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तुम्हारे रब ने फरमाया है के मुझ से दुआ माँगो

कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है : “तुम्हारे रब ने फरमाया है के मुझ से दुआ माँगो मैं तुम्हारी दुआ कबूल करूँगा, बिला शुबा जो लोग मेरी इबादत करने से […]

जोड़ों के दर्द का इलाज

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़र्माया : “अंजीर खाओ (फिर उस की अहमियत बताते हुए इर्शाद फर्माया) अगर मैं कहता के जन्नत से कोई फल उतरा है तो यही है, क्यों कि […]

कयामत के दिन का अंदाज़

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है: “जिस दिन तमाम जानदार और फ़रिश्ते सफ़ बांधकर खड़े होंगे उस रोज कोई कलाम न कर सकेगा, अल्बत्ता जिस को खुदाए रहमान (यानी अल्लाह […]

इमाम से पहले सर उठाने का गुनाह

रसूलल्लाह ﷺ ने फ़र्माया: “क्या वह शख्स जो (बाजमात नमाज़ में) इमाम से पहले अपने सर को उठाता है, इस बात से नहीं डरता, के अल्लाह तआला उसके सर को […]

एक दिन के नफ़ली रोजे का सवाब

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “अगर कोई शख्स अल्लाह के वास्ते एक दिन का नफ़ली रोजा रखे और उसके बदले में उस को सारी जमीन भरकर सोना (रोजाना) दिया जाए, […]

गुस्ल के लिये तययम्मुम करना

क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है – “अगर तुम बीमार हो जाओ या सफर में हो या तुम में से कोई शख्स अपनी तबई ज़रूरत (यानी पेशाब पाखाना कर के) […]

शहद का कारखाना

अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत से इन्सानों की खिदमत के लिए एक छोटी सी मखलूक शहद की मक्खी बनाई, जो फूलों से रस जमा कर के छत्तों में महफूज़ कर […]

कयामत में तीन किस्म के लोग

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “कयामत के दिन जहन्नम से एक गर्दन निकलेगी, जिस की दो देखने वाली औंखें, दो सुनने वाले कान और एक बोलने वाली जुबान होगी, वह […]

माल व दौलत आज़माइश की चीजें हैं

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “(जब अल्लाह तआला) इन्सान को आजमाता है तो उस को (जाहिरन माल व दौलत दे कर) उसका इकराम करता है, तो वह (बतौरे […]

नमाज़ में सुस्ती करने का गुनाह

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “ऐसे नमाजियों के लिए बड़ी खराबी है, जो अपनी नमाजों की तरफ़ से गफ़लत व सुस्ती बरतते हैं, जो सिर्फ रियाकारी करते हैं।” […]

बगैर किसी उज्र के नमाज़ क़ज़ा करने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया: “जो शख्स दो नमाज़ों को बगैर किसी उज्र के एक वक्त में पढ़े वह कबीरा गुनाहों के दरवाजों में से एक दरवाजे पर पहुँच गया।” 📕 […]

क़ज़ा नमाजों की अदायगी

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया : “जो कोई नमाज पढ़ना भूल गया या नमाज के वक्त सोता रह गया, तो (उसका कफ्फारा यह है के) जब याद आए उसी वक्त पढ़ […]

हुजूर (ﷺ) गारे हिरा में

नुबुव्वत मिलने का वक़्त जितना करीब होता गया, उतना ही रसूलुल्लाह (ﷺ) तन्हाई को जियादा ही पसन्द करने लगे। सबसे अलग हो कर अकेले रहने से आप को बड़ा सुकून […]

काफिर का मरऊब हो जाना

हज़रत जाबिर (र.अ) फर्माते हैं के हम रसूलुल्लाह (ﷺ) के साथ एक ग़ज़वे में जा रहे थे, रास्ते में एक जगह पड़ाव डाला, तो लोग इधर उधर दो दो, तीन […]

जहन्नमियों का खाना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है : “जहन्नम वालों का आज न कोई दोस्त होगा और न कोई खाने की चीज़ नसीब होगी, सिवाए जख्मों के धोवन के जिस को […]

मुसलमानों पर कुफ्फार का जुल्म व सितम

कुफ्फार व मुशरिकीन मुसलमानों पर बहुत ज्यादा जुल्म व सितम ढाते थे और दीने हक कबूल करने की वजह से उन के साथ इन्तेहाई बे रहमाना सुलूक करते थे। चुनान्चे […]

हाथी में अल्लाह की क़ुदरत

अल्लाह तआला ने दीगर जानवरों के मुकाबले में हाथी को बड़ा डील डोल और जबरदस्त ताक़त अता फ़रमाई है, उस के पैर मज़बूत इमारत के चार सुतून की तरह मजबूत […]

अहले जहन्नम पर दर्दनाक अजाब

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है : “बेशक जक्कूम का दरख्त बड़े मुजरिम का खाना होगा, जो तेल की तलछट जैसा होगा, वह पेट में तेज़ गर्म पानी की तरह […]

मुसाफा से गुनाहों का झड़ना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : “जब मोमिन दूसरे मोमिन से मिल कर सलाम करता है और उस का हाथ पकड़ कर मुसाफा करता है, तो उन दोनों के गुनाह इस […]

हूज़ूर (ﷺ) का शाम का पहेला सफर

दादा अब्दुल मुत्तलिब के इन्तेकाल के बाद हुज़ूर (ﷺ) अपने चचा अबू तालिब के साथ रहने लगे। वह अपनी औलाद से ज़्यादा आपसे मुहब्बत करते थे, जब वह तिजारत की […]

इस्लाम में पहला हज

हज इस्लाम के पांच अरकान में से एक रुक्न है जो सन ९ हिजरी में फर्ज किया गया। लिहाजा इस फरीजे की अदायगी के लिए इसी साल रसूलुल्लाह (ﷺ) ने […]

अल्लामा अब्दुर्रहमान बिन जौज़ी (रह.)

छटी सदी हिजरी में अब्दुर्रहमान बिन जौज़ी (रह.) एक बहुत बड़े मुहद्दिस, मोअरिंख, मुसन्निफ और खतीब गुजरे हैं। सन ५०८ हिजरी में बगदाद में पैदा हुए, बचपन में बाप का […]

इंसान की हड्डियों में अल्लाह की कुदरत

अल्लाह तआला ने इंसानी जिस्म को हड्डी के ढांचे पर खड़ा किया है। यह हड्डियाँ इंसानी जिस्म से कई गुना ज़ियादा वजन उठाने की सलाहियत रखती हैं। जब इन्सान क़दम […]

दावत व तबलीग़ का हुक्म

नुबुव्वत मिलने के बाद भी हुजूर (ﷺ) बादस्तूर गारे हिरा जाया करते थे। शुरू में सूरह अलक़ की इब्तेदाई पाँच आयतें नाज़िल हुईं, फिर कई दिनों तक कोई वहीं नाज़िल […]

फोड़े फुंसी का इलाज

आप (ﷺ) की बीवीयों में से एक बीवी बयान फ़र्माती हैं के एक दिन रसूलुल्लाह ﷺ मेरे पास तशरीफ़ लाए और दर्याफ्त फ़ाया : क्या तेरे पास जरीरह है ? […]

वजू के दरमियान की दुआ

रसूलुल्लाह (ﷺ) वुजू के दौरान यह दुआ पढ़ते थे: तर्जमा : ऐ अल्लाह ! मेरे गुनाहों को माफ़ फ़र्मा और मेरे घर में वुसअत और रिज्क में बरकत अता फ़र्मा। […]