13. मुहर्रम | सिर्फ़ 5 मिनट का मदरसा

1

इस्लामी तारीख

कौमे नूह पर अल्लाह का अजाब

हज़रत नूह (अ.) साढ़े नौ सौ साल तक अपनी कौम को दावत देते रहे और कौम के अफराद बार बार अजाब का मुतालबा करते रहे, साथ ही अल्लाह तआला ने हजरत नूह (अ.) को खबर दी के मौजूदा ईमान वालों के अलावा कोई और ईमान नहीं लाएगा। तो उन्होंने दुआ की: ऐ अल्लाह! अब इन बदबख्तों पर ऐसा अज़ाब नाजिल फर्मा के एक भी काफिर व मुशरिक जमीन पर जिन्दा न बचे अल्लाह तआला ने उन की दुआ कुबूल फ़र्मा ली और हुक्म दिया के तुम हमारी निगरानी और हुक्म के तहत एक कश्ती तय्यार करो, चुनान्चे एक कश्ती तय्यार की गई.

फिर अल्लाह तआला के हुक्म से जमीन व आस्मान से पानी के दहाने खुल गए और देखते ही देखते जमीन पर पानी ही पानी जमा हो गया, उस वक़्त हज़रत नूह (अ.) ब हुक्मे खुदावन्दी मोमिनीन और जान्दारों में से एक एक जोड़े को लेकर कश्ती में सवार हो गए, बाक़ी तामाम काफिर व मुशरिक पानी के इस तूफान में हलाक हो गए, तक़रीबन छ: महीने के बाद कश्ती १० मुहर्रमुलहराम को जूदी पहाड़ पर ठहरी तो हज़रत नूह अहले ईमान को लेकर अमन व सलामती के साथ जमीन पर उतरे और फिर अल्लाह तआला ने उन्हीं से दुनिया की आबादी का दोबारा सिलसिला शुरू फ़रमाया, इसीलिये आपको “आदमे सानी” कहा जाता है।

[ इस्लामी तारीख ]

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2

अल्लाह की कुदरत

जम जम का पानी

अल्लाह तआला ने दुनिया में समन्दर, झील, ओले, बारिश और चश्मों का पानी पैदा फर्माया है, लेकिन जम जम का पानी पैदा कर के अपनी कुदरत का जबरदस्त इज़हार फर्माया है।

दीगर पानी की तरह इस में भी प्यास बुझाने की सलाहियत है लेकिन खास बात यह है के इस में भूक मिटाने और बीमारी से शिफा देने की भरपूर सलाहियत मौजूद है। दीगर पानी बहुत जल्दी सड़ कर नाकाबिले इस्तेमाल हो जाता है, लेकिन जम जम का पानी सड़ने और खराब होने से हमेशा महफूज रहता है।

इस पानी में भूक, प्यास मिटाने और बीमारियों से शिफा देने की सलाहियत पैदा करना, अल्लाह तआला की कुदरत की बड़ी निशानी है।

[ अल्लाह की कुदरत ]

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3

एक फर्ज के बारे में:

हज किन लोगों पर फर्ज है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“अल्लाह के वास्ते उन लोगों के जिम्मे बैतुल्लाह का हज करना (फर्ज) है जो वहाँ तक पहुँचने की ताकत रखता हो।”

[ सूरह आले इमरान: ९७ ]

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4

एक सुन्नत के बारे में:

दाई करवट सोना

हज़रत बरा बिन आजिब (र.अ) बयान करते हैं के

“रसूलुल्लाह (ﷺ) जब बिस्तर पर तशरीफ लाते, तो दाई (right) करवट पर आराम फर्माते।”

[ बुखारी : ६३१५ ]

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5

एक अहेम अमल की फजीलत:

सखावत इख़्तियार करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“अल्लाह तआला सखी है और सखावत को पसन्द करता है। अच्छे अख्लाक़ को पसन्द करता है और बुरे अख्लाक को नापसन्द करता है।”

[ कंजुल उम्माल : ४३५०० ]

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6

एक गुनाह के बारे में:

कोई चीज़ ऐब बताए बगैर बेचना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जो शख्स कोई ऐबदार चीज़ उस का ऐब बताए बगैर बेचेगा , वह बराबर अल्लाह की नाराजगी में रहेगा और फरिश्ते उसपर लानत करते रहेंगे।”

[ इब्ने माजा : २२४७ ]

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7

दुनिया के बारे में:

दुनिया की नेअमतों का खुलासा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“तुम में से जिस शख्स को सेहत व तन्दुरुस्ती हासिल हो और अपने घर वालों की तरफ से उस का दिल मुतमइन हो और एक दिन का खाना उस के पास मौजूद हो, तो समझलो के दुनिया की तमाम नेअमत उसके पास मौजूद है।”

[ इब्ने माजा : ४१४१ ]

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8

आख़िरत के बारे में:

अहले जन्नत की नेअमत

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“बेशक अहले जन्नत (ऐश व राहत के) मजे ले रहे होंगे, वह और उन की बीवियाँ सायों में मसहेरियों पर तकिये लगाए बैठे होंगे और उन के लिये उस जन्नत में हर किस्म के मेवे होंगे और जो वह तलब करेंगे उनको मिलेगा।”

[ सूरह यासीन ५५ ता५७ ]

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9

तिब्बे नबवी से इलाज

जैतून के तेल के फवायद

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“जैतून का तेल खाओ और उसे लगाओ, क्यों कि उस में सत्तर बीमारियों से शिफा है, जिनमें से एक कोढ़ भी है।”

[ कन्जुल उम्माल : २८२९५ ]

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10

कुरआन की नसीहत:

इस्लाम पर कायम रहना

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

“ऐ ईमान वालो ! अल्लाह से डरते रहो जैसा के उस से डरने का हक्र है और मरते दम तक इस्लाम पर क़ाएम रहना।”

[सूरह आले इमरान :१०२]

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