काबील और हाबील
काबील और हाबील हज़रत आदम के दो बेटे थे। दोनों के दर्मियान एक बात को लेकर झगड़ा हो गया। काबील ने हाबील को क़त्ल कर डाला, ज़मीन पर यह पहली मौत थी और इस बारे में अभी तक आदम की शरीअत में कोई हुक्म नहीं मिला था। इस लिये काबील परेशान था के भाई की लाश को क्या किया जाए। अल्लाह तआला ने एक कव्वे के जरिये उस को दफन करने का तरीका सिखाया। यह देख कर काबील कहने लगा : “हाए अफसोस! क्या मैं ऐसा गया गुज़रा हो गया के इस कव्वे जैसा भी न बन सका।”
जानिए : काबिल ने हाबिल को क्यों मारा ?
फिर उसने अपने भाई को दफन कर दिया। यहीं से दफन करने का तरीक़ा चला आ रहा है।
हुजूर (ﷺ) ने काबील के मुतअल्लिक फर्माया :
“दुनिया में जब भी कोई शख्स जुल्मन कत्ल किया जाता है तो उस का गुनाह हज़रत आदम के बेटे (काबील) को जरूर मिलता है, इस लिये के वह पहेला शख्स है जिसने जालिमाना क़त्ल की इब्तेदा की और यह नापाक तरीका जारी किया” [मस्नदे अहमद: ३६२३]
इसी लिये इन्सान को अपनी ज़िन्दगी में किसी गुनाह की इजाद नही करनी चाहिये ताके बाद में उस गुनाह के करने वालों का वबाल उसके सर न आए।
तफ्सीली जानकारी के लिए पढ़े :
हज़रत आदम अलैहि सलाम ~ क़सस उल अंबिया