18. रबी उल आखिर | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

(1). मेअराज का सफर, (2). मय्यित का कर्ज अदा करना, (3). क़यामत की रुसवाई से बचने की दुआ, (4). अज़ान देने की फ़ज़ीलत, (5). कुरआन सुनने से रोकना, (6). दुनिया के मुकाबले में आखिरत बेहतर है, (7). काफिर की बदहाली, (8). खाना खिलाया करो और सलाम को आम करो

Sirf Paanch Minute ka Madrasa in Hindi

Sirf 5 Minute Ka Madarsa (Hindi Book)

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1. इस्लामी तारीख

मेअराज का सफर

हिजरत से एक साल पहले हजूर (ﷺ) को सातों आसमानों की सैर कराई गई, जिस को “मेअराज” कहते हैं। क़ुरआने करीम में भी सराहत के साथ इस का तज़केरा आया है। जब आपकी उम्र मुबारक ५१ साल ९ माह हुई, तोरात के वक़्त आपको मस्जिदे हराम लाया गया और जमजम और मकामे इब्राहिम के दर्मियान से बुराक नामी सवारी पर हजरत जिबईल (अ.स.) के साथ बैतुलमक्दिस तशरीफ लाए। यहाँ आपने तमाम अम्बियाए किराम की इमामत फर्माई। उसके बाद सातों आसमानों पर तशरीफ ले गए। हर आसमान पर अलग अलग नबियों से मुलाकात हुई। सातों आसमान के बाद “सिदरतुल मुन्तहा” तक हज़रत जिब्रईल साथ रहे। उस के बाद आप तने तन्हा आगे बढ़े और उस मकाम तक पहुँचे. जहाँ तक फरिश्ते भी नहीं जा सकते। यहाँ आपको अल्लाह से हम कलामी का शर्फ हासिल हुआ और यहीं पाँच नमाजे तोहफे में दी गई। उसके बाद बैतुलमक्दिस वापस आए और बुराक पर सवार हो कर मक्का मुकर्रमा वापस तशरीफ लाए।

इस अहम सफर में आप ने अल्लाह तआला की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं। जिन के मुतअल्लिक अल्लाह तआला ने फ़रमाया के “उन की आँख न किसी तरफ माइल हुई और न (हद से) आगे बढ़ी। उन्होंने अपने रब (की कुदरत) के बड़े बड़े अजाएबात देखे।” 

[Islamic History]

TO BE CONTINUE ….

📕 सूरह नज्म: १७ ता १४


2. अल्लाह की कुदरत

कोसे कज़ह (Rainbow)

बारिश के मौसम में जब हल्की धूप में बारिश होती है तो आसमान पर एक जानिब से दूसरी जानिब सात रंगों वाली क़ौसे कज़ह (कमान) ज़ाहिर होती है।

कमान के यह मुख्तलिफ रंग आसमान के हुस्न व खूबसूरती में इज़ाफ़ा कर देते हैं, जिसको देख कर इन्सान सोचने पर मजबूर हो जाता है के आखिर आसमान की इस बुलन्दी पर किसी पेन्टिंग के बगैर चन्द मिनटों में इतनी बड़ी, खूबसूरत और हसीन क़ौसे क़ज़ह किसने बनाई।

बेशक यह अल्लाह ही की ज़ात है जो अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ कुदरत का इज़हार फरमाती  है।

📕 अल्लाह की कुदरत


3. एक फर्ज के बारे में

मय्यित का कर्ज अदा करना

हजरत अली (र.अ) फ़र्माते हैं के:

रसुलल्लाह (ﷺ) ने कर्ज को वसिय्यत से पहले अदा करवाया, हालाँकि तुम लोग (कुरआन पाक में) वसिय्यत का तजकेरा कर्ज से पहले पढ़ते हो।

📕 तिर्मिज़ी : २१२२

फायदा: अगर किसी शख्स ने कर्ज लिया और उसे अदा करने से पहले इन्तेकाल कर गया, तो कफन दफन के बाद माले वरासत में से सबसे पहले कर्ज अदा करना जरूरी है, चाहे सारा माल उस की। अदायगी में खत्म हो जाए।


4. एक सुन्नत के बारे में

क़यामत की रुसवाई से बचने की दुआ

कयामत के दिन जिल्लत व रुसवाई से नजात पाने के लिये इस दुआ का एहतमाम करे।

तर्जमाः (ऐ मेरे रब!) मुझे कयामत के दिन रुसवा न फ़र्माना। 

📕 सूरह शुअरा : ८७


5. एक अहेम अमल की फजीलत

अज़ान देने की फ़ज़ीलत

रसुलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“जिस शख्स ने बारा साल तक अजान दी, उस के लिये जन्नत वाजिब हो गई और हर रोज अजान के बदले उसके लिये साठ नेकियाँ लिखी जाएँगी और हर तक्बीर पर तीस नेकियाँ मिलेंगी।” 

📕 इब्ने माजा : ७२८


6. एक गुनाह के बारे में

बुराई से न रोकने का वबाल

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है :

“जो क़ौमें तुम से पहले हलाक हो चुकी हैं, उन में ऐसे समझदार लोग न हुए, जो लोगों को मुल्क में फसाद फैलाने से मना करते, सिवाए चन्द लोगों के जिन को हमने अज़ाब से बचा लिया।”

खुलासा: मतलब यह है के हर एक के लिये भलाई का हुक्म और बुराई से रोकना ज़रूरी है वरना अज़ाब में मुब्तला कर दिया जाएगा।

📕 सूरह हूद: ११६


7. दुनिया के बारे में

दुनिया के मुकाबले में आखिरत बेहतर है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“जो लोग परहेजगार हैं, जब उनसे पूछा जाता है के तुम्हारे रब ने क्या चीज़ नाजिल की है? तो जवाब में कहते हैं : बड़ी खैर व बरकत की चीज नाजिल फ़रमाई है। जिन लोगों ने नेक आमाल किये. उनके लिये इस दुनिया में भी भलाई है और बिला शुबा आखिरत का घर तो दुनिया के मुकाबले में बहुत ही बेहतर है और वाक़ई वह परहेजगार लोगों का बहुत ही अच्छा घर है।”

📕 सूरह नहल: ३०


8. आख़िरत के बारे में

आख़िरत में काफिर की बदहाली

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“क़यामत के दिन काफिर अपने पसीने में डूब जाएगा, यहाँ तक के वह पुकार उठेगा: ऐ मेरे परवरदिगार! जहन्नम में डालकर मुझे इस (अजाब) से नजात दे दीजिये।”

📕 कंजुल उम्माल : ३८९२३


9. तिब्बे नबवी से इलाज

तबीअत के मुवाफिक ग़िज़ा से इलाज

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया :

“जब मरीज़ कोई चीज खाना चाहे, तो उसे खिलाओ।”

फायदा: जो गिजा चाहत और तबी अत के तकाजे से खाई जाती है,
वह बदन में जल्द असर करती है, लिहाजा मरीज़ किसी चीज़ के खाने का तकाज़ा करे,
तो उसे खिलाना चाहिये। हाँ अगर गिजा ऐसी है के जिस से
मर्ज बढ़ने का कवी इमकान है, तो जरूर परहेज करना चाहिये।

📕 कन्जुल उम्माल : २८१३७


10. नबी (ﷺ) की नसीहत

खाना खिलाया करो और सलाम को आम करो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“रहमान (अल्लाह) की इबादत करो और खाना खिलाया करो और सलाम को आम करो (चाहे उस से जान पहचान हो या न हो) तुम जन्नत में सलामती के साथ दाखिल हो जाओगे।”

📕 तिर्मिज़ी : १८५५


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