20. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). मदीना मुनव्वरा में इस्लाम का फैलना, (2). उमैर और सफवान की साजिश की खबर देना, (3). जन्नत में दाखले के लिये ईमान शर्त है, (4). सफर में आसानी की दुआ, (5). अज़ान का जवाब देना, (6). बातिल परस्तों के लिये सख्त अज़ाब है, (7). दुनिया की ज़िन्दगी खेल तमाशा है, (8). क़यामत के दिन लोगों की हालत, (9). खुम्बी (मशरूम) से आँखों का इलाज, (10). अपने पडोसी को तकलीफ न दे।

Sirf Paanch Minute ka Madrasa in Hindi

Sirf 5 Minute Ka Madarsa (Hindi Book)

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1. इस्लामी तारीख

मदीना मुनव्वरा में इस्लाम का फैलना

मदीना में जियादा तर आबादियाँ क़बील-ए-औसखज़रज की थीं, यह लोग मुशरिक और बुत परस्त थे। उनके साथ यहूद भी रहते थे। जब कभी क़बील-ए-औस व खजरज से यहूद का मुकाबला होता, तो यहूद कहा करते थे के अन क़रीब आखरी नबी मबऊस होने वाले हैं, हम उन की पैरवी करेंगे। और उनके साथ हो कर तुम को “क़ौमे आद” और “कौमे इरम” की तरह हलाक व बरबाद करेंगे।

जब हज का मौसम आया, तो कबील-ए-खजरज के तक़रीबन छे लोग मक्का आए। यह नुबुव्वत का गयारहवा साल था। हुजूर (ﷺ) उन के पास तशरीफ ले गए, इस्लाम की दावत दी और कुरआन की आयते पढ कर सुनाई। उन लोगों ने आप (ﷺ) को देखते ही पहचान लिए और एक दूसरे को देख कर कहने लगे। खुदा की क़सम! यह वही नबी हैं जिनका तज़केरा यहूद किया करते थे। कहीं ऐसा न हो के इस सआदत को हासिल करने में यहूद हम से आगे बढ़ जाएँ। फिर उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया और हुजूर (ﷺ) से कहा के हमारे और यहूद के दर्मियान बराबर लड़ाई होती रहती है; अगर आप इजाजत दें, तो दीने इस्लाम का जिक्र वहाँ जाकर किया करें, ताके वह लोग अगर इस दीन को कबूल कर लें, तो हमेशा के लिये लड़ाई खत्म हो जाए और आपस में मुहब्बत पैदा हो जाए (क्योंकि इस दीन की बुनियाद ही

आपसी मुहब्बत व भाईचारगी पर कायम है) हुजूर (ﷺ) ने उन्हें इजाज़त दे दी। वह वापस हो कर मदीना मुनव्वरा पहुँचे, जिस मज्लिस में बैठते वहां आप (ﷺ) का जिक्र करते। इसका असर यह हुआ के मदीना का कोई घर ऐसा बाक़ी न रहा जहाँ दीन न पहुँचा।

TO BE CONTINUE ….

📕 Islamic History in Hindi


2. हुजूर (ﷺ) का मुअजीजा

उमैर और सफवान की साजिश की खबर देना

उमैर बिन वहब और सफवान बिन उमय्या खान-ए-काबा में बैठ कर बद्र के मकतूलीन पर रो रहे थे, बिलआखिर उन दोनों में पोशीदा तौर पर यह साजिश करार पाई के उमैर मदीना जा कर आप को धोके से क़त्ल कर आए। लिहाज़ा उमैर उठ कर घर आया और तलवार को जहर में बुझा कर मदीना को चल खड़ा हुआ और मदीना पहुँचा। आप (ﷺ) ने पूछा : उमैर यहाँ किस इरादे से आए हो? उस ने कहा के उस कैदी को छुड़ाने आया हूँ। आप (ﷺ) ने फ़र्माया : क्या तुम दोनों ने खान-ए-काबा में बैठ कर मेरे क़त्ल की साजिश नहीं की है? उमैर यह राज की बात सुन कर सक्ते में पड़ गया और बे इख्तियार बोल उठा के मुहम्मद (ﷺ) ! बेशक आप खुदा के पैग़म्बर हैं खुदा की कसम! मेरे और सफवान के अलावा किसी तीसरे को इस मामले की खबर न थी फिर उमैर ने कलिमा पढ़ा और आपने उन के कैदी को छोड दिया।

📕 तारीखे तबरी:१/४५७, जिकर व कअतिबदरिल कुबरा


3. एक फर्ज के बारे में

जन्नत में दाखले के लिये ईमान शर्त है

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :

“जिस शख्स की मौत इस हाल में आए, के वह अल्लाह तआला पर और क़यामत के दिन पर ईमान रखता हो, तो उससे कहा जाएगा, के तूम जन्नत के आठों दरवाज़ों में से जिस से चाहो दाखिल हो जाओ।”

📕 मुसनदे अहमद : ९८


4. एक सुन्नत के बारे में

सफर में आसानी की दुआ

सफर में जाने का इरादा करे तो यह दुआ पढ़े :

तर्जुमा: ऐ अल्लाह ! जमीन को हमारे लिये समेट दे और इस सफर को हम पर आसान कर दे।

और भी देखे : सफर की दुआएं

📕 अबू दाऊद : २५९८


5. एक अहेम अमल की फजीलत

अज़ान का जवाब देना

एक आदमी ने अर्ज किया: “या रसूलल्लाह (ﷺ) ! मोअज्जिन हज़रात फजीलत में हम से आगे बढ गए। रसुलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“तुम भी इसी तरह अज़ान का जवाब दिया करो, जिस तरह वह अजान देते है फिर जब तुम फारिग़ हो जाओ तो अल्लाह तआला से दुआ करो, तुम्हारी दुआ पूरी होगी!”

📕 अबू दाऊद : ५२४


6. एक गुनाह के बारे में

बातिल परस्तों के लिये सख्त अज़ाब है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“जो लोग खुदा के दीन में झगड़ते हैं, जब के वह दीन लोगों में मक़बूल हो चुका है (लिहाजा) उन लोगों की बहस उन के रब के नजदीक बातिल है, उनपर खुदा का ग़ज़ब है और सख्त अजाब (नाज़िल होने वाला है)।”

📕 सूरह शूरा :१६


7. दुनिया के बारे में

दुनिया की ज़िन्दगी खेल तमाशा है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

“दुनिया की ज़िन्दगी खेलकूद के सिवा कुछ भी नहीं है और आखिरत की जिन्दगी ही हकीकी जिन्दगी है, काश यह लोग इतनी सी बात समझ लेते।”

📕 सूरह अनकबूत : ६४


8. आख़िरत के बारे में

क़यामत के दिन लोगों की हालत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“क़यामत के रोज़ सूरज एक मील के फासले पर होगा और उसकी गर्मी में भी इज़ाफा कर दिया जाएगा, जिस की वजह से लोगों की खोपड़ियों में दिमाग़ इस तरह उबल रहा होगा जिस तरह हाँड़ियाँ जोश मारती हैं, लोग अपने गुनाहों के बक़द्र पसीने में डूबे हुए होंगे, बाज टखनों तक, बाज़ पिंडलियों तक, बाज कमर तक और बाज़ के मुंह में लगाम की तरह होगा।”

📕 मुस्नदे अहमद : २१६८२


9. तिब्बे नबवी से इलाज

खुम्बी (मशरूम) से आँखों का इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़ारमाया : “खुम्बी का पानी ऑखों के लिये शिफा है।”

फायदा : हजरत अबू हुरैरह (र.अ) अपना वाकिआ बयान करते हैं, मैंने तीन या पाँच या सात खुम्बिया ली और उसका पानी निचोड़ कर एक शीशी में रख लिया, फिर वही पानी मैंने अपनी बाँदी की दूखती हुई आँख में डाला तो वह अच्छी हो गई। [तिर्मिजी: २०११]

नोट : खुम्बी को हिन्दुस्तान के बाज इलाकों में साँप की छतरी और बाज दूसरे इलाकों में कुकरमत्ता कहते हैं, याद रहे के बाज खुम्बियाँ जहरीली भी होती हैं, लिहाजा तहकीक के बाद इस्तेमाल की जाये।

📕 बुखारी:५७०८


10. नबी (ﷺ) की नसीहत

अपने पडोसी को तकलीफ न दे

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़ारमाया :

“जो शख्स अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान रखता हो उसे चाहिये के अपने पड़ोसी को तकलीफ न दे।”

📕 बुखारी १०१८


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