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हलाल को हराम समझने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है : “ऐ ईमान वालो ! अल्लाह ने तुम्हारे लिये जो पाक व लजीज चीजें हलाल की हैं, उन को अपने ऊपर हराम न किया […]

बुरी तदबीरें करने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : “जो लोग बुरी बुरी तदबीरें (बुरी चाल) करते हैं उन को सख्त अज़ाब होगा और उन की सब तदबीरे (प्लानिंग) नाकाम हो जाएँगी।” […]

हर मामले में इंसाफ करो

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है : ” ऐ ईमान वालो ! अल्लाह तआला के लिये सच्चाई पर कायम रहने वाले और इन्साफ के साथ शहादत (गवाही) देने वाले बन […]

सज्दा करने का सुन्नत का तरीका

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब सज्दा फरमाते तो अपनी नाक और पेशानी को जमीन पर रखते और अपने बाजुओं को पहलू से अलग रखते और अपनी हथेलियों को कांधे के बराबर रखते। […]

अज़ान के बाद दुआ पढ़ना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: “जो बन्दा अजान सुनते वक़्त अल्लाह से यूँ दुआ करे: Allahumma Rabba Hadhihi-D-Dawatit-Tammaa Was-Salatil Qaimah, Aati Muhammadan Al-Wasilata Wal-Fazilah, Wabaathhu Maqaman Mahmudan-Il-Ladhi Waadtah तो वह बन्दा […]

आप (ﷺ) की आखरी वसिय्यत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने आखरी वसिय्यत यह इरशाद फ़रमाई : “नमाजों और अपने ग़ुलामों के बारे में अल्लाह तआला से डरो।” ( यानी नमाज को पाबन्दी से पढ़ते रहा करो और […]

कब्र में मिट्टी डालते वक़्त की दुआ

जब रसूलुल्लाह (ﷺ) ने उम्मे कुलसूम को कब्र में रखा तो पढ़ा: “मिन्हा खलकना कुम, व फिहा नुईदुकुम, व मिन्हा नुखरिजुकुम तारतन ऊखरा” तर्जमा: इस मिट्टी से हमने तुम को […]

बीवियों को सलाम करना

हज़रत उम्मे सलमा (र.अ) बयान करती हैं के:  “आप (ﷺ) रोजाना सुबह के वक्त बीवियों के पास तशरीफ ले जाया करते थे और उन को खुद सलाम किया करते थे।“ […]

सुबह शाम अपने रब को याद किया करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “तुम सुबह व शाम अपने रब को अपने दिल में गिड़गिड़ा कर, डरते हुए और दर्मियानी आवाज के साथ याद किया करो और […]

जन्नत की सिफात

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : “वह घर हमेशा रहने के बाग़ हैं, जिन में परहेजगार लोग दाखिल होंगे। उन बागों के नीचे दूध, शहद और पाकीज़ा शराब की […]

मरीज़ के अयादत की फ़ज़ीलत

हज़रत अली (रज़ीअल्लाहु अन्हु) कहते है के ; “जो शख्स किसी बीमार की दिन के आखिर हिस्से (शाम) में अयादत करता है तो इसके साथ सत्तर हज़ार फ़रिश्ते निकलते है […]

रात के आखरी हिस्से में अल्लाह अपने बन्दे से करीब होता हैं

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “अल्लाह तआला रात के आखरी हिस्से में बन्दे से बहुत जियादा करीब होता हैं, अगर तुमसे हो सके, तो उस वक़्त अल्लाह तआला का जिक्र […]

शहद और कुरआन से शिफा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “तुम अपने लिए शिफा की दो चीजों : यानी शहद और कुरआन को लाजिम पकड़लो।” 📕 इब्ने माजा: ३४५२, अन अब्दुल्लाह बिन मसऊद (र.अ)

कब्र में ही ठिकाने का फैसला

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:  “जब तुम में से कोई वफात पा जाता है, तो उस को सुबह व शाम उस का ठिकाना दिखाया जाता है, अगर जन्नती हो, तो जन्नत […]

माल व औलाद दुनिया के लिए ज़ीनत

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “माल और औलाद यह सिर्फ दुनिया की जिंदगी की एक रौनक है और (जो) नेक आमाल हमेशा बाकी रहने वाले हैं, वह आप […]

शिर्क और कत्ल करने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “अल्लाह तआला हर गुनाह को माफ कर सकता है, मगर उस आदमी को माफ नहीं करेगा, जो शिर्क की हालत में मर जाए, दूसरा वह आदमी […]

नमाज के बाद दूसरी नमाज़ का इंतज़ार करने की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “तकलीफ और नागवारी के बावजूद पूरी तरह मुकम्मल वुजू करना, मस्जिदों की तरफ जियादा कदम बढ़ाना और एक नमाज के बाद दूसरी नमाज़ का इंतज़ार करना, […]

अच्छी तरह वुजू कर के नमाज़ के लिये मस्जिद जाने की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “तुम में से जो शख्स अच्छी तरह मुकम्मल वुजू करता है, फिर नमाज ही के इरादे से मस्जिद में आता है, तो अल्लाह तआला उस […]

मुनाफ़िक की निशानियाँ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया: “मुनाफ़िक की तीन निशानियाँ हैं: जब बात करे तो झूट बोले, वादा करे तो पूरा न करे, जब कोई अमानत रखी जाए तो उस में खयानत करे।” […]

बीमार को दुआ देना

रसूलुल्लाह (ﷺ) जब किसी मरीज की इयादत करते तो फ़र्माते: لاَ بَأْسَ طَهُورٌ، إِنْ شَاءَ اللَّهُ “La Basa Tahuran In Sha Allah” तर्जमा: घबराओ नहीं इन्शाअल्लाह अच्छे हो जाओगे। 📕 […]

दुनिया से बेहतर आख़िरत का घर है

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : “दुनिया की जिन्दगी सिवाए खेल कूद के कुछ भी नहीं और आखिरत का घर मुत्तकियों (यानी अल्लाह तआला से डरने वालों) के लिये […]

आखिरत दुनिया से बेहतर है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: “तुम दुनियावी जिंदगी को मुकद्दम रखते हो, हालांके ! आखिरत दुनिया से बेहतर है और बाकी रहने वाली है (इसलिए आखिरत ही की तय्यारी करो)।” 📕 […]

दुनिया व आखिरत में आफियत की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : बन्दे की अपने रब से माँगी जाने वाली दुआओं में सबसे अफजल यह है: तर्जमा: ऐ अल्लाह! मैं दुनिया और आखिरत में तुझसे आफियत व […]

कब्र की पुकार

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया : “कब्र रोज़ाना पुकार कर कहती है, मैं तन्हाई का घर हूँ, मैं मिट्टी का घर हूँ, मैं कीड़े मकोड़े का घर हूँ।” 📕 तिर्मिज़ी : […]