“इस्लाम धर्म सम्पूर्ण एवं सार्वभौमिक धर्म है जो कि अपने सभी अनुयायियों से समानता का व्यवहार करता है (अर्थात् उनको समान समझता है). यही कारण है कि सात करोड़ अछूत हिन्दू धर्म को छोड़ने के लिए सोच रहे हैं और यही कारण था कि गाँधी जी के पुत्र (हरिलाल) ने भी इस्लाम धर्म ग्रहण किया था. यह तलवार नहीं थी कि इस्लाम धर्म का इतना प्रभाव हुआ बल्कि वास्तव में यह थी सच्चाई और समानता जिसकी इस्लाम शिक्षा देता है …”
इस्लाम केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक अति उत्तम जीवन-प्रणाली है: अन्नादुराई (भूतपूर्व… इस्लाम केवल एक धर्म नहीं, बल्कि एक अति उत्तम जीवन-प्रणाली है: तमिलनाडु के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अन्नादुराई इस्लाम के संधर्भ में कहते है –"इस्लाम केवल एक धर्म नहीं है, बल्कि वह एक जीवन-सिद्धांत और अति उत्तम जीवन-प्रणाली है।" इस जीवन-प्रणाली को दुनिया के कई देश ग्रहण किए हुए हैं। *जीवन-संबंधी इस्लामी दृष्टिकोण और इस्लामी जीवन-प्रणाली के हम इतने प्रशंसक क्यों हैं? सिर्फ़ इसलिए कि इस्लामी जीवन-सिद्धांत इन्सान के मन में उत्पन्न होने वाले सभी संदेहों ओर आशंकाओं का जवाब संतोषजनक ढंग से देते हैं। अन्य धर्मों में शिर्क (बहुदेववाद) की शिक्षा मौजूद होने से हम जैसे लोग बहुत-सी हानियों का शिकार…
वैदिक धार्मिक ग्रन्थों में इश्वर के आखरी संदेष्ठा का उल्लेख Last Messenger of God in "Bhawishya Puran" इस पोस्ट में हम आपकी सेवा में कुछ ऐसे प्रमाण पेश कर रहे हैं जिन से सिद्ध होता है कि "कल्कि अवतार" अथवा "नराशंस" जिनके सम्बन्ध में वैदिक धार्मिक ग्रन्थों ने भविष्यवाणी की है वह मुहम्मद (सलल्लाहो अलैहि वसल्लम) ही हैं। क्योंकि कुछ स्थानों पर स्पष्ट रूप में "मुहम्मद" और "अहमद" का वर्णन भी आया है। 1. देखिए भविष्य पुराण (323:5:8) "एक दूसरे देश में एक आचार्य अपने मित्रों के साथ आएगा उनका नाम महामद होगा। वे रेगिस्तानी क्षेत्र में आएगा।" 2. श्रीमदभग्वत पुराण: उसी प्रकार श्रीमदभग्वत पुराण (72-2) में शब्द "मुहम्मद" इस…
K. S. Ramakrushna (Philosophy Prof) About Islam » NonMuslim View About Islam: प्रोफ़ेसर के॰ एस॰ रामाकृष्णा राव (अध्यक्ष, दर्शन-शास्त्र विभाग, राजकीय कन्या विद्यालय मैसूर, कर्नाटक) ‘‘पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) की शिक्षाओं का ही यह व्यावहारिक गुण है, जिसने वैज्ञानिक प्रवृत्ति को जन्म दिया। इन्हीं शिक्षाओं ने नित्य के काम-काज और उन कामों को भी जो सांसारिक काम कहलाते हैं आदर और पवित्राता प्रदान की। क़ुरआन कहता है कि इन्सान को ख़ुदा की इबादत के लिए पैदा किया गया है, लेकिन ‘इबादत’ (पूजा) की उसकी अपनी अलग परिभाषा है। ख़ुदा की इबादत केवल पूजा-पाठ आदि तक सीमित नहीं, बल्कि हर वह कार्य जो अल्लाह के आदेशानुसार उसकी प्रसन्नता प्राप्त…
Periyar E. V. Ramaswami: इस्लाम का मतलब है सार्वजनिक भाईचारा, बस यही इस्लाम है। Non Muslim View About Islam: पेरियार ई॰ वी॰ रामास्वामी (राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत, द्रविड़ प्रबुद्ध विचारक, पत्रकार, समाजसेवक व नेता, तमिलनाडु) ‘‘...हमारा शूद्र होना एक भयंकर रोग है, यह कैंसर जैसा है। यह अत्यंत पुरानी शिकायत है। इसकी केवल एक ही दवा है, और वह है इस्लाम। इसकी कोई दूसरी दवा नहीं है। अन्यथा हम इसे झेलेंगे, इसे भूलने के लिए नींद की गोलियाँ लेंगे या इसे दबा कर एक बदबूदार लाश की तरह ढोते रहेंगे। इस रोग को दूर करने के लिए उठ खड़े हों और इन्सानों की तरह सम्मानपूर्वक आगे बढ़ें कि केवल इस्लाम ही एक रास्ता है...।’’…
इस्लाम की एक विशेषता यह भी है कि उसके विरुद्ध जितना प्रचार हुआ वह उतना ही उन्नति करता गया:… » NonMuslim View About Islam: राजेन्द्र नारायण लाल (एम॰ ए॰ (इतिहास) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय): ‘‘...संसार के सब धर्मों में इस्लाम की एक विशेषता यह भी है कि इसके विरुद्ध जितना भ्रष्ट प्रचार हुआ किसी अन्य धर्म के विरुद्ध नहीं हुआ । सबसे पहले तो महाईशदूत मुहम्मद (सल्ल॰) साहब की जाति कु़रैश ही ने इस्लाम का विरोध किया और अन्य कई साधनों के साथ भ्रष्ट प्रचार और अत्याचार का साधन अपनाया। यह भी इस्लाम की एक विशेषता ही है कि उसके विरुद्ध जितना प्रचार हुआ वह उतना ही फैलता और उन्नति करता गया तथा यह भी प्रमाण है—इस्लाम के ईश्वरीय सत्य-धर्म…
भ्रूणशास्त्र की आयते देखकर डॉ किथ मूर को विश्वास हो गया के "कुरान ईश्वरीय ग्रन्थ है" प्रो. डॉ. कीथ मूर जो कि वर्तमान समय मे विश्व मे एम्ब्रियोलॉजी अर्थात् भ्रूण शास्त्र के सबसे बड़े ज्ञाता माने जाते हैं, और टोरंटो विश्वविद्यालय (कनाडा) के डिपार्टमेण्ट आफ एनाटॉमी एण्ड सेल बॉयोलॉजी मे विभागाध्यक्ष रह चुके हैं, इन्होंने जब शोध कार्य के लिए कुरान की कुछ पवित्र आयतों का अध्ययन किया तो कुरान को ईश्वरीय ग्रंथ मानने पर मजबूर हो गए. 1980 मे प्रोफेसर कीथ मूर को सऊदी अरब की किंग अब्दुल अजीज युनिवर्सिटी मे शरीर विज्ञान और भ्रूण शास्त्र पर व्याख्यान देने के लिए निमंत्रित किया गया , जब प्रोफेसर मूर सऊदी मे थे तो उन्हे किंग अब्दुल…
स्वामी विवेकानंद इस्लाम के बारे में - Swami Vivekananda about Islam NonMuslim View About Islam: स्वामी विवेकानंद (विश्व-विख्यात धर्मविद्) "मुहम्मद(स.) साहब (इन्सानी) बराबरी, इन्सानी भाईचारे और तमाम मुसलमानों के भाईचारे के पैग़म्बर थे। ... जैसे ही कोई व्यक्ति इस्लाम स्वीकार करता है पूरा इस्लाम बिना किसी भेदभाव के उसका खुली बाहों से स्वागत करता है, जबकि कोई दूसरा धर्म ऐसा नहीं करता। ... हमारा अनुभव है कि यदि किसी धर्म के अनुयायियों ने इस (इन्सानी) बराबरी को दिन-प्रतिदिन के जीवन में व्यावहारिक स्तर पर बरता है तो वे इस्लाम और सिर्फ़ इस्लाम के अनुयायी हैं। मुहम्मद(स.) साहब ने अपने जीवन-आचरण से यह बात सिद्ध कर दी कि मुसलमानों में भरपूर बराबरी…
Kodikkal Chelappa Speak About Islam » NonMuslim View About Islam : कोडिक्कल चेलप्पा (बैरिस्टर, अध्यक्ष-संविधान सभा): ‘‘...मानवजाति के लिए अर्पित, इस्लाम की सेवाएं महान हैं। इसे ठीक से जानने के लिए वर्तमान के बजाय 1400 वर्ष पहले की परिस्थितियों पर दृष्टि डालनी चाहिए, तभी इस्लाम और उसकी महान सेवाओं का एहसास किया जा सकता है। लोग शिक्षा, ज्ञान और संस्कृति में उन्नत नहीं थे। साइंस और खगोल विज्ञान का नाम भी नहीं जानते थे। संसार के एक हिस्से के लोग, दूसरे हिस्से के लोगों के बारे में जानते न थे। वह युग ‘अंधकार युग’ (Dark-Age) कहलाता है, जो सभ्यता की कमी, बर्बरता और अन्याय का…
M. N. Roy Speak About Islam » NonMuslim View About Islam: एम॰ एन॰ रॉय संस्थापक-कम्युनिस्ट पार्टी, मैक्सिको कम्युनिस्ट पार्टी, भारत ‘‘इस्लाम के एकेश्वरवाद के प्रति अरब के बद्दुओं के दृढ़ विश्वास ने न केवल क़बीलों के बुतों को ध्वस्त कर दिया बल्कि वे इतिहास में एक ऐसी अजेय शक्ति बनकर उभरे जिसने मानवता को बुतपरस्ती की लानत से छुटकारा दिलाया। ईसाइयों के, संन्यास और चमत्कारों पर भरोसा करने की घातक प्रवृत्ति को झिकझोड़ कर रख दिया और पादरियों और हवारियों (मसीह के साथियों) के पूजा की कुप्रथा से भी छुटकारा दिला दिया।’’ ‘‘सामाजिक बिखराव और आध्यात्मिक बेचैनी के घोर अंधकार वाले वातावरण में अरब के पैग़म्बर…
इस्लाम के बारे में भारतीय ग़ैर-मुस्लिम विद्वानों के विचार ... इस्लाम के बारे में दुनिया के बेशुमार विद्वानों, विचारकों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और इतिहासकारों आदि ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। इनमें हर धर्म, जाति, क़ौम और देश के लोग रहे हैं। यहाँ उनमें से सिर्फ़ भारतवर्ष के कुछ विद्वानों के विचार उद्धृत किए जा रहे हैं:
Laala Kashiram Chawla Speak About Islam » NonMuslim View About Islam: लाला काशी राम चावला ‘‘...न्याय ईश्वर के सबसे बड़े गुणों में से एक अतिआवश्यक गुण है। ईश्वर के न्याय से ही संसार का यह सारा कार्यालय चल रहा है। उसका न्याय सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कण-कण में काम कर रहा है। न्याय का शब्दिक अर्थ है एक वस्तु के दो बराबर-बराबर भाग, जो तराज़ू में रखने से एक समान उतरें, उनमें रत्ती भर फर्क न हो और व्यावहारतः हम इसका मतलब यह लेते हैं कि जो बात कही जाए या जो काम किया जाए वह सच्चाई पर आधारित हो, उनमें तनिक भी पक्षपात या किसी प्रकार…
Munshi Premchand About Islam - प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के विचार इस्लाम के बारे में » NonMuslim View About Islam: मुंशी प्रेमचंद (प्रसिद्ध साहित्यकार) "जहाँ तक हम जानते हैं, किसी धर्म ने न्याय को इतनी महानता नहीं दी जितनी इस्लाम ने। ...इस्लाम की बुनियाद न्याय पर रखी गई है। वहाँ राजा और रंक, अमीर और ग़रीब, बादशाह और फ़क़ीर के लिए ‘केवल एक’ न्याय है। किसी के साथ रियायत नहीं किसी का पक्षपात नहीं। ऐसी सैकड़ों रिवायतें पेश की जा सकती है जहाँ बेकसों ने बड़े-बड़े बलशाली आधिकारियों के मुक़ाबले में न्याय के बल से विजय पाई है। ऐसी मिसालों की भी कमी नहीं जहाँ बादशाहों ने अपने राजकुमार, अपनी बेगम, यहाँ तक कि स्वयं…
Tarun Vijay (News Magazine Editor) About Islam .... » NonMuslim View About Islam : तरुण विजय सम्पादक, हिन्दी साप्ताहिक ‘पाञ्चजन्य’ (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पत्रिका): ‘‘...क्या इससे इन्कार मुम्किन है कि पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) एक ऐसी जीवन-पद्धति बनाने और सुनियोजित करने वाली महान विभूति थे जिसे इस संसार ने पहले कभी नहीं देखा? उन्होंने इतिहास की काया पलट दी और हमारे विश्व के हर क्षेत्र पर प्रभाव डाला। अतः अगर मैं कहूँ कि इस्लाम बुरा है तो इसका मतलब यह हुआ कि दुनिया भर में रहने वाले इस धर्म के अरबों (Billions) अनुयायियों के पास इतनी बुद्धि-विवेक नहीं है कि वे जिस धर्म के लिए जीते-मरते हैं उसी…