पानी के ३ चश्मे जारी किये, जिस से तमाम मखलूक अपनी अपनी प्यास और जिन्दगी की जरूरियात पूरी करती है।
पानी के यह बहते हुए चश्मे, मज़बूत और सख्त चट्टानों से जारी हो कर खुदा की अजीम कुदरत का नमूना दुनिया की निगाहों के सामने पेश कर रहे हैं।
दाँतों की बनावट में अल्लाह की क़ुदरत दाँतों की बनावट पर गौर कीजिये के अल्लाह तआला ने ३२ टुकड़ों को कैसी हसीन व खूबसूरत लड़ी में पिरोया है और उस की जड़ों को नर्म हड्डी में किस खूबी के साथ पेवस्त किया है, यह दाँत एक तरफ जहाँ चेहरे की हुस्न व जीनत हैं। वहीं उन से हम चबाने, काटने, पीसने और तोड़ने का अहम काम भी कर लेते हैं और अल्लाह की अजीब कुदरत के उन को बत्तीस टुकड़ों में बनाया, एक ही सालिम हड्डी में उन को नहीं ढाला, वरना मुंह में बड़ी तकलीफ होती, इसी तरह अगर एक दाँत में कोई खराबी होती है,…
बिजली कुंदना अल्लाह की कुदरत बारिश के आने से पहले आसमान पर तह ब तह बादल जमा होना शुरू हो जाते हैं, लेकिन अल्लाह की कुदरत का नजारा देखिये के इन बादलों में न कोई मशीन फिट होती है और न ही किसी किस का कोई जनरेटर लगा होता है। मगर इन घने बादलों में अल्लाह बिजली की ऐसी चमक और कड़क पैदा कर देता है के रात की तारीकी में भी उजाला फैल जाता है और कभी कभी इतनी सख्त गरज्ती और बिजली कुंदती है के दिलों में घबराहट और सारे माहौल में खौफ तारी हो जाता है। बेशक यह अल्लाह तआला की कुदरत की दलील…
बचाव की सलाहियत Highlights • जानवरों की सुरक्षा: अल्लाह ने हर जानवर को अपनी हिफ़ाज़त के लिए विशेष उपाय दिए हैं।• सींग का महत्व: बैल, भैंस, और बकरियों को सींग दिए गए हैं, जो उनकी रक्षा का साधन हैं।• जंगली जानवरों की रक्षा: हिरन, बारा सिंघा और गेंडे को ऐसे सींग दिए गए हैं जो उन्हें हमलावरों से बचाने में मदद करते हैं।• हिफ़ाज़त के तरीके: सभी जानवरों को अपनी रक्षा का तरीका सिखाना अल्लाह की कुदरत की बड़ी निशानी है।• अल्लाह की कुदरत: यह सुरक्षा और रक्षा के उपाय अल्लाह की महान कारीगरी और बुद्धिमत्ता को दर्शाते हैं। अल्लाह तआला ने हर…
मुंह में रतूबत (थूक) Highlights • मुंह की रतूबत (थूक): खाना चबाने के दौरान पैदा होती है, जो हज्म में मदद करती है।• नॉर्मल रतूबत: हल्की रतूबत मुंह को सूखने से बचाती है और बात करने में सहायक होती है।• असंतुलन के प्रभाव: रतूबत की कमी से मुंह सूखने पर दम घुटने लगेगा, और अधिकता से बोलने और मुंह खोलने में कठिनाई होगी।• अल्लाह की कुदरत: खाना खाने के वक्त रतूबत की मात्रा बढ़ा देना और सामान्य स्थिति में उसे संतुलित रखना।• जीवन का संतुलन: यह अल्लाह की शक्ति है जो हर स्थिति में इंसान के लिए उपयुक्त व्यवस्था करती है। अल्लाह तआला ने…
ज़बान दिल की तर्जमान है : अल्लाह की कुदरत Highlights • ज़बान की नेअमत: अल्लाह तआला ने इंसान को ज़बान जैसी महत्वपूर्ण नेअमत अता की, जिसके द्वारा न सिर्फ स्वाद का एहसास होता है, बल्कि दिल की भावनाओं को भी व्यक्त किया जाता है।• दिल की तर्जमानी: दिल में उठने वाली भावनाओं को ज़बान शब्दों में बदल देती है, जो दिमाग और दिल की कड़ी मेहनत का परिणाम होती है।• कुदरत की कारीगरी: अल्लाह तआला ने दिल, दिमाग और ज़बान को इस तरह से जोड़ा है कि वे एक-दूसरे से समन्वित होकर कार्य करते हैं। अल्लाह तआला ने हम को ज़बान जैसी नेअमत अता फरमायी। उस के जरिये जहाँ…
इंसान की हड्डियों में अल्लाह की कुदरत Highlights • हड्डियों का ढांचा: इंसान का शरीर हड्डियों के मजबूत ढांचे पर खड़ा है, जो भारी वजन सहन करने की क्षमता रखते हैं।• कूल्हे की हड्डी: कूल्हे की हड्डी 3000 किलो तक वजन उठाने की क्षमता रखती है, जो स्टील से भी ज्यादा मजबूत और लचीली होती है।• हड्डियों की लचक: हड्डियाँ स्टील से हल्की, लचीली और अधिक ताकतवर होती हैं, जो इंसान के लिए आरामदायक और सहनशील होती हैं।• स्टील से ज्यादा ताकत: हड्डियाँ स्टील से अधिक ताकतवर और लचीली होने के कारण इंसान को सक्षम बनाती हैं।• अल्लाह की कुदरत: यह अद्भुत ताकत और लचीलापन अल्लाह की…
जम जम का पानी अल्लाह तआला ने दुनिया में समन्दर, झील, ओले, बारिश और चश्मों का पानी पैदा फर्माया है, लेकिन जम जम का पानी पैदा कर के अपनी कुदरत का जबरदस्त इज़हार फर्माया है। दीगर पानी की तरह इस में भी प्यास बुझाने की सलाहियत है लेकिन खास बात यह है के इस में भूक मिटाने और बीमारी से शिफा देने की भरपूर सलाहियत मौजूद है। दीगर पानी बहुत जल्दी सड़ कर नाकाबिले इस्तेमाल हो जाता है, लेकिन जम जम का पानी सड़ने और खराब होने से हमेशा महफूज रहता है। इस पानी में भूक, प्यास मिटाने और बीमारियों से शिफा देने की सलाहियत पैदा…
नाक - कुदरते इलाही की निशानी Highlights • चेहरे की रौनक: नाक के द्वारा चेहरे की सुंदरता और खुशनुमा रूप में वृद्धि होती है।• महसूस करने की ताकत: नथनों में सूंघने की शक्ति होती है, जिससे हम खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता का तुरंत पता लगा सकते हैं।• ताजा हवा की अहमियत: नाक ताजा हवा को सूंघकर दिल की गिजा और शरीर के अंदरूनी तापमान को बनाए रखती है।• कुदरत का करिश्मा: यह अद्भुत व्यवस्था केवल अल्लाह की कुदरत से संभव है।• आध्यात्मिक सोच: यह सोचने पर मजबूर करता है कि इस नायाब तंत्र को बनाने वाला वही है, जो हर छोटे से छोटे तत्व का…
इन्सान का सर कुदरत का शाहकार Highlights • इन्सान का सर: अल्लाह तआला ने इंसान का सिर बेहद सुंदर और गोल आकार में बनाया है।• हड्डियों की संरचना: सिर में पचपन हड्डियाँ जुड़ी हुई हैं, जिनकी अलग-अलग शक्लें हैं, जैसे छह हड्डियाँ खोपड़ी, चौबीस हड्डियाँ ऊपर के जबड़े में, दो हड्डियाँ नीचे के जबड़े में, और बाकी दाँतों में हैं।• कुदरत का शाहकार: इस संरचना को अत्यंत सुंदर और सुनियोजित तरीके से जोड़ा गया है। यह सब अल्लाह की अद्भुत कारीगरी को दर्शाता है।• अल्लाह की कारीगरी: यह सब अल्लाह की कुदरत और अदा की बेमिसाल कारीगरी है, जो बेशुमार हड्डियों को इस तरह से जोड़कर…
शक्ल व सूरत का मुख्तलिफ होना Highlights • हर इंसान की शक्ल, रंग और सूरत अल्लाह की कुदरत से अलग होती है।• विभिन्न देशों, नस्लों और खित्तों के लोगों की शक्लें आपस में भिन्न होती हैं।• मर्द और औरत की शक्ल और बनावट में भी फर्क होता है, जो अल्लाह की महान कुदरत को दर्शाता है। अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत से हर एक इन्सान के चेहरे पर दो कान, दो आँखें, नाक, मुँह और होंट बनाए, उस के बावजूद सब की शक्ल व रंग एक दूसरे से मुख्तलिफ है, हर मुल्क, खित्ते या नस्ल के लोगों की शक्ल व सूरत दूसरी जगह के रहने वालों…
बर्फीले पहाड़ों में अल्लाह की कुदरत Highlights • बर्फीले पहाड़ों का मौसम: ऊंचाई पर सूरज के करीब होने के बावजूद पहाड़ बर्फ से ढके रहते हैं।• सर्दी का असर: जितना ऊंचा जाते हैं, सर्दी उतनी ही ज्यादा महसूस होती है।• प्राकृतिक संतुलन: पहाड़ों की चोटी पर बर्फ का जमना और सर्द वातावरण बनाना अनोखी व्यवस्था है।• अल्लाह की अज़ीम कुदरत: ऊंचाई पर बर्फ का स्थायित्व अल्लाह की महानता का प्रमाण है।• सुभानअल्लाह: यह सब अल्लाह की बेहतरीन सृष्टि और कारीगरी का करिश्मा है। बाज़ ऊंचे इलाकों और बुलंद पहाड़ों पर सर्द मौसम की वजह से बर्फ जम जाती है और पहाड़ों की चोटी बर्फ से ढक…
इन्सान की पैदाइश तीन अंधेरों में Highlights • इंसान की तखलीक़: माँ के पेट में तीन अंधेरों में, बिना किसी रोशनी के, इंसान का निर्माण होता है।• अल्लाह की कुदरत: यह अद्भुत और जबरदस्त कुदरत का उदाहरण है, जहाँ अल्लाह तआला ने एक संकीर्ण और अंधेरी जगह में इंसान को पैदा किया।• कुदरत की बेमिसाल योजना: यह घटना यह साबित करती है कि अल्लाह की कुदरत के आगे किसी भी बड़ी मशीनी प्रक्रिया का कोई मुकाबला नहीं है। काइनात की सब से हसीन तरीन मख्लूख “इन्सान” जिस के लिये अल्लाह तआला ने इस कारखान ए आलम को वुजूद बख्शा है, उसकी तखलीख अल्लाह तआला जहाँ कर रहा हैं,…
बिजली की कड़क में अल्लाह की कुदरत अल्लाह तआला बादलों के जरिये बारिश नाज़िल करता है और कभी उससे बिजली पैदा करता है, जिसकी आवाज़ में बड़ी गरज और सख्त कड़क होती है। अल्लाह तआला ने इस बिजली में रौशनी और आवाज़ पैदा कर के अपनी कुदरत से रोशनी में इतनी तेज रफ्तारी पैदा कर दी के वह जमीन पर बिजली की आवाज़ से पहले पहुंच जाती है, फिर कभी इस बिजली को गिरा कर तबाही मचा देता है, गर्ज़ इन बादलों से बारिश और बिजली की गर्ज पैदा करना कुदरते खुदावन्दी का जबरदस्त नमूना है। 📕 अल्लाह की कुदरत
अल्लाह की कुदरत : समुन्दर का उतरना चढ़ना Highlights • समुंदर का पानी: किनारे की ओर चढ़ता और उतरता है, लेकिन इसकी एक तय सीमा होती है।• सीमा का उल्लंघन: यदि समुंदर अपनी सीमा पार कर ले, तो भारी जानी और माली नुक्सान हो सकता है।• पृथ्वी का संतुलन: दुनिया का तीन-चौथाई हिस्सा पानी और एक-चौथाई हिस्सा खुश्की है।• अल्लाह की कुदरत: समुंदरों को उनकी सीमाओं में रोकना अल्लाह की अद्भुत शक्ति है।• जीवन का संतुलन: यह व्यवस्था धरती पर जीवन की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करती है। समुन्दर के किनारे अगर आप जाएँ तो देखेंगे के समुन्दर का पानी किनारे की तरफ़ कभी चढ़ जाता है और कभी उतर…
हवा में निज़ामे कुदरत हवा में अल्लाह का निजामे कुदरत देखो के उस ने हवा पर बादलों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की कैसी डयूटी लगा रखी है के वह बराबर बादलों को ऐसी जमीन पर ले जाकर बारिश बरसाती हैं, जहाँ की जमीन सूखी और पानी के लिये प्यासी हो। अगर अल्लाह तआला बादलों पर यह ज़िम्मेदारी न लगाता तो बादल पानी के बोझ से बोझल हो कर एक ही जगह पर ठहरे रहते और हमारे बाग़ात और खेतियाँ सूखे रह कर जाया हो जाते। यकीनन अल्लाह वह बड़ी अजीम जात है जिस का हुक्म बादलों पर भी से चलता…