हज़रत युसूफ अलैहि सलाम (भाग: 1) » Qasas ul Anbiya: Part 13.1

ख़ानदान

………. हजरत यूसुफ़ अलैहि सलाम हज़रत याकूब अलैहि सलाम के बेटे और हजरत इब्राहिम अलैहि सलाम के पड़पोते हैं। उनको यह शरफ़ हासिल है कि वह ख़ुद नबी, उनके वालिद नबी, उनके दादा नबी और परदादा हज़रत इब्राहीम अबुल अंबिया (नबियों के बाप) हैं। कुरआन में इनका जिक्र छब्बीस बार आया है और इनको यह भी फक्र हासिल है कि इनके नाम पर एक सूरः (सूरः यूसुफ़) कुरआन में मोजूद है जो सबक और नसीहत का बेनज़ीर जखीरा है, इसीलिए कुरआन मजीद में हज़रत यूसुफ अलैहि सलाम के वाकिए को ‘अहसनुल कसस’ कहा गया है।


हज़रत यूसुफ़ अलैहि सलाम का ख्वाब और यूसुफ़ के भाई

………. शुरू जिंदगी ही से हज़रत यूसुफ़ की दिमागी और फ़ितरी इस्तेदाद दूसरे भाइयों के मुकाबले में बिल्कुल जुदा और नुमायां थी। साथ ही हजरत याकूब अलैहि सलाम यूसुफ़ अलैहि सलाम की पेशानी का चमकता हुआ नूरे नुबूवत पहचानते और अल्लाह की वह्य के ज़रिए इसकी इत्तिला पा चुके थे। इन्ही वजह से वे अपनी तमाम औलाद में हज़रत यूसुफ़ अलैहि सलाम से बेहद मुहब्बत रखते थे और यह मुहब्बत यूसुफ़ के भाइयों से बेहद शाक़ और नाकाबिले बरदाश्त थी।

………. और वे हर वक्त इस फ़िक्र में लगे रहते थे कि या तो हज़रत याकूब के दिल से इस मुहब्बत को निकाल डालें और या फिर यूसफ़ ही को अपने रास्ते से हटा दें, ताकि किस्सा पाक हो जाए। इन भाइयों के हसद पर ख्यालात को जबरदस्त ठेस उस वक्त लगी, जब यूसफ़ अलैहि सलाम ने एक ख्वाब देखा कि ग्यारह सितारे और सूरज व चांद उनके सामने सज्दा कर रह है। हजरत याकूब अलैहि सलाम ने यह ख्वाब सुना तो सख्ती के साथ उनको मना कर दिया कि अपना यह ख्वाव किसी के सामने न दोहराना, ऐसा न हो कि ” सुनकर तेरे भाई बुरी तरह पेश आएं, क्योंकि शैतान इंसान के पीछे लगा है। और तेरा ख्वाब अपनी ताबीर में बहुत साफ और वाजेह है, लेकिन हसद की भड़कती हुई आग ने एक दिन यूसुफ के भाइयों को उनके खिलाफ साजिश करने मजबूर कर ही दिया।

………. तर्जुमा- ‘उनमें से एक ने कहा, यूसुफ को क़त्ल न करो और उसको गुमनाम कुएं में डाल दो कि उठा ले जाए उसको कोई मुसाफिर, अगर तुमको करना ही है।‘ [युसूफ 12:10]

इस मशवरे के बाद सब जमा होकर हजरत याकूब की खिदमत में हाजिर हुए और कहने लगे-

………. तर्जुमा- ‘(ऐ बाप!) क्या बात है कि तुमको यूसुफ के बारे में हम पर एतमाद नहीं है, हालांकि हम उसके खैरख्वाह हैं।‘ [यूसुफ 12:11]

हजरत याकूब समझ गए कि उनके दिलों में खोट है।

………. तर्जुमा- ‘याकूब ने कहा, मुझे इससे रंज और दुख पहुंचता है कि तुम इसको (अपने साथ ले जाओ और मुझे यह डर है कि उसको भेड़िया खा जाए और तुम गाफिल रहो।‘ [यूसुफ 12:13]

यूसुफ के भाई ने यह सुनकर एक जुबान होकर कहा-

………. तर्जुमा- ‘अगर खा गया इसको भेड़िया, जबकि हम सब ताकतवर हैं, तो बेशक इस शक्ल में तो हमने सब कुछ गंवा दिया।‘ [यूसुफ 12:14]


कनान का कुंवां

………. ग़रज यूसुफ अलैहि सलाम के भाई यूसुफ़ को सैर कराने के बहाने ले गए और मश्विरे के मुताबिक उसको एक ऐसे कुएं में डाल दिया, जिसमें पानी न था और मुद्दत से सूखा पड़ा था और वापसी में उसकी कमीज को किसी जानवर के खून में तर करके रोते हुए हजरत याकूब अलैहि सलाम के पास आए और कहने लगे, ‘ऐ बाप! अगरचे हम अपनी सच्चाई का कितना ही यकीन दिलाएं, मगर तुमको हरगिज़ यकीन न आएगा कि हम दौड़ में एक दूसरे से आगे निकलने में लगे हुए थे कि अचानक यूसुफ को भेड़िया उठाकर ले गया।

………. हजरत याक्रूब अलैहि सलाम ने यूसुफ़ के लिबास को देखा तो खून से लथपथ था, मगर किसी एक जगह से भी फटा हुआ न था और न चाक दामां था, फौरन हकीक़त भांप गए मगर भड़कने, तान व तकनीम करने और नफ़रत व हकारत का तरीका बजाए पैग़म्बराना इल्म व फरासत के साथ यह बता दिया कि हकीकत की कोशिश के बावजूद तुम उसे छिपा न सके।


यूसुफ अलैहि सलाम और गुलामी

………. इधर ये बातें हो रही थीं, उधर हिजाजी इस्माईलियों का एक काफिला शाम से मिस्र को जा रहा था। कुंवां देखकर उन्होंने पानी के लिए डोल डाल यूसुफ को देखकर जोश से शोर मचाया “बशारत हो एक गुलाम हाथ आया।”

………. ग़रज इस तरह हजरत यूसुफ को इस्माईली ताजिरों के काफिले ने अपना गुलाम बना लिया और तिजारत के माल के साथ उनको भी मिस ले गए और बाजार में रिवाज के मुताबिक़ बेचने के लिए पेश कर दिया।

उसी वक़्त शाही ख़ानदान का एक रईस और मिस्री फ़ौजों का अफसर फ़ोतीफार बाजार से गुजर रहा था। उसने उनको खरीद लिया और अपने घर लाकर बीबी से कहा –

………. तर्जुमा- ‘देखो! इसको इज्जत से रखो, कुछ अजब नहीं कि यह हमको फायदा बख्शे या हम इसको अपना बेटा बना लें।‘ [यूसुफ 12:21]

फ़ोतीफार ने हजरत यूसुफ़ को औलाद की तरह इज्जत व एहतराम से रखा और अपने तमाम मामले और दूसरी जिम्मेदारियां उनके सुपुर्द कर दीं। यह सब कुछ अल्लाह की मंशा के मुताबिक हो रहा था।

………. तर्जुमा- ‘और इसी तरह जगह दी हमने यूसुफ को उस मुल्क में और इस वास्ते कि उसको सिखाएं बातों का नतीजा और मतलब निकालना और अल्लाह ताकतवर रहता है अपने काम में, लेकिन अक्सर आदमी ऐसे हैं जो नहीं जानते।‘ [यूसुफ 12:21]

इंशा अल्लाह, अगले पार्ट में अजीजे मिस्र की बीवी जुलेखा और युसूफ अलैहि सलाम के वाकिये पर गौर करेंगे.

To be continued …

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क़सस उल अम्बिया: हिकायत (नबियों के वाक़ियात)

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